7 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

तीन बच्चों के माता-पिता लेंगे फेरे, फिर बहन की डोली उठेगी

देवास जिले में धाराजी के समीप होने जा रही अनूठी शादी...पहले तीन बच्चों के माता-पिता लेंगे फेरे फिर बहन की डोली उठेगी -बिन फेरे हम तेरे की तर्ज पर 10 साल से दंपति के रूप में रह रहे थे, पत्नी को धार्मिक कार्यों में भागीदारी की नहीं थी मान्यता

3 min read
Google source verification
kanpur_shadi.jpg

देवास. जिला मुख्यालय से करीब 110 किमी दूर आदिवासी अंचल धाराजी के समीप देवझिरि गांव में एक अनूठी शादी होने जा रही है। यहां तीन बच्चों के माता-पिता पहले फेरे लेंगे उसके बाद उनकी बहन की विदाई होगी। दोनों विवाहों की तैयारी जोरों पर है। तीन बच्चों के माता-पिता करीब 10 साल से साथ में दंपती के रूप में राजी-मर्जी से रह रहे हैं लेकिन सामाजिक मान्यता के अनुसार बिना फेरे लिए महिला को धार्मिक आयोजनों में शामिल होने की अनुमति नहीं है, इसलिए इन्होंने फेरे लेने का फैसला किया है।

इस खबर को पढ़कर आप चौंकियेगा नहीं, यह एक किस्सा-कहानी नहीं बल्कि हकीकत है और वर्तमान परिस्थितियों में हर समाज के लिए शिक्षाप्रद भी है। पुण्य सलिला मां नर्मदा धाराजी घाट से लौटते वक्त देवझिरि में पहाड़ी के बीच बसे एक मकान पर डीजे की धुन पर बच्चे नाचते-गाते नजर आए तो इस शादी की तैयारी की हकीकत सामने आई। 5 फरवरी को एक ही मंडप के नीचे दो शादी होने वाली हैं। युवती सुकमा का विवाह अजय के साथ होगा लेकिन उससे पहले उसके भाई मनोहर व भाभी रेलम की शादी होगी जो 10 साल से साथ में पति-पत्नी की तरह रह रहे हैं, इनके तीन बच्चे भी हैं। मनोहर 10 वर्ष पूर्व रेलम को बिना शादी के बिन फेरे हम तेरे वाली बात पर अपने घर ले आया था। दोनों पक्षों की राजी-मर्जी से पति-पत्नी के रूप में रह रहे थे, परंतु समाज की अच्छी मान्यता है कि धार्मिक आयोजन पूजा पाठ में रेलम हिस्सा नहीं ले सकती थी। इसलिए वह अपनी ननद की सुकमा की शादी के मंडप के नीचे फेरे लेगी।

स्वीकृति हकीकत में बदलेगी

अपने भाई और भाभी की शादी के फेरे होने के बाद ही सुकमा के फेरे होंगे। उसके बाद रेलम का घर में पुन: प्रवेश होगा और वह धार्मिक आयोजन में भाग ले सकेगी। बताने का तात्पर्य यह है कि 3 बच्चे के माता-पिता आज भी परिवार में सही मान्यता नहीं ले पाए थे अब वह स्वीकृति हकीकत में बदलेगी। मनोहर दूल्हा बनेगा, रेलम दुल्हन बनेगी और सारे रीति-रिवाज से शादी भी होगी। तीन बच्चों के माता-पिता की शादी में बच्चे भी नाचेंगे-गाएंगे, मौज-मस्ती मनाएंगे परंतु फेरे नहीं देखेंगे।

संस्कृति से मुंह नहीं मोडऩा

क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता गिरधर गुप्ता मानते हैं कि आज भी इस आदिवासी क्षेत्र में भारतीय संस्कृति, सनातन धर्म को अपनाकर ही गृहस्थ जीवन-यापन किया जा रहा है, कैसे भी अपने रीति रिवाज में लोग ढल रहे हैं, रीति-रिवाज के बिना सब अधूरा है। इस तरह सनातन संस्कृति आज भी विद्यमान है, इससे आज के युवाओं को प्रेरणा लेना चाहिए और अपनी संस्कृति से मुंह नहीं मोडऩा चाहिए।

IMAGE CREDIT: patrika