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एक हवा-सौ दवा कार्यक्रम में 200 से अधिक महिला-पुरुष हुए शामिल

एक हवा-सौ दवा कार्यक्रम में 200 से अधिक महिला-पुरुष हुए शामिल

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एक हवा-सौ दवा कार्यक्रम में 200 से अधिक महिला-पुरुष हुए शामिल

एक हवा-सौ दवा कार्यक्रम में 200 से अधिक महिला-पुरुष हुए शामिल

रतलाम। दाउदी बोहरा समाज के सैय्यदना साहब के एक संदेश ने मानो बुजुर्गो के जीवन की दिनचर्या ही बदल कर रखी दी है। अब हर रविवार समाज के वयोवृद्ध शहर से बाहर खुली हवा और प्राकृतिक वातावरण में योगा, घुड़सवारी, चेयर रेस, योगाक्रिया, फुटबॉल आदि में व्यस्त नजर आते है। इस रविवार बाजना बस स्टैंड स्थित जैन स्कूल के पीछे दाऊदी बोहरा समाज के एनटीएचएस स्कूल में एक हवा सौ दवा कार्यक्रम रखा गया। 70 से अधिक उम्र के 200 से अधिक महिला-पुरुष शामिल हुए। बुरहानी हॉस्पिटल की और से नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर का भी हुआ।
सैय्यदना साहब द्वारा हर बुजुर्ग के लिए आयोजित शिविर की शुरुआत रविवार को सेफी मोहल्ला आमील साहब शेख जोहरभाई शाकीर की उपस्थिति में हुई। आमील साहब ने बताया घर घर गए, परिजनों से मिले, इसके बाद यहां पहुंचे हैं। आगे अपने-अपने परिजनों के साथ युवाओं की गेदरिंग का आयोजन भी होगा। हमारा समाज सर्वधर्म की बात करता है और कोई भी बुजुर्ग परेशान है तो हम सहयोग करेंगे अस्पताल से सहयोग करवाएंगे। समाजजनों में काफी उत्साह नजर आया कोई अपने बुजुर्ग माता-पिता को चाय और नास्ता करवा रहा था, तो कोई घुड़़सवारी करवाता नजर आया। कई लोग योग क्रिया में व्यस्त रहे तो कोई खुले वातावरण में स्वास्थ्य शिविर का लाभ लेता नजर आया। समाज के प्रवक्ता सलीम आरिफ ने बताया कि शिविर हर रविवार को आयोजित किया जा रहा है। जिसमें समाज के बुजुर्ग शामिल होकर अपने मन पसंद के गेम्स, कार्यक्रम में शामिल होकर आनंद उठाते हैं। सुख-दु:ख सांझा करते हैं।
सैय्यदना साहब का आदेश है कि मां-बाप की इज्जत करो, खिद्मत करो और दुआएं लो, जो भी घर में बुजुर्ग हो सब को शामिल करों। अपनी बरकत बुजुर्गों के साथ जुडी हुई है। सैय्यदना साहब ने यह प्रेक्टीकल करके बताया है। हमें आदेश मिला है कि हर गांव-शहर में जितने भी नौजवान है मिलकर अपने बुजुर्गों को पूरे कौम के बुजुर्गों को इज्जत करें, क्योंकि अक्सर बुजुर्ग लोग बाहर नहीं निकल सकते, घर में बैठे रहते है उनके लिए ऐसे पिकनीक आदि के आयोजन करें, ताकि वे भी खुश होकर जीवन जीये। यह पूरी जिंदगी का आदेश हर रविवार आयोजन होंगे।
- शेख जोहरभाई शाकीर, सेफी मोहल्ला आमील साहब