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हर साल गर्त में जा रहा है भूमिगत जल

हर साल गर्त में जा रहा है भूमिगत जल

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हर साल गर्त में जा रहा है भूमिगत जल

रतलाम। जिले का भूजलस्तर लगातार गिरता जा रहा है। लगातार और गहराई में जा रहे भूमिगत जल को बढ़ाने के उपाय आज या आगामी वर्षों में गंभीरता से नहीं किए गए तो निश्चित रूप से यह बहुत बड़े संकट के रूप में हमारे सामने खड़ा हो सकता है। हम पिछले आठ सालों की ही बात करे तो भीषण गर्मी के दिनों में जो जलस्तर होना चाहिए वह हर साल आधा मीटर की दर से और गहराई में पहुंचता जा रहा है। यह गंभीर स्थिति केंद्रीय भूजल सर्वेक्षण विभाग की एक रिपोर्ट में सामने आई है। विभाग ने यह सर्वे मई-जून की गर्मी में किया है जब भूजलस्तर सबसे निम्नस्तर पर होता है। सर्वे रिपोर्ट के अनुसार इन दिनों में सिंचाई के साथ ही पेयजल के लिए भी ज्यादा पानी की जरुरत होती है। गौरतलब है कि जिला प्रशासन ने इस वर्ष कम वर्षा के चलते पिछले माहों में ही जिले के जल अभावग्रस्त घोषित कर दिया है।

लंबे अध्ययन से हुआ खुलासा
केंद्रीय भूजल सर्वेक्षण विभाग ने पिछले आठ सालों में जिले के हैंडपंपों, ट्यूबवेलों, कुओं और भूजल सर्वेक्षण विभाग के स्थायी कुओं के जल का गहराई से अध्ययन किया। अध्ययन से स्पष्ट हुआ है कि बारिश के बाद जलस्तर तो काफी अच्छा रहता है, किंतु भीषण गर्मी के दिनों में भूमिगत जल ५० मीटर से ज्यादा गहराई पर पहुंच जाता है। यह स्थिति काफी भयावह कही जा सकती है। 50 मीटर यानि डेढ़ सौ फीट से ज्यादा गहराई पर पहुंचे पानी से अंदाजा लगा सकते हैं कि हमारे यहां भूजल को रिचार्ज करने के प्रयास न के बराबर हैं। यही नहीं केंद्रीय भूजल सर्वेक्षण विभाग की रिपोर्ट भी इस बात को इंगित करती है कि आठ सालों में हमने भूमिगत जल को लगातार खिंचकर बाहर निकाला है।
जावरा और पिपलौदा डार्क जोन में शुमार
जावरा और पिपलौदा विकासखंडों को केंद्रीय भूजल विभाग ने डार्क जोन (अतिदोहित की श्रेणी) में रखा हुआ है। यहां भूजलस्तर आम दिनों में भी काफी नीचे पहुंच जाता है। जावरा और पिपलौदा में ट्यूबवेल से सिंचाई के लिए पानी प्राप्त करने के लिए किसानों को एक-एक हजार फीट तक की गहराई तक खुदाई करवाना पड़ रही है। कुछ ऐसे ही हालात जिले के पिपलौदा विकासखंड के गांवों में भी है। 500-600 फीट की गहराई के ट्यूबवेल सर्दियों का मौसम खत्म होकर गर्मी की आहट के समय ही बंद होने की कगार पर पहुंच जाते हैं। केंद्रीय भूजल विभाग के अनुसार अब भी ट्यूबवेलों की गहराई एक हजार फीट से ज्यादा ही है। पिछले सात-आठ सालों में खोदे गए ट्यूबवेलों की गहराई इससे कम नहीं रही है और होने पर उससे पानी प्राप्त करने की संभावना लगभग नहीं के बराबर रही है।

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इस तरह समझे कैसे गिरा जलतस्तर
वर्ष -------- गर्मी में जलस्तर ---------- वर्षा
२०११ -------- 53.9 मीटर ----------- 1250 मिमी
२०१२ -------- 53.8 मीटर ----------- 1000 मिमी
२०१३ -------- 54.7 मीटर ----------- 1350 मिमी
२०१४ -------- 54.9 मीटर ----------- 575 मिमी
२०१५ -------- 55.4 मीटर ----------- 1450 मिमी
२०१६ -------- 55.9 मीटर ----------- 1300 मिमी
२०१७ -------- 56.5 मीटर ----------- 900 मिमी
२०१८ -------- 57.9 मीटर ----------- 960 मिमी
नोट - जिले में औसत वर्षा 995.95 मिमी है।