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छात्र संघ चुनाव: शपथ के लिए बुलाए थे डाकू, अध्यक्ष बनने के बाद सांस्कृतिक आयोजन वॉन्टेड डाकूओं को बुलाकर दिलवाई गई थी शपथ

रतलाम

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Newsdesk

Aug 11, 2026

datia news

datia news (भाई ने की भाई की हत्या Photo Source- Patrika)

फोटो-010-हरिनारायण अरोड़ा पूर्व अध्यक्ष सन 1979
फोटो-011-राजेंद्र पांडेय विधायक एवं पूर्व अध्यक्ष महाविद्यालय सन 1984
फोटो-012-शरद डूंगरवाल पूर्व अध्यक्ष महाविद्यालय
फोटो-013-यश जैन पूर्व अध्यक्ष
फोटो-014-कमल सारडा पूर्व अध्यक्ष

Bआशीष शर्माB
जावरा. कॉलेजों में सितंबर में छात्रसंघ चुनाव कराने की घोषणा के साथ एक बार फिर कैंपस की राजनीति गर्माने लगी है। लेकिन इस बार का चुनाव प्रचार पुराने दौर से बिल्कुल अलग होगा। अब मोबाइल, सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए कुछ ही मिनटों में सैकड़ों विद्यार्थियों तक पहुंचा जा सकता है, जबकि करीब चार दशक पहले छात्रसंघ चुनाव लडना मतलब विद्यार्थियों के घर-घर जाकर दस्तक देना, पोस्टकार्ड भेजना और दीवारों पर नारे लिखना होता था।

चुनाव लड़ चुके नेताओं के अनुसार प्रचार के साधन सीमित थे, लेकिन प्रत्याशियों और समर्थकों के बीच सीधा संवाद ही चुनाव की सबसे बड़ी ताकत हुआ करता था। एबीवीपी और एनएसयूआई दोनों अपने-अपने उम्मीदवारों को जीतने के लिए कड़ी मेहनत में लगे रहते थे महीने भर पहले से तैयारी शुरू हो जाती थी। तथा चुनाव जीतने के बाद अध्यक्ष अपने कार्यकाल में कई तरह के सांस्कृतिक आयोजन के साथ खेल प्रतियोगिताएं करवाने में जोर देते थे।



जब अतिथि बने थे डाकू
सन 1979 में हुए छात्र संघ चुनाव में एनएसयूआई से जीते हरिनारायण अरोड़ा ने बताया कि चुनाव की तैयारी काफी समय पहले शुरू हो जाती थी। इसमें दोनों पार्टी अपने उम्मीदवार को जीतने के लिए कई तरह के जतन भी करती थी। उस समय डिजिटल जमाना नहीं था तो प्रचार-प्रसार के लिए घर-घर जाना पड़ता था। कॉलेज चुनाव जैसे मानो विधानसभा का चुनाव हो इस तरह प्रचार किए जाते थे। विद्यार्थियों के लिए गांव में जाकर उनके परिवार जनों और उनसे मिल मुलाकात की जाती थी साथ ही लोकल विद्यार्थियों को खाने की पार्टियों भी उसे समय देना पड़ती थी चुनाव जीतने के बाद हरिनारायण अरोड़ा ने बताया कि उनके शपथ के लिए उन्होंने डाकू मास्टर माधव सिंह ओर डाकू मोर सिंह को बतौर अतिथि बुलवाया था। पूर्व में इन दोनों के ऊपर राज्य सरकार ने ढाई ढाई लाख रुपए के इनाम घोषित कर रखे थे।
हरिनारायण अरोड़ा पूर्व अध्यक्ष सन 1979

कई तरह की होती थी मदद
सन 1984 में भगत सिंह महाविद्यालय में चुनाव लड़े व अब विधायक डॉ राजेंद्र पांडे ने पुरानी यादों को ताजा करते हुए बताया कि उसे समय के चुनाव में मतदान सीधे विद्यार्थी ही कर कर अपने अध्यक्ष को चुनते थे। अधिकतर ग्रामीण विद्यार्थी जो महाविद्यालय की पढ़ाई करने में कहीं असमर्थ होते थे उन्हें कई तरह की पाठ्य पुस्तक और अन्य तरह की मदद की जाती थी। जिससे वह चुनाव लड़ने के दौरान वे समर्थित हो जाते थे। चुनाव जीतने के बाद महाविद्यालय में सांस्कृतिक प्रोग्राम, खेलकूद प्रतियोगिताओं के साथ अन्य कई आयोजन होते थे, जिससे विद्यार्थियों पढ़ाई के साथ अन्य कार्यों में भी मन लगता था और कई प्रतिभाएं निकाल कर सामने आती थी। न्यायालय के द्वारा फिर से छात्र संघ चुनाव कारण करने का जो निर्देश दियाहै वह स्वागत योग्य है। छात्र संघ चुनाव से नेतृत्व की नई पीढ़ी उभर कर आएगी।
राजेंद्र पांडेय विधायक एवं पूर्व अध्यक्ष महाविद्यालय सन 1984


सन 2001 में हुए चुनाव लगभग 16 वर्षों बाद कॉलेज चुनाव शुरू हुआ जो अप्रत्यक्ष रूप से किए थे। जिसमें समितियों द्वारा क्लास सीआर एवं समस्त टॉपर विद्यार्थी को चुना जाता था। इन तीनों कैटेगरी से जीते हुए छात्रों में छात्र संघ अध्यक्ष सचिव एवं कोषाध्यक्ष के चुने जाते थे जो अपनी अपनी इकाई एबीवीपी ओर एनएसयूआई विद्यार्थी परिषद अपने-अपने अध्यक्ष तय करती थी। मैंने अध्यक्ष का चुनाव लड़ा था और विजय हुआ था।
शरद डूंगरवाल पूर्व अध्यक्ष महाविद्यालय


छात्रसंघ चुनाव लोकतंत्र की पहली पाठशाला हैं। महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में नियमित छात्रसंघ चुनाव होने चाहिए, ताकि युवाओं में नेतृत्व क्षमता, अनुशासन, जिम्मेदारी और लोकतांत्रिक मूल्यों का विकास हो सके। छात्रसंघ चुनाव विद्यार्थियों को अपनी समस्याएं प्रभावी ढंग से रखने तथा उनके समाधान का अवसर मिलते हैं। स्वस्थ और निष्पक्ष चुनाव से संवाद, सहयोग एवं सकारात्मक प्रतिस्पर्धा की भावना मजबूत होती है।
यश जैन, पूर्व अध्यक्ष

युवाओं के नेतृत्व विकास की आधारशिला महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव नियमित रूप से आयोजित होना लोकतांत्रिक व्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यह केवल प्रतिनिधियों के चयन की प्रक्रिया नहीं, बल्कि युवाओं में नेतृत्व, उत्तरदायित्व, अनुशासन और सेवा भाव विकसित करने का प्रभावी माध्यम है। छात्रसंघ चुनाव विद्यार्थियों को अपनी बात लोकतांत्रिक तरीके से रखने तथा समस्याओं के समाधान में सक्रिय भागीदारी का अवसर देते हैं।
कमल सारडा पूर्व अध्यक्ष