रतलाम। व्यक्ति को शरीर का सदुपयोग करना चाहिए राक्षस कुल में जन्म लेने के बाद भी विभीषण ने शरीर का सदुपयोग किया किंतु रावण में दुरुपयोग किया, जिसके कारण रावण का समूल नाश हो गया। जो व्यक्ति देवता, माता-पिता का आदर नहीं करता है वही राक्षस है ।
यह विचार श्री शिव आराधना महोत्सव के अन्तर्गत कालिका माता मंदिर प्रांगण में श्री राम कथा का वाचन करते हुए स्वामी निर्मल चैतन्यपुरी महाराज ने व्यक्त की। इस अवसर पर पूरा पंडाल राम सिया राम सिया राम जय जय राम के जयकारों से गूंज उठा चारों ओर उल्लास छा गया इस अवसर पर प्रभु की विशेष साज-सज्जा की गई थी ।
शत्रुता के बाद फिर मित्रता हो तो विश्वास मत करना
महाराजश्री ने आगे कहा कि शत्रुता के बाद फिर से मित्रता हो गई हो तो भी उसका विश्वास नहीं करना चाहिए, सृष्टि के प्रादुर्भाव के समय ब्रह्मा के दक्षिण अंग से मनु तथा वाम अंग से शतरूपा प्रकट हुई थी मनु व शत्रुपा ने प्रभु से याचना की थी कि वे उनके यहां जन्म ले तो उनकी सेवा, भक्ति तथा दर्शन करते रहेगे।
प्रभु से की गई याचना असफल नहीं होती
प्रभु से की गई याचना कभी असफल नहीं होती, क्योंकि प्रभु देने में कभी इंकार नहीं करते हैं और प्रभु ने मनु शतरूपा के यहां जन्म लिया। उन्होंने कहा कि गुरु का तिरस्कार करने वाला, ब्राह्मणों का श्राप विनाशी वस्तु के प्राप्ति के उपदेश देने वाला व्यक्ति उपदेश प्राप्त करने वाले व्यक्ति का विनाश करवाता है ।
व्यक्ति को मंत्र योग व तप गुप्त रखना चाहिए
उन्होंने कहा कि भगवत प्राप्ति मनुष्य मात्र के जीवन का परम लक्ष्य है धर्म आचरण करना इस मार्ग को प्रशस्त करता है, व्यक्ति को मंत्र योग व तप गुप्त रखना चाहिए तो ही वह फलीभूत होते हैं। कथा के अंत में प्रभु की आरती रंगकर्मी व अधिवक्ता कैलाश व्यास, ट्रस्टी राजेंद्र शर्मा, दिनेश वाघेला, पोरवाल महिला मंडल अध्यक्ष लता सेठिया ,कोमल पोरवाल, मनोरमा चौहान, हर्ष चौहान, ट्रस्ट अध्यक्ष राजाराम मोतियानी, समिति अध्यक्ष मोहनलाल भट्ट तथा नागरिकों ने की। अंत में आरती कर प्रसाद वितरित की गई।