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Ratlam Lok Sabha Election : जब पंडित नेहरू की वजह से पूरे देश में चर्चा में आ गई थी रतलाम की संसदीय सीट

इस सीट पर रोचक संयोग यह भी है कि अधिकांश समय इस पर भूरिया उपनाम के नेताओं का ही कब्जा रहा है। हालांकि परंपरागत प्रत्याशी के चयन के बीच प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने एक बार इस संसदीय सीट से उम्मीदवार तमाम विरोध के बीच बदल डाला था।

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ratlam lok sabha election result news

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रतलाम। अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग के लिए आरक्षित रतलाम-झाबुआ संसदीय सीट पर अब तक हुए 17 लोकसभा चुनाव और एक उपचुनाव में सिर्फ चार बार ही गैर कांग्रेसी नेता जीत सके हैं। जनसंघ और भाजपा के लिए यह सीट हमेशा चुनौती बनती रही। इतना ही नहीं, इस सीट पर रोचक संयोग यह भी है कि अधिकांश समय इस पर भूरिया उपनाम के नेताओं का ही कब्जा रहा है। हालांकि परंपरागत प्रत्याशी के चयन के बीच प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने एक बार इस संसदीय सीट से उम्मीदवार तमाम विरोध के बीच बदल डाला, बड़ी बात ये जमनादेवी को पंडित नेहरू ने चयन किया, उनकी जीत तो हुई, लेकिन अब तक सबसे कम वोट से जीत का रिकॉर्ड भी उनके नाम दर्ज है।

रतलाम संसदीय क्षेत्र से अब तक कुल सात सांसद बने हैं। इसमें भी तीन भूरिया उपनाम वाले रहे। रतलाम लोकसभा सीट पर भाजपा को जीत के लिए वर्ष 2014 तक का इंतजार करना पड़ा। वह भी कांग्रेस छोड़कर आए दिलीप सिंह भूरिया के सहारे। दिलीप सिंह भूरिया के निधन के बाद उपचुनाव हुआ तो इस पर कांग्रेस के कांतिलाल भूरिया ने जीत हासिल कर ली। हालांकि, साल 2019 के चुनाव में भाजपा ने यहां वापसी की और गुमान सिंह डामोर सांसद चुने गए। रतलाम संसदीय क्षेत्र में 12 बार ‘भूरिया’ उपनाम के नेता सांसद चुने गए। दिलीप सिंह भूरिया कांग्रेस से पांच बार, भाजपा से एक बार सांसद बने तो कांतिलाल भूरिया कांग्रेस से पांच बार सांसद निर्वाचित हुए। वर्ष 1967 में कांग्रेस के सुर सिंह भूरिया भी सांसद चुने गए थे।

कांग्रेस के नाम ये रिकॉर्ड

इस संसदीय क्षेत्र में अब तक हुए चुनाव में सबसे बड़ी और सबसे छोटी जीत का रिकॉर्ड कांग्रेस के नाम है। वर्ष 1962 के चुनाव में कांग्रेस की जमुना देवी ने भारतीय जनसंघ के गट्टू को सबसे कम 22,384 मतों से पराजित किया था। वर्ष 1999 के चुनाव में कांग्रेस के कांतिलाल भूरिया ने भाजपा के दिलीप सिंह भूरिया को करीब डेढ़ लाख वोटों से हराया था। इस लोकसभा सीट पर पांच बार महिला प्रत्याशी मैदान में उतरीं। जीत सिर्फ एक को ही मिली। 1962 में कांग्रेस से जमुना देवी इस सीट की पहली महिला सांसद निर्वाचित हुईं। भागीरथ भंवर लगातार दो बार अलग-अलग पार्टियों के टिकट पर सांसद बने, वे 1971 में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर जीते और 1977 के चुनाव में भारतीय लोकदल के टिकट पर। इसके बाद कांग्रेस ने यहां से लगातार जीत दर्ज की।

देश में चर्चित हुई थी यह सीट

1962 के लोकसभा चुनाव में रतलाम संसदीय सीट की चर्चा राष्ट्रीय स्तर पर हुई थी। पूरे देश में लगभग सभी सीटों पर कांग्रेस प्रत्याशियों के नाम की घोषणा हो चुकी थी। ऐन वक्त पर तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने झाबुआ सीट के कांग्रेस प्रत्याशी को बदल दिया। उस समय यह निर्णय बहुत चौंकाने वाला रहा। पूरे देश में सिर्फ एक प्रत्याशी बदलने की घटना ने राजनीतिक क्षेत्र में खूब सुर्खियां बटोरीं। दो बार के सांसद अमर सिंह के स्थान पर युवा महिला नेता जमुना देवी को टिकट दिया गया और वे चुनाव भी जीतीं।

इन नेताओं ने किया प्रतिनिधत्व

वर्ष - सांसद - पार्टी

1952 अमर सिंह कांग्रेस

1957 अमर सिंह कांग्रेस

1962 जमुना देवी कांग्रेस

1967 सुरसिंह भूरिया कांग्रेस

1972 भागीरथ भंवर प्रजा सोशलिस्ट पार्टी

1977 भागीरथ भंवर प्रजा सोशलिस्ट पार्टी

1980 दिलीप सिंह भूरिया कांग्रेस

1984 दिलीप सिंह भूरिया कांग्रेस

1990 दिलीप सिंह भूरिया कांग्रेस

1991 दिलीप सिंह भूरिया कांग्रेस

1996 दिलीप सिंह भूरिया कांग्रेस

1998 कांतिलाल भूरिया कांग्रेस

1999 कांतिलाल भूरिया कांग्रेस

2004 कांतिलाल भूरिया कांग्रेस

2009 कांतिलाल भूरिया कांग्रेस

2014 दिलीप सिंह भूरिया भाजपा

2015 कांतिलाल भूरिया (उपचुनाव) कांग्रेस

2019 गुमान सिंह डामोर भाजपा