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इस जिले की मंडी में पिछले साल अगस्त-सितंबर की तुलना में लाखों रुपए अधिक टैक्स आना बना चर्चा का विषय

पिछले साल अगस्त-सितंबर की तुलना में लाखों रुपए अधिक टैक्स आना बना चर्चा का विषय

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रतलाम। कृषि उपज मंडी में सख्ती से इ-अनुज्ञा लागू होते ही मंडी टैक्स में लाखों रुपए की अचानक वृद्धि चर्चा होने लगी है, 25 दिन में टैक्स इतना इजाफा मंडी बोर्ड और सरकार की नजर में भी आ गया है। बतां दे 16 अगस्त से ई- अनुज्ञा प्रणाली कृषि उपज मंडियों में लागू कर दी गई, इसमें आ रही तकनीकि परेशानियों को लिए व्यापारियों ने विरोध भी किया, धीरे-धीरे प्रणाली पटरी पर आ गई और 25 दिन 16 अगस्त से ९9सितंबर के मध्य मंडी में कुल 75 लाख रुपए टैक्स जमा हो गया। 1 से 9 सितंबर के मध्य मात्र ५ दिन मंडी चली जिसमें 33 लाख रुपए मंडी टैक्स आया है। जबकि पिछले साल अगस्त माह का कुल टैक्स लक्ष्य करीब 81 लाख रुपए से अधिक था और 2 प्रतिशत से वसूला जा रहा था। जबकि अब डेढ़ प्रतिशत टैक्स होने के बावजूद अगस्त के मात्र १६ दिन में ४42 लाख 24800 रुपए टैक्स हो गया है।
मंडी अधिकारियों के अनुसार 16 अगस्त के मंडी में लागू की गई ई-अनुज्ञा प्रणाली के बाद मंडी चालू दिनांक तक २2460 से अधिक अनुज्ञा बन चुकी है, या ये कहे कि प्रतिदिन करीब 100 अनुज्ञा बनाई जा रही है और ९ सितंबर की दोपहर तक मंडी में कुल 73 लाख 19 हजार 385 रुपए का टैक्स जमा हो चुका था। इसके अलावा 4 लाख 77 हजार रुपए निराक्षित राशि जमा हुई थी। अनाज मंडी प्रांगण प्रभारी मुकेश ग्रेवाल ने बताया कि पिछले साल अगस्त में 81 लाख 85 हजार रुपए था, इस साल 90 लाख हो गया। ई-अनुज्ञा के कारण सितंबर में अब तक 33 लाख रुपए टैक्स जमा हो गया है। पहले कितना माल गया पता नहीं चलता था, पत्रक आने पर पता चलता था। एवरेज अनुमान लगाया जाता था कि कितना माल गया। अब प्रतिदिन की जावक का पता चल रहा है। टैक्स भी अगर व्यापारी का कम पड़ता है तो पोर्टल लेता नहीं है। ई-अनुज्ञा के कारण मंडी का फायदा हो रहा है और व्यापारी भी परेशान नहीं हो रहे हैं।
मंडी शुल्क में हो रही वृद्धि
इ-अनुज्ञा लागू होने के बाद तेजी से टैक्स में वृद्धि हो रही है। पहले पाक्षिक जमा करता था, अब जितना माल निकासी हो रहा उतना मंडी शुल्क प्रतिदिन मंडी में जमा हो रहा है।
- एमएल बारसे, सचिव कृषि उपज मंडी, रतलाम