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सर्वपितृ अमावस्या 2018: इस दिन करें सभी पितरों के लिए श्राद्ध

सर्वपितृ अमावस्या 2018: इस दिन करें सभी पितरों के लिए श्राद्ध

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sarva pitra amavasya ki saral vidhi hind news

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रतलाम। इन दिनों श्राद्ध का समय चल रहा है। भारतीय पंचाग अनुसार हिंदी माह में अश्विन माह को सबसे विशेष माना गया है। इसमे भी इस माह की अमावस्या का विशेष महत्व है। अंगे्रजी कैलेंडर को देखे तो इस वर्ष 8 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या आ रही है। इस दिन सोमवार है। सोमवार के दिन सोमवती अमावस्या का महायोग लंबे समय बाद बन रहा है। ज्योतिष में इसको सौभाग्य देने वाला माना जाता है। मोक्ष देने वाली ये अमावस्या कई मायनों में महत्वपूर्ण है। इसको करने की विधि काफी सरल है।

ये बात केरल की तंडी परंपरा के जानकार व रतलाम के प्रसिद्ध ज्योतिषी वीरेंद्र रावल ने कही। वे भक्तों को सर्वपितृ अमावस्या व सोमवार पर इसके आने का महत्व बता रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म के अनुसार पूर्वज व दिवंगत का स्मरण इस समय किया जाता है। आत्मा की शांति के लिए दान, तर्पण आदि किया जाता है। पूर्वजों के प्रति आस्था या श्रद्धा रखने की वजह से ही इसको श्राद्ध कहा जाता है। नियम अनुसार जिस तिथि को पवित्र आत्मा संसार से विदा होती है, उसी तिथि को अश्विन माह में श्राद्ध किया जाता है। किंतु अनेक बार व्यस्तता के चलते तिथि याद नहीं रहती है। एेसे में सर्वपितृ अमावस्या के दिन श्राद्ध करने का नियम है।

ये है सर्वपितृ अमावस्या का महत्व

सबसे अहम तो यह तिथि इसीलिये है, क्योंकि इस दिन सभी पितरों का श्राद्ध किया जा सकता है। वहीं इस अमावस्या को श्राद्ध करने के पिछे मान्यता है कि इस दिन पितरों के नाम की धूप देने से मानसिक व शारीरिक तौर पर तो संतुष्टि या कहें शांति प्राप्त होती ही है। इसके साथ ही घर में भी सुख-समृद्धि आयी रहती है। सभी प्रकार के कष्ट दूर हो जाते हैं। हालांकि प्रत्येक मास की अमावस्या तिथि को पिंडदान किया जा सकता है, लेकिन अश्विन अमावस्या विशेष रूप से शुभ फलदायी मानी जाती है।

ये है पितृ करने की विधि

सर्वपितृ अमावस्या को सुबह स्नान के बाद गायत्री मंत्र का जाप करते हुए सूर्यदेव को जल अर्पित करना चाहिये। इसके बाद घर में श्राद्ध के लिये बनाये गये भोजन से पंचबलि अर्थात गाय, कुत्ते, कौए, देव एवं चीटिंयों के लिये भोजन का अंश निकालकर उन्हें देना चाहिये। इसके बाद श्रद्धापूर्वक पितरों से मंगल की कामना करनी चाहिये। ब्राह्मण या किसी गरीब जरूरतमंद को भोजन करवाना चाहिये व शक्ति अनुसार दान दक्षिणा भी देनी चाहिये। संध्या के समय अपनी क्षमता अनुसार दो, पांच अथवा सोलह दीप भी प्रज्जवलित करने चाहियें।

सर्वपितृ अमावस्या तिथि व श्राद्ध कर्म मुहूर्त

सर्वपितृ अमावस्या तिथि: 8 अक्टूबर 2018, सोमवार

कुतुप मुहूर्त: 11.45 से 12.31

रौहिण मुहूर्त: 12.31 से 13.17

अपराह्न काल: 13.17 से 15.36

अमावस्या तिथि आरंभ: 11.31 बजे (8 अक्टूबर 2018)

अमावस्या तिथि समाप्त: 09.16 बजे (9 अक्टूबर2018)