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ये कैसा आयोजन : मेला आयोजक टेंट में सुनते रहे भजन, खुले मैदान में भीगते रहे दो-चार श्रोता

मेले में निगम की अव्यवस्थाओं का आलम: कामिनी ठाकुर की भजन संध्या में दर्शकों का अभाव
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रतलाम

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Chandraprakash Sharma

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Updated: 1 Oct 2019, 5:24 PM IST

ये कैसा आयोजन : मेला आयोजक टेंट में सुनते रहे भजन, खुले मैदान में भीगते रहे दो-चार श्रोता

ये कैसा आयोजन : मेला आयोजक टेंट में सुनते रहे भजन, खुले मैदान में भीगते रहे दो-चार श्रोता

रतलाम। नगर निगम द्वारा आयोजित नवरात्र कालिका माता मेला के दूसरे दिन निगम के सांस्कृतिक मंच पर कामिनी ठाकुर ने गणेश वंदना के साथ भजन संध्या की शुरुआत की। रिमझिम बारिश में दर्शकों का अभाव और मंच के सामने निगम द्वारा कुछ कुर्सियां और बिछा रखी बैठने के लिए प्लास्टिक पर पानी भरा पड़ा था। यह बात अलग है कि मेला आयोजक टेंट में बैठकर भजनों का आनंद लेते नजर आए। मंच के सामने कीचड़ और पानी होने से कई दर्शकों ने दूर खड़े होकर ही मंच पर चल रहे कार्यक्रम को निहारा, यहां कई नागरिक यह भी कहते नजर आए कि नगर निगम के अधिकारियों को पता है कि लगातार बारिश हो रही है, दर्शकों के लिए भी टेंट की व्यवस्था की जा सकती थी, ताकि आगे भी होने वाले आयोजनों को आराम से बैठकर देख सकते थे। मेला आयोजकों के लिए टेंट तम्बु दर्शकों के लिए खुला आसमान, यह शहर की जनता के लिए मेला है या निगम अधिकारियों का।
महापौर ने ली फर्म संचालकों की बैठक
महापौर डॉ. सुनिता यार्दे ने सोमवार को फिर मेले में होने वाले कार्यक्रमों के संबंध में जिन फर्मों द्वारा टेंडर डाले गए थे उन्हे बुलाया। निगम कार्यालय में ली गई बैठक के दौरान सभी फर्म संचालकों से निगम के मंच पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में आने वाले कलाकारों के लेटेस्ट वीडियो भी देखे।
आज मुम्बई के कलाकारों की आर्केस्ट्रा
निगम के सांस्कृतिक मंच पर कार्यक्रमों की श्रृंखला में मेले के तीसरे दिन 1 अक्टूबर को रात्री 8 बजे से मुम्बई के कलाकारो की आर्केस्ट्रा का आयोजन किया गया है। महापौर डॉ. सुनीता यार्दे, निगम अध्यक्ष अशोक पोरवाल, निगम आयुक्त एसके सिंह, उपायुक्त एवं मेला अधिकारी विकास सोलंकी आदि ने आयोजित मुम्बई के कलाकारों की आर्केस्ट्रा में अधिक से अधिक की संख्या में उपस्थित रहकर लोगों से आयोजित कार्यक्रम को सफल बनाने का आग्रह किया है।
पोलोग्राउंड झूला स्थल पर छाया रहा अंधेरा
सोमवार की रात भी पोलोग्राउंड में झूला स्थल पर रात्रि में अंधेरा छाया रहा। मात्र दो हेलोजन जो झूला संचालकों द्वारा लगवाए गए थे वही जल रहे थे। बाकि पूरे क्षेत्र में अंधेरा पसरा पड़ा हुआ था। १५ झूलों में सोमवार शाम तक मात्र ४ के बेस खड़े हो पाए थे, लगता है ऐसी ही हालत रही तो आधा मेला समाप्त हो जाएगा और लोगों को झूलों का आनंद लेना का मौका भी नहीं मिलेगा।