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एसपी ने कहा- मैं छात्र, आप मेरे शिक्षक

- पत्रिका निर्भीक बचपन अभियान में बच्चों के बीच गुजारा एक घंटा

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vikram ahirwar

Dec 22, 2016

ratlam

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रतलाम. शहर के रतलाम पब्लिक स्कूल में गुरुवार को एक अलग ही नजारा था। हमेशा की तरह सभाकक्ष में बच्चे एक कार्यक्रम के लिए एकत्रित तो हुए लेकिन सामने शिक्षक के रूप में पुलिस अधीक्षक अमितसिंह खड़े थे। हाल ही में रतलाम में कार्यभार संभालने वाले पुलिस अधीक्षक ने पत्रिका निर्भीक बचपन अभियान में खुद को एक छात्र के तौर पर पेश करते हुए बच्चों को शिक्षक की संज्ञा दी। सवालों के जवाबों के बीच कभी पारिवारिक माहौल का जिक्र किया तो बच्चों की जिज्ञासाओं को शांत करने के लिए उदाहरण भी दिए गए।
बच्चों की सुरक्षा और उनके सपनों को हकीकत का रूप देने के लिए साहसी बनाने का पत्रिका अभियान निर्भीक बचपन का चौथा दौर गुरुवार को शहर के रतलाम पब्लिक स्कूल में हुआ। रतलाम के पुलिस अधीक्षक अमितसिंह ने कक्षा 9वीं से कक्षा 12वीं के 250 से ज्यादा बच्चों के बीच करीब एक घंटा गुजारा। इस दौरान उन्होंने बच्चों के हर उस सवाल का जवाब दिया जो बालमन के साथ बच्चों में जिज्ञासा बना हुआ था। सवालों में नोटबंदी से लेकर बच्चों की सुरक्षा, उनके लिए बने कानून, अपराधियों का सजा से बच जाना, आरक्षण के कारण योग्यता की अनदेखी और बाल शोषण रोकने में पुलिस की भूमिका से जुड़े थे। पुलिस अधीक्षक अमितसिंह ने खुद को छात्र बताते हुए बच्चों को शिक्षक कहते हुए जवाब भी दिए। उन्होंने हर जवाब के साथ उदाहरण भी प्रस्तुत किए।


कालाधन वाले क्यों नहीं पकड़ रही पुलिस
अभियान के दौरान पुलिस अधीक्षक ने सबसे पहले निर्भीक बचपन और निर्भीक बालिका के लिए बने कानूनी पहलुओं का जिक्र किया। इसके बाद खुद सभाकक्ष में आ गए और सीधे बच्चों से रूबरू हुए। बच्चों के बीच जाकर उनसे सवाल पूछे गए। छात्र चंदन वर्मा ने नोटबंदी पर पूछा कि पुलिस कालाधन वालों को क्यों नहीं पकड़ रही तो छात्रा वैशाली का सवाल था कि आरक्षण के कारण योग्यता को पीछे क्यों धकेला जा रहा है। इस पर पुलिस अधीक्षक अधीक्षक ने जवाब दिया कि कालाधन रखने वालों के खिलाफ साक्ष्य के आधार पर कार्रवाई की जाती है। सिस्टम ऐसा हो कि किसी की योग्यता ना दबी रहे।
राष्ट्रगान से समापन, संकल्प ले कहा, हम बनेंगे निर्भीक
पुलिस अधीक्षक से करीब 19 बच्चों ने विभिन्न सवाल किए। इस दौरान कुछ बच्चों को उन्होंने अपने पास बुलाकर बैठाया और उनके जवाब दिए। सवाल पर शाबासी भी मिली। साथ ही किसी भी घटना या बच्चों के साथ गलत होने की दशा में सूचना देने के लिए पुलिस अधीक्षक ने अपने मोबाइल नंबर भी बच्चों को बताए। विश्वास दिलाया कि पुलिस बच्चों की सुरक्षा के लिए हर वक्त तैयार हैं, बस बच्चों को साहसी बनकर खड़ा होना होगा। अभियान के कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। इसके पूर्व बच्चों ने हाथ उठाकर पुलिस अधीक्षक को संकल्पित हो विश्वास दिलाया कि वे निर्भीक बनकर रहेंगे।