
sheetla mata pojan
रतलाम। होली के बाद उत्तर भारत में प्रमुख पर्व शीतला सप्तमी-अष्टमी का होता है। इस दिन बासी या एक दिन पूर्व बनाहुआ भोजन किया जाता है। परिवार की महिलाएं सुख-समृद्धि की कामना, परिवार में खुशहाली, शांति व आर्थिक तरक्की के लिए इस व्रत को करती है व माता शीतला की पूतन व व्रत करती है। इस बारे में जोधपुरज्योतिष परिषद एवं नक्षत्र लोक ज्योतिष विज्ञान शोध संस्थान के अध्यक्ष व रतलाम राज परिवार के ज्योतिषी पंडित अभिषेक जोशी ने उपस्थित भक्तों को बताया इस वर्ष ये पर्व 8 व 9 मार्च को मनाया जाएगा। इसमे मां शीतला के मंदिर, मूर्ति पर पूजन होगी। रतलाम में मोहन टाकीज रोड, श्रीमाली वास सहित अन्य स्थान पर शीतला माता के मंदिर है। इसके अलावा पटरी पार क्षेत्र में भी अनेक स्थान पर ये मंदिर है।
पहले जानिये कौन है श्री शीतला माता:
श्री भगवती चरित्र के अनुसार
अनन्त ब्रह्मांडो का जो अपने भृकुटि विलास मात्र से सर्जन पालन संहार करती है। उन महात्रिपुरसुन्दरी राजराजेश्वरी श्रीमाता आद्याकालीका ने अपने भक्तों की रुचि ओर स्वभाव के अनुसार अपनी 9 करोड़ देवी मूर्तियां संसार मे प्रगट की है। जिन्हें 9 करोड़ दुर्गा कहा जाता है।
श्री दुर्गा नवकोटी मूर्ति सहिता विश्वेश्वरि पाहिमाम:
ये भगवती की आत्मशक्ति स्वरुपिणी श्री भगवती के ही स्वरूप है। ओर भगवती की शक्ति ? गण है। उनमे 9 दुर्गाये प्रमुख है, जिनमे सप्तमी तिथि की अधिस्ठात्री गर्दभ वाहिनी भगवती कालरात्रि सभी शक्ति गणों में प्रधान है। इनकी सेवा करने से काल का भय भी समाप्त हो जाता है। इसलिये इन्हें कालरात्रि कहा जाता है। भगवती कालरात्रि के ही 2 स्वरूप है, एक तो दुष्टो का नाश करके पाखंडियो को दण्ड देने के लिये श्री कालरात्रि ओर दूसरा अपने भक्तों की रोग पीडा का निवारण करने उनके यहां धन धान्य भरने के लिये श्रीशुभंकरी। भगवती कालरात्रि का शुभंकरी स्वरूप ही श्री शीतला माता के रूप में पूजा जाता है। प्रत्येक नगर गांव में श्री शीतलामाता का शक्तिपीठ अवश्य ही होता है। जो गांवों को रोग मुक्त करके भक्तो का कल्याण करती है। यही भगवती सभी ग्राम देवताओ की माता के स्वरूप में भी पूजी जाती है। इनकी प्रधान प्रतिमा कद साथ श्री भगवती की अनेक शक्तियां भी निराकार स्वरूप में शिला के स्वरूप में पूजी जाती है। जिससे उनके उपासक पर भगवती की सभी शक्तियां प्रसन्न रहती है।
वर्णन कुछ इस प्रकार आया
श्री दुर्गा सप्तशती मैं इनका वर्णन कुछ इस प्रकार आया है। व्याप्तं तयेत सकलं ब्रह्मांड मनुजेश्वर, भगवती की शक्तियों से ब्रह्मांड भरा हुआ है। महांकाल्या महाकाले महामारी स्वरूपया: सैव काली महामारी सैव सृष्टि र्भवत्यजा। भवकाले नृणां सैव लक्ष्मी व्रद्धिप्रदा गृहे। सैवा भावे तथा अलक्ष्मीरविनाशोप जायते: भगवती महाकाली की ये अजेय अविनासी शक्तियां है। जो रुष्ट होने पर संसार को रोग शोक ओर महामारी बनकर आती है और विनाश कर देती है। ओर प्रसन्न होने पर लक्ष्मी(धन धान्य) की व्रद्धि करके सम्पन्न करके सभी महामारियों का नाश करके भक्तो को सुखी कर देती है।
इसलिए होती है ये पूजन
स्कंद पुराण में भगवान कार्तिकेय, अगस्त्य जी को भगवती का चरित्र सुनाते हुये कहते है कि एक बार अपने किसी भक्त का अपमान करने के कारण भगवती राजराजेश्वरी श्रीमाता आद्याकाली की कालरात्रि नामक शीलता शक्ति ब्रह्मांड का विनाश करने को उद्यत हुई थी तब देवताओ ने महादेव ओर माता पार्वती से भगवती कालरात्रि के क्रोध को शांत करने की प्राथना की। तब भगवान महादेव ने माता पार्वती सहित जगदम्बा कालरात्रि का शीतला स्वरूप में पूजन करके भगवती कालरात्रि प्रत्येक स्थान पर विराजमान होकर समस्त बाधाओं से विश्व की रक्षा करने का वरदान मांगा था।
महादेव व मां पार्वती ने किया था ये पूजन
तब भगवान शंकर ओर मा पार्वती जी ने चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से चैत्र कृष्ण सप्तमी तक जगदम्बा का पूजन किया था। कहते है की भगवती कालरात्रि ने उन्हें वरदान दिया था कि मधुमास के प्रारम्भ के इन सप्त दिवस में मेरी उग्र शक्तियों को शांत करने के लिये जो भी मनुष्य देवी या देवता मेरा ओर मेरे शक्ति गणों का शीतल जल से अभिषेक करेगा उसके घर मे कभी भी महामारी जनित बाधाये ओर रोग जनित कष्ट नही आएंगे। मेरे आशीर्वाद से वो लोग निरोग रहकर धन धान्य से परिवार से समृद्ध रहेंगे। मेरे वाहन गर्दभ के बारह नामो से जो मेरे वाहन गर्दभ की पूजा स्तुति करेगा मेरी कृपा से उसके 64 रोग नष्ट होकर निरोग शरीर आरोग्य प्राप्त करेंगे। उनके समस्त रोग दोष ग्रह जनित बाधाये मेरी कृपा से शांत हो जाएगी। और माता कालरात्रि (शीतला माता) भगवान शिव और देवी पार्वती को इस प्रकार वरदान देकर अंतर्ध्यान होकर अपने अविनाशी धाम श्री मणिद्वीप धाम पधार गयी।
शीतला सप्तमी, शीतला अष्टमी, बसौड़ा, व्रत विधि
व्रती को इस दिन सुबह कर्मों से निवृत्त होकर स्वच्छ व शीतल जल से स्नान करना चाहिए।
स्नान के बाद संकल्प लेना चाहिए।
शीतला सप्तमी या अष्टमी का व्रत केवल चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को होता है और यही तिथि मुख्य मानी गई है। किंतु स्कन्दपुराण के अनुसार इस व्रत को चार महीनों में करने का विधान है।
संकल्प के बाद विधि-विधान तथा सुगंधयुक्त गंध व पुष्प आदि से माता शीतला का पूजन करें।
इसके बाद एक दिन पहले बनाए हुए (बासी) खाद्य पदार्थों, मेवे, मिठाई, पूआ, पूरी, दाल-भात आदि का भोग लगाएं।
यदि आप चतुर्मासी व्रत कर रहे हो तो भोग में माह के अनुसार भोग लगाएं। जैसे- चैत्र में शीतल पदार्थ, वैशाख में घी और शर्करा से युक्त सत्तू, ज्येष्ठ में एक दिन पूर्व बनाए गए पूए तथा आषाढ़ में घी और शक्कर मिली हुई खीर।
इसके बाद शीतला स्तोत्र का पाठ करें और शीतला सप्तमी व अष्टमी की कथा सुनें।
रात्रि में जगराता करें और दीपमालाएं प्रज्ज्वलित करें।
विशेष- इस दिन व्रती को चाहिए कि वह स्वयं तथा परिवार का कोई भी सदस्य किसी भी प्रकार के गरम पदार्थ का सेवन न करें। इस व्रत के लिए एक दिन पूर्व ही भोजन बनाकर रख लें तथा उसे ही ग्रहण करें। बसौड़ा वाले दिन सुबह ठंडे पानी से नहाना चहिए। जिन माताओं के बच्चे अभी माता का दूध पीते हो तब उन्हें बसौड़ा के दिन नहाना नहीं चाहिए।
यहां पढे़ शीतला माता की आरती
जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता,
आदि ज्योति महारानी सब फल की दाता।।
ऊँ जय शीतला माता।
रतन सिंहासन शोभित, श्वेत छत्र भ्राता।
ऋद्धिसिद्धि चंवर डोलावें, जगमग छवि छाता।।
ऊँ जय शीतला माता।
विष्णु सेवत ठाढ़े, सेवें शिव धाता।
वेद पुराण बरणत पार नहीं पाता।।
ऊँ जय शीतला माता।
इन्द्र मृदंग बजावत चन्द्र वीणा हाथा।
सूरज ताल बजाते नारद मुनि गाता।।
ऊँ जय शीतला माता।
घंटा शंख शहनाई बाजै मन भाता।
करै भक्त जन आरति लखि लखि हरहाता।।
ऊँ जय शीतला माता।
ब्रह्म रूप वरदानी तुही तीन काल ज्ञाता,
भक्तन को सुख देनौ मातु पिता भ्राता।।
ऊँ जय शीतला माता।
जो भी ध्यान ? लगावैं प्रेम भक्ति लाता।
सकल मनोरथ पावे भवनिधि तर जाता।।
ऊँ जय शीतला माता।
रोगन से जो पीडित कोई शरण तेरी आता।
कोढ़ी पावे निर्मल काया अन्ध नेत्र पाता।।
ऊँ जय शीतला माता।
बांझ पुत्र को पावे दारिद कट जाता।
ताको भजै जो नाहीं सिर धुनि पछिताता।।
ऊँ जय शीतला माता।
शीतल करती जननी तुही है जग त्राता।
उत्पत्ति व्याधि विनाशत तू सब की घाता।।
ऊँ जय शीतला माता।
दास विचित्र कर जोड़े सुन मेरी माता ।
भक्ति आपनी दीजै और न कुछ भाता।।
ऊँ जय शीतला माता।
Published on:
06 Mar 2018 05:01 am
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