रतलाम. देशभर में देवों के देव महादेव के वैसे तो कई मंदिर है, लेकिन बात मध्यप्रदेश के रतलाम की हो तो यहां आसपास के क्षेत्रों में कई ऐसे मंदिर है जो न सिर्फ मनमोहक है बल्कि यहां पहाडि़यों से बहता झरना भी देखने लायक है। मध्यप्रदेश के रतलाम में एक शिव मंदिर ऐसा भी है जहां पहाड़ों को चीरकर रास्ता बनाया गया। सावन सोमवार के इस खास दिन कीजिए दर्शन। रतलाम में एक नहीं बल्कि दो खास ऐसे मंदिर है जहां बारिश के दौरान खासकर सावन सोमवार के दिन भक्तों की भीड़ उमड़ती है। जिला मुख्यालय से 25 किमी दूर शिवगढ़ – सैलाना मार्ग पर एक केदारेश्वर महादेव मंदिर है तो दूसरा सैलाना – सरवन रोड पर है। मुख्य सड़क से नीचे मंदिर की ओर जाने का जो रास्ता है, उसे पहाड़ों को चीरकर बनाया गया है। मंदिर के तीनों ओर आगंतुकों के लिए विश्राम स्थल बने हैं। यहां निर्मित स्तंभों और छतरियों का शिल्प राजपूतकालीन है। सावन मास में मंदिर में दर्शनार्थियों का मेला लगता है। सैलाना के राजा जयसिंह ने वर्ष 1730 में सैलाना को बसाया था। वर्ष 1736 में यह मंदिर केदारेश्वर महादेव मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हुआ। यहां का शिवलिंग स्वप्रकट माना जाता है। जानकारी के अनुसार 350 वर्ष पहले महाराजा दुलेसिंह ने इस शिवलिंग को देखा और यहां इस मंदिर में पक्के निर्माण करवाए। यहां दुलेसिंह की प्रतिमा भी है, जहां जलाभिषेक के बाद जल गिरता है। इसके अलावा सैलाना – सरवन रोड पर जो मंदिर है, वहां बहता झरना आकर्षण का केंद्र है।
करें रतलाम के शिव मंदिरों के दर्शन, महाकाल से लेकर है पशुपतिनाथ