रतलाम. शहर के रतलाम पब्लिक स्कूल में गुरुवार को एक अलग ही नजारा था। हमेशा की तरह सभाकक्ष में बच्चे एक कार्यक्रम के लिए एकत्रित तो हुए लेकिन सामने शिक्षक के रूप में पुलिस अधीक्षक अमितसिंह खड़े थे। हाल ही में रतलाम में कार्यभार संभालने वाले पुलिस अधीक्षक ने पत्रिका निर्भीक बचपन अभियान में खुद को एक छात्र के तौर पर पेश करते हुए बच्चों को शिक्षक की संज्ञा दी। सवालों के जवाबों के बीच कभी पारिवारिक माहौल का जिक्र किया तो बच्चों की जिज्ञासाओं को शांत करने के लिए उदाहरण भी दिए गए।
बच्चों की सुरक्षा और उनके सपनों को हकीकत का रूप देने के लिए साहसी बनाने का पत्रिका अभियान निर्भीक बचपन का चौथा दौर गुरुवार को शहर के रतलाम पब्लिक स्कूल में हुआ। रतलाम के पुलिस अधीक्षक अमितसिंह ने कक्षा 9वीं से कक्षा 12वीं के 250 से ज्यादा बच्चों के बीच करीब एक घंटा गुजारा। इस दौरान उन्होंने बच्चों के हर उस सवाल का जवाब दिया जो बालमन के साथ बच्चों में जिज्ञासा बना हुआ था। सवालों में नोटबंदी से लेकर बच्चों की सुरक्षा, उनके लिए बने कानून, अपराधियों का सजा से बच जाना, आरक्षण के कारण योग्यता की अनदेखी और बाल शोषण रोकने में पुलिस की भूमिका से जुड़े थे। पुलिस अधीक्षक अमितसिंह ने खुद को छात्र बताते हुए बच्चों को शिक्षक कहते हुए जवाब भी दिए। उन्होंने हर जवाब के साथ उदाहरण भी प्रस्तुत किए।