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सरस्वती शिशु मंदिर में भारतीय संस्कृति आज भी जीवित: कोठारी

वार्षिक स्नेह सम्मेलन में प्रतिभाओं का सम्मान

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सरस्वती शिशु मंदिर में भारतीय संस्कृति आज भी जीवित: कोठारी

रतलाम। मुझे भारतीय संस्कृति की सुंदर प्रस्तुति की झलक आज हुए नृत्य व शारीरिक कार्यक्रमों में देखने को मिली, जिसे देखकर मन प्रसन्न हो गया। इस अवसर पर आज में कहना चाहता हूं कि सरस्वती शिशु मंदिर में भारतीय संस्कृति आज भी जीवित है। यह बात अध्यक्षता कर रहे उद्योगपति एवं समाजसेवी संस्कार कोठारी ने सरस्वती शिशु मंदिर काटजू नगर के उमंग 2019 वार्षिक स्नेह सम्मलेन व प्रतिभा सम्मान समारोह में कही।
उन्होंने कहा की भारतीय संस्कृति एवं परम्परा बहुत अच्छी है, जब तक यह हमारे संस्कारों में जीवित रहेगी। हमारा देश सच्चा भारत कहलाएगा। विशेष अतिथि मंदसौर विभाग समन्वयक महादेव यादव ने कहा शिशु मंदिर की योजना अदभूत है, जिसका त्याग व समर्पण जीवन मूल्यों को सिखाते है। देखने में आता है कि लोगों में संवेदनाए समाप्त होती जा रही है, जिन्हें जाग्रत करने की आवश्यकता है।
अतिथि परिचय सरस्वती शिशु शिक्षा समिति सचिव रशेष राठौड़ ने दिया। विद्यालय वृत वाचन प्राचार्या नीता लोढ़ा ने किया। अतिथियों का स्वागत सह सचिव शैलेन्द्र सुरेका, मणिभद्र कटारिया, किशोर भारती के अध्यक्ष धर्मेन्द्र जाट व बालभारती के अध्यक्ष हर्षवर्धन राठौर ने किया। इस अवसर पर प्रांतीय कोषाध्यक्ष गोपाल काकानी, सरस्वती शिशु शिक्षा समिति उपाध्यक्ष गुमानमल नाहर, विनोद मूणत कोषाध्यक्ष सुनील लाठी,जवाहर चोधरी, मनीष सोनी, विस्मय चत्तर, अक्षय पाटीदार, विरेन्द्र सकलेचा, राकेश नेमानी, ब्रजेन्द्र नंदन मेहता, संगीत महाविद्यालय की प्राचार्य रेखा गंधे अमृत सागर प्रधानाचार्य गोपाल शर्मा आदि उपस्थित थे। संचालन शीला सोन, हर्षवर्धन राठौर ने किया। आभार प्रधानाचार्य गोविंद सिंह झाला ने माना।
रंगारंग प्रस्तुतियों ने मनमोहा- विद्यालय के भैया-बहिनों को खेलकूद, शैक्षणिक, बौद्धिक स्पर्धा में विशिष्ट उपलब्धि प्राप्त करने पर पुरस्कृत किया गया। सरस्वती शिशु शिक्षा समिति अध्यक्ष सुरेन्द्र सुरेका एवं मंचासीन अतिथियों द्वारा कांतादेवी नाहर की स्मृति में सेविका पुष्पा राठोर व वाहन चालक छगन कटारा का शाल श्रीफल से सम्मान किया गया।