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दोस्ती एक ऐसा रिश्ता है, जिसे हम खुद गढ़ते हैं। हम दोस्त बनाते हैं तो उनके साथ जिंदगी का हर राज शेयर करते हैं, हमारे लिए सबसे अजीज होते हैं हमारे दोस्त।
हा ल ही 1500 बुजुर्गों पर 10 साल तक किए गए एक शोध के नतीजे सामने आए, जिसके अनुसार जिन लोगों के दोस्तों का बड़ा नेटवर्क था, उनके मरने की आशंका दूसरों की तुलना में 22 फीसदी कम थी। इसके कई कारण हो सकते हैं। कुछ लोग मानते हैं कि अच्छे दोस्त आपको बुरी लत जैसे धूम्रपान या शराब पीने से दूर रखते हैं। वहीं कुछ का मत है कि दोस्त आपको डिप्रेशन में नहीं आने देते, आपके आत्मसम्मान को बढ़ाते हैं और सहारा देते हैं। वहीं इसके ठीक उलट एक शोध में यह भी सामने आया कि बच्चों और दूसरों रिश्तेदारों के साथ आपके रिश्तों का आपकी लंबी उम्र के साथ कोई संबंध नहीं होता।
अच्छे दोस्त यानी अच्छी सेहत
कई रिसर्च यह कहती हैं कि सामाजिक सपोर्ट और अच्छी सेहत के बीच सीधा संबंध होता है। ओवेरियन कैंसर से पीडि़त कुछ लोगों पर किए गए एक अध्ययन में देखा गया कि जिनके पास समाज का ज्यादा साथ था, उनके शरीर में आक्रमणकारी कैंसर के प्रोटीन का स्तर बहुत कम था। इससे उनकी कीमोथेरेपी ज्यादा प्रभावी रही। एक अन्य शोध में पाया गया कि जिनके दोस्त कम थे, उन्हें दिल के दौरे से जल्द मृत्यु का जोखिम ज्यादा था। इन्हीं नतीजों को देखते हुए अब विशेषज्ञ भी मानने लगे हैं कि सोशल सपोर्ट लोगों को स्ट्रेस से लडऩे की ताकत देता है और बेहतर देखभाल करने के लिए प्रेरित करता है।
मिलना न छोड़ें
हमारे बचपन के दोस्त हमारे सबसे अच्छे दोस्त होते हैं लेकिन समय के साथ उनका साथ छूट जाता है। ऐसे में आप अपने दोस्तों से लगातार संपर्क बनाए रखने के बहाने तलाशती रहें। बचपन के दोस्त जितनी खुशी देती हैं, उतनी खुशी फिर बाद में बने दोस्त कभी नहीं दे पाते। यही दोस्ती सबसे पक्की भी होती है।
महिलाओं की दोस्ती
आमतौर पर दोस्ती निभाने में महिलाएं पुरुषों की तुलना में बेहतर साबित होती हैं। वे स्ट्रेस के समय न केवल दोस्तों से सहायता की दरकार करती हैं, बल्कि जरूरत होने पर खुद भी दोस्तों की मदद करती हैं। बेशक पुरुष भी दोस्तों की मदद करते हैं लेकिन महिलाओं की मदद में भावनात्मक पहलू भी शामिल होता है। वे अपने दोस्तों की परेशानियों को सुनती हैं और उनके लिए संभव हल भी सुझाती हैं।
अकेलेपन का बुरा प्रभाव
अकेले रहने वाले लोगों का क्या? क्या इस अकेलेपन के कारण उन्हें मृत्यु का जोखिम ज्यादा है? जवाब है हां लेकिन तभी जब कि वे अकेलापन महसूस करें। खुद को अकेला मानने वाले युवाओं में ड्रग्स का उपयोग ज्यादा किया जाता है, वहीं अकेलेपन से परेशान बुजुर्गों में हाई ब्लडप्रेशर और नींद कम आने की समस्या पाई जाती है। इससे उनकी इम्युनिटी प्रभावित होती है और रक्त में स्ट्रेस हार्मोन का स्तर बढऩे लगता है।
Published on:
17 Dec 2017 02:48 pm
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