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video ये हैं विश्व का एक मात्र भूलभुलैया शिवमंदिर, रोचक हैं इसके रहस्य

video ये हैं विश्व का एक मात्र भूलभुलैया शिवमंदिर, रोचक हैं इसके रहस्य

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ratlam shiv mandir rahasya

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रतलाम। देशभर में देवों के देव महादेव के अनेक मंदिर हैं, लेकिन मध्यप्रदेश के रतलाम जिले में विरुपाक्ष महादेव का मंदिर अपनी रोचक दास्तान के साथ इतिहासकारों के लिए लंबे समय से चर्चा का विषय बना हुआ है। यह मंदिर गुर्जर चालुक्य शैली (परमार कला के समकालीन) का मनमोहक उदाहरण है। वहां के स्तम्भ व शिल्प सौंदर्य इस काल के चरमोत्कर्ष को दर्शाते हैं। वर्तमान मंदिर से गुजरात के चालुक्य नरेश सिद्धराज जयसिंह संवत् 1196 का शिलालेख प्राप्त हुआ है। इससे ज्ञात होता है कि महाराजा सिद्धराज जयसिंह ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया था।

रतलाम से 17 किमी दूर एक छोटे से शहर बिलपांक में प्राचीन विरुपाक्ष महादेव मंदिर है, जो एक वर्ल्ड हेरिटेज साइट है। कहा जाता है कि इसके गर्भगृह में जो शिवलिंग है उसमें चमत्कारी शक्तियां है। इस मंदिर की मान्यता है कि यहां होने वाले यज्ञ में बनी खीर जो महिलाएं खाती हैं उन्हें संतान प्राप्ति होती है। इस यज्ञ में शामिल होने लोग देश-विदेश से हर साल यहां आते हैं।

ये हैं प्रवेशद्वार की विशेषता

प्रवेश द्वार पर गंगा-यमुना द्वारपाल मंदिर की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि है, मंदिर प्रवेश के समय सभा मंडप में दाहिने भाग पर शुंग-कुषाणकालीन एक स्तम्भ, जो यह दर्शाता है कि इस काल में भी यहां मंदिर रहा होगा। इस मंदिर में शिल्पकला के रूप में चामुण्डा, हरिहर, विष्णु, शिव , गणपति पार्वती आदि की प्रतिमाएं प्राप्त होती हैं। गर्भगृह के प्रवेश द्वार पर गंगा-यमुना द्वारपाल तथा अन्य अलंकरण हैं। गर्भगृह के मध्य शिवलिंग है तथा एक तोरणद्वार भी लगा हुआ है जो गुर्जर चालुक्य शैली का है।

महादेव के इस मंदिर का इतिहास ढाई हजार वर्ष पूर्व का

जिले के बिलपांक में बना हुआ विरुपाक्ष महादेव मंदिर का इतिहास काफी प्राचिन है। इस मंदिर को कब बनाया गया व ये कितना पुराना है ये आज तक इतिहासकार भी नहीं बता पाए है, लेकिन यहां लगे हुए मौर्यकाल के एक खंबे के बारे में कहा जाता है कि वो 2500 वर्ष पूर्व का है। मंदिर के पुजारी कैलाशचंद्र शर्मा ने बताया कि मंदिर में मौर्यकाल का खंबा है। यूं तो अनेक खंबे है व इन खंबो की सही संख्या को कोई आज तक नहीं गिन पाया है। मंदिर में कमल के पुष्प की आकृति वाला जो खंबा है उसको 1995 में इतिहासकारों की हुई कार्यशाला में 2500 वर्ष पूर्व का बताया गया है। इसके अलावा मंदिर में उज्जैन के महाकाल मंदिर जाने के लिए गुफा भी है।