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कलेक्टर के सामने अभियोजन अधिकारियों ने रखी अपनी मांगे

कलेक्टर के सामने अभियोजन अधिकारियों ने रखी अपनी मांगे

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रतलाम

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kamal jadhav

Dec 28, 2019

कलेक्टर के सामने अभियोजन अधिकारियों ने रखी अपनी मांगे

कलेक्टर के सामने अभियोजन अधिकारियों ने रखी अपनी मांगे

रतलाम। अभियोजन अधिकारियों की 11 सूत्रीय मांगो को लेकर प्रदेश के सभी जिलों में शुक्रवार को जिलास्तर पर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मांगों को पूरा करने की बात कही गई। रतलाम में भी अभियोजन अधिकारियों ने कलेक्टर रुचिका चौहान को और अनुभागों में एसडीएम को ये ज्ञापन सौंपे गए। रतलाम में सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी पिंजूलाल मेडा, कृष्‍णकांत चौहान, जस्‍सू वास्‍केल, विवेक गोयल, मुकेश मौर्य, शिव मनावरे और सुशील शर्मा ने उपस्थित होकर ज्ञापन दिया। तहसील आलोट में सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी अच्‍छु सिंह गोयल ने अनुविभागीय अधिकारी को ज्ञापन दिया गया।

ये हैं इनकी प्रमुख मांगें
- सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी का वेतनमान छठवें वेतन आयोग में ग्रेड-पे 5400 रुपए पर निर्धारित किया जाए।
- लोक अभियोजक व अपर लोक अभियोजक के पद नियमित संवर्ग के लिए आरक्षित की जाए।
- संवर्ग के अधिकारियों को लंबित समयमान अविलंब स्वीकृत किया जाए।
- जिला स्तर पर प्रत्येक अभियोजन कार्यालय हेतु कम से कम एक शासकीय वाहन के लिए 30000 रुपए मासिक बजट स्वीकृत किया जाए।
- कार्य के दौरान आवश्यक स्टेशनरी, विधिक पुस्तकों, समाचार पत्रों व पत्रिकाओं हेतु लाइब्रेरी एलाउंस 1000 रुपए मासिक प्रत्येक अभियोजन अधिकारी को स्वीकृत किया जाए।

- संचालनालय लोक अभियोजन तथा जिला व तहसील लोक अभियोजन कार्यालय भवन हेतु समुचित राशि स्वीकृत की जाए।
- न्यायालय में पैरवी के दौरान निर्धारित गणवेश हेतु प्रत्येक अभियोजन अधिकारी को इस एलाउंस 8000 रुपए वार्षिक स्वीकृत किया जाए।
- प्रत्येक जिला व तहसील में पदस्थ अभियोजन अधिकारियों को शासकीय आवास उपलब्ध कराए जाए अथवा बाजार दर पर मकान किराया भत्ता प्रदान किया जाए।
- सभी जिलों में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के प्रकरणों हेतु उपसंचालक स्तर के विशेष लोक अभियोजक के पद स्वीकृत किए जाएं।
- प्रत्येक संभाग में प्रशासनिक नियंत्रण हेतु संयुक्त संचालक अभियोजन के तथा जिला स्तर पर पर्याप्त संख्या में डीडीपी और एडिशनल पीओ के पद स्वीकृत किए जाए।
- अन्य समकक्ष सेवाओं के अनुरूप चार स्तरीय समयमान और काडर रिव्यू की जाकर पदोन्नत पदों डीपीओ एवं डीडीपी की संख्या, फीडर काडर के 50 प्रतिशत तक की जानी चाहिए।