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बदलें शादी के मामले में दकियानूसी सोच

शादी दो लोगों का निजी फैसला है। क्योंकि इससे आपकी निजी जिंदगी जुड़ी रहती है।

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Amanpreet Kaur

Nov 29, 2017

Marriage

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शादी दो लोगों का निजी फैसला है। क्योंकि इससे आपकी निजी जिंदगी जुड़ी रहती है। इसलिए यह व्यक्ति पर निर्भर करता है कि वह 30 की उम्र में शादी करे, 40 में या 50 में। या पूरा जीवन अकेले गुजारे। लेकिन दुर्भाग्य से अब भी हमारे देश में अरैंज मैरिज के नाम पर जबर्दस्ती की शादी करवाई जाती है। इसके बाद से ही कई तरह की समस्या की शुरुआत होती है।

समझना होगा कि यह कम्पैनियनशिप का मामला है। इसलिए शादी करते वक्त केवल यह देखना जरूरी है कि वर-वधू बालिग हैं कि नहीं। इसके अलावा कोई बात इस रिश्ते में मायने नहीं रखती। कुछ लोगों को यह लगता है कि सही उम्र में शादी नहीं हुई तो बच्चे पैदा नहीं हो पाएंगे या जब तक बच्चे बड़े होंगे, मैं बूढ़ा हो जाउंगा। समाज को यही दकियानूसी सोच बदलने की जरूरत है। टेक्नोलॉजी आज एडवांस हो गई है। अगर डॉक्टर्स आपकी मदद नहीं कर सकते, तो आप बच्चे गोद लेकर भी अपनी जिंदगी के साथ-साथ समाज को भी बेहतर बना सकते हैं।

भारतीय कानून...

हिंदू मैरिज एक्ट के मुताबिक कानूनन एक लडक़ा 21 वर्ष की उम्र में शादी कर सकता है वहीं लडक़ी की शादी की उम्र 18 तय की गई है।

वेदों में भी बताई गई शादी की उम्र

भा रत में वेदों में भी शादी की उम्र की बात की गई है। आयुर्वेद में मनुष्य की आयु 100 वर्ष के करीब मानी गई है। इसी आधार पर उसके जीवन को चार भागों में बांटा गया है, जिन्हें आश्रम कहते हैं। ये हैं ब्रह्मचर्य आश्रम, गृहस्थ आश्रम, वानप्रस्थ आश्रम और संन्यास आश्रम। इनमें से सभी को 25-25 वर्ष की आयु में बांटा गया है। इस हिसाब से 25 वर्ष की आयु में गृहस्थ आश्रम शुरू होता है। उसके पहले ब्रह्मचर्य आश्रम में मनुष्य से अपेक्षा की जाती है कि वह ब्रह्म का पालन करे, शिक्षा पूरी करे। इस हिसाब से मनुष्य के विवाह की सही आयु 25 मानी गई है। क्योंकि तभी वो शादीशुदा जिंदगी का आनंद लेने योग्य होता है और जिम्मेदारी पूरी करता है।