
When Ravana had to go in the shelter of Lord Shri Ram
रतलाम. करीब 50 से अधिक वर्ष हमकों इस रामायण मंडली को चलाते हुए हो गए। देश का कोई राज्य ऐसा नहीं बचा है, जहां आचार्य तुलसीदास रचित श्री रामचरित मानस व राधेश्याम रामायण के मिश्रित रुप का मंचन नहीं किया हो। कभी - कभी कलाकार की सेहत भी खराब हो जाती है, तब रावण हो या कुंभकरण, सभी को भगवान प्रभु श्री राम की शरण में जाकर ही बेहतर सेहत को मांगना पड़ता है।
यह कहना है काशी से रामायण मंडली लेकर आए प्रशांत मिश्रा का। रामायण संचालक मिश्रा ने बताया उनकी मंडली का मंचन कार्य राजा के समय से चल रहा है। पीढ़ी दर पीढ़ी चल रहे इस कार्य को वे 50 से अधिक वर्षो से संभाल रहे है। शहर में मंडली के करीब 15 से 20 कलाकार आए है। शाम को करीब 4 बजे बाद इनका पात्र अनुसार मेकअप स्वयं करना शुरू करते है। एक बार में रामायण का मंचन 11 दिन से लेकर एक माह तक चलता है।
बेड़ा पार श्री राम के हाथ
मिश्रा ने जब सवाल किया कि कभी - कभी मौसम के अनुसार पात्रों का स्वास्थ्य भी खराब होता होगा, तब क्या होता है, तो जवाब दिया, रावण हो या कुंभकरण, जब इस प्रकार की परिस्थिति बनी, हाथ जोड़कर प्रभु श्री राम के सामने खड़े हो गए। शाम तक इस लायक पात्र हो गए कि वे मंच पर अभिनय कर सकें। पात्र का चयन आवाज अनुसार होता है। जैसे श्री राम का चेहरा सौम्य, आवाज मधुर होना चाहिए तो रावण का चेहरा व आवाज भारी होना चाहिए। बता दे कि शहर में रामायण का मंचन जवाहर नगर में चार बत्ती क्षेत्र स्थित मंदिर में प्रतिदिन शाम को 7 बजे से 10 बजे तक चल रही है।
Published on:
28 Feb 2022 07:31 pm
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