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रतलाम. मंडल ने सिग्नल की बैटरी लगातार चोरी होने के बाद नवाचार करते हुए सिग्नल पर इन्क्लूडर बैटरी अलार्म सिस्टम (आईबीएस) लगाने की शुरुआत की है। देशभर में पहला प्रयोग पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल में किया जा रहा है। इसकी शुरुआत मेघनगर सेक्शन में हो गई है। नागदा से गोधरा तक के रेलवे ट्रैक पर इसको लगाया जाएगा।
बता दे कि आरपीएफ का कार्य रेल संपत्ति की सुरक्षा करना होता है। आमतौर पर चोर रेलवे के बिजली से जुडे़ तार, सिग्नल पर लगे हुई बैटरी, लोहे के टूकडे़ सहित अन्य सामान चोरी करते है। जब तक आरपीएफ को चोरी होने की सूचना मिलती है, तब तक चोर काफी दूर निकल चुके होते है। अब एेसा नहीं हो पाएगा। इसके लिए आरपीएफ ने कमर कस ली है।
ये रहेगी इसकी लागत
फिलहाल इसकी लागत करीब 80 हजार रुपए की एक नग की है। इसको योजना के पहले चरण में नागदा से गोधरा तक के ट्रैक में 16 स्थान पर लगाया जाना तय किया गया है। आगामी समय में इसको गोधरा से नागदा तक लगाया जाएगा। पहला इन्क्लूडर बैटरी अलार्म सिस्टम मेघनगर में लगने की शुरुआत हो रही है। करीब तीन से पांच दिन इसको लगाने में लगेंगे। रेलवे के अनुसार इसके लगने के बाद सिग्नल पर बेटरी चुराने की घटना नहीं हो पाएगी।
इस तरह करेगा काम
इन्क्लूडर बैटरी अलार्म सिस्टम को रेलवे के प्रत्येक सिग्नल पर उस स्थान पर लगाया जाएगा जहां पर १० से १२ सिग्नल का एक सर्किट बनता है। जहां पर सिग्नल की बैटरी लगी होती है वहां पर बैटरी को इस इन्क्लूडर बेटरी अलॉर्म सिस्टम से जोड़ दिया जाएगा। जैसे ही कोई इसको हाथ लगाएगा थाने में लगा सायरन बज उठेगा। इससे जब तक चोर इसको खोले व निकाले तब तक आरपीएफ मौके पर पहुंचकर उसको पकड़ लेगी।
रेलवे को बड़ा लाभ होगा
इन्क्लूडर बैटरी अलार्म सिस्टम लगाने से रेलवे को बड़ा लाभ होगा। शुरुआत में इसको मेघनगर सेक्शन में लगाया जा रहा है। मंडल में योजना के पहले चरण में ये १६ स्थान पर लगेंगे।
- कुमार निशांत, मंडल सुरक्षा आयुक्त, रतलाम रेल मंडल
Published on:
11 Jan 2019 10:54 am
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