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यहां हैं सट्टा किंग भगवान, दर्शन करने के बाद नहीं हारेंगे कोई भी सट्टा, जानिए कहां हैं ये मंदिर

दिल्ली-मुंबई के सट्टा किंग और माफिया भी यहां धोक देने आते हैं

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satta king

रतलाम । ये हैं दुनियाभर के सबसे बड़े सट्टा किंग। यहां बड़े से बड़ा सट्टेबाज भी झुककर ही आता है, सजदा करता है, और उनका हिस्सा देकर जाता है। मजाल क्या है कि कोई इनके हिस्से की बेइमानी कर ले। बिना कुछ कहे पूरी इमानदारी के साथ इस सट्टा किंग का हिस्सा सट्टेबाज पहुंचा जाते हैं। दिल्ली-मुंबई के सट्टा किंग और माफिया भी यहां धोक देने आते हैं।

मध्यप्रदेश और राजस्थान की सीमा पर राजस्थान के चित्तौडग़ढ़ जिले की भांडेर तहसील में एक ऐसे भगवान का मंदिर है जिनको पूरे देश-दुनिया के सट्टा बाजार का किंग माना जाता है। चाहे वह छोटा सट्टेबाज हो या बड़ा सट्टेबाज, हर कोई इनके दरबार पर आकर सिर नवाकर जाता है। ऐसी मान्यता है यदि कोई इनके दर्शन कर ले और दर्शन के बाद सट्टा लगाए तो उसकी जीत पक्की है। रतलाम मंदसौर नीमच और उसके आसपास के सभी जिलों के में सट्टा बाजार में दखल रखने वाले लोग इनके दरबार में पहुंचकर सिर झुकाते हैं।

हम बात कर रहे हैं नीमच से करीब 65 किलोमीटर दूर राजस्थान के भगवान सांवरिया सेठ जी की। भगवान श्रीकृष्ण का रूप माने जाने वाले सांवरिया जी के बारे में ऐसी मान्यता है कि कई लोग भगवान को अपने सट्टे में हिस्सेदार बनाकर बाजी लगाते हैं। सट्टेबाज उनके दरबार में पहुंचकर मन्नत करते हैं कि हे भगवान यदि सट्टा में जीत मिली तो मैं आपको हिस्सा दूंगा। ऐसा करने वालों की बड़ी संख्या है। लोग धन संपदा, विपत्ति से छुटकारा पाने के साथ ही सट्टा में जीत की भी मन्नत मांगते हैं। ऐसा नहीं है कि यह सिर्फ मान्यता है। सट्टा खेलने वाले और सट्टे में हिस्सा देने की मन्नत मांगने वाले लोग पूरी ईमानदारी के साथ भगवान का हिस्सा चढ़ाने आते हैं। मंदिर के ट्रस्टी बताते हैं कि बड़ी संख्या में लोग पैसों से भरी पोटली यहां छोड़ कर जाते हैं।

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ऐसा माना जाता है कि ये वही पोटलिया हैं जो सट्टा बाजार में जीतने वाले लोग भगवान को उनका हिस्सा चढ़ाने के लिए आते हैं । बड़े से बड़ा सट्टा किंग भगवान को उस सट्टे में हिस्सेदारी देता ही है। भगवान का हिस्सा कोई 10 फीसदी तो कोई पांच फीसदी और कई दो फीसदी पहुंचाता है। करोड़ों का सट्टा बाजार का एक बड़ा हिस्सा इस मंदिर में चढ़ता है। कई एकड़ में फैले मंदिर में हजारों की संख्या में लोग यहां दर्शन करने पहुंचते हैं। इनमें बड़ी संख्या सट्टेबाजों की भी होती है।

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इस मंदिर में लगातार 10 साल से निर्माण चल रहा है हर महीने दो से ढाई करोड़ रुपए का चढ़ावा मिलता है इसमें सोने चांदी जवाहरात से लेकर नगदी रुपए भी शामिल होते हैं। बड़ी संख्या में लोग पोटलियां लेकर भी यहां पहुंचते हैं, गुप्तदान के रूप में छोड़ जाते हैं।

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मंदिर से जुड़े पुजारियों ने बताया कि नीमच रतलाम और मंदसौर में बड़ी संख्या में लोग सट्टे में पैसा लगाते हैं। यहां तक कि महाराष्ट्र और राजस्थान और दिल्ली के सट्टा बाजारों से जुड़े लोग इस मंदिर में आस्था रखते हैं। उनके ऐसी मान्यता है कि यदि इस मंदिर को इस मंदिर के भगवान को पार्टनर बनाकर सट्टा खेला जाए तो बड़ी जीत मिलती है। कई लोग सट्टा हार भी जाते हैं लेकिन उनकी आस्था पर कोई चोट नहीं पहुंचती है। वे फिर भगवान सांवरिया सेठ को साक्षी मानकर सट्टा लगाते हैं। यहां हर साल ऐसे सट्टेबाजों की भीड़ बढ़ती जा रही है।