
relationship reduces stress
आजकल नौकरी करने वाली महिलाओं का प्रतिशत काफी बढ़ गया है। जब पति-पत्नी दोनों कामकाजी हों, तब जिम्मेदारी कई गुना बढ़ जाती है। एक तरफ घर और बच्चों की देख रेख करनी होती है। दूसरी तरफ बाहर के काम भी कम नहीं होते। फिर ऑफिस की टेंशन तो लगी ही रहती है। पति-पत्नी मिलकर ही सारी जिम्मेदारियां अच्छे-से निभा सकते हैं और तनाव कम कर सकते हैं।
एमबीए करने के बाद दिशा को अच्छी नौकरी मिली। ऑफिस के ही रमन से उसने प्रेम विवाह किया। उसे एक प्रमोशन भी मिला। वह खुश थी, पर निजी जिंदगी में परेशानियां आना शुरू हो गईं। उसने कभी नहीं सोचा था कि रमन को उसकी ज्यादा सैलरी को पचाने में मुश्किल होगी। इसके अलावा काम के दबाव से भी दोनों काफी परेशान रहते थे। अपनी सहेलियों बात करने पर उसने पाया कि ज्यादातर कामकाजी महिलाओं को ऐसे तनाव झेलने पड़ते हैं। कामकाजी पुरुष भी काफी तनाव झेलते हैं, लेकिन महिलाओं और पुरुषों के तनावों की प्रकृति और स्तर अलग होते हैं।
आपसी सामंजस्य से निभेंगी जिम्मेदारियां
जीवनसाथी का स्वभाव, उसकी दिक्कतें और उसका मनोविज्ञान समझना बहुत जरूरी है। कई बार हम सामने वाले को समझे बिना उससे अपेक्षाएं करते हैं। अपेक्षाएं पूरी न होने पर तनाव पैदा होता है। दूसरी ओर अपनी कमियों को समझ कर उन्हें भी दूर करना जरूरी है। जब पति-पत्नी दोनों कामकाजी होते हैं, तो दोनों की अपनी-अपनी दुनिया होती है। उस दुनिया की अपनी-अपनी दिक्कतें होती हैं। हमें समझना होगा कि जैसे हमारे ऊपर काम का दबाव है, वैसे उस पर भी है। सबसे जरूरी बात कि कभी-कभी खुद से उसकी तुलना नहीं करनी चाहिए कि मेरे साथ तो ऐसा नहीं होता, फिर उसके साथ क्यों। आप दोनों के काम, ऑफिस के तौर-तरीकों और स्वभाव में बहुत फर्क हो सकता है। आपसी सामंजस्य से ही परेशानी का हल निकल सकता है। कम से कम एक-दूसरे का प्यार, साथ और सहयोग ऑफिस के तनाव को कम तो कर ही सकता है।
जीवनसाथी न बने तनाव की वजह
जिंदगी में आप कुछ भी पा लें, किसी न किसी रास्ते से तनाव तो मन में दाखिल होगा ही। जैसे-जैसे काम, जिम्मेदारी बढ़ती है, वैसे-वैसे तनाव का स्तर भी बढ़ता है। एकदम सपाट जिंदगी किसी की भी नहीं होती। इसलिए महिला हो या पुरुष, हर स्थिति में शांत और खुश रहना हर दिन को बेहतर बनाता है। तनाव तो होगा, लेकिन उससे निपटना आना चाहिए। अगर तनाव से निपटने में आपको आपने जीवनसाथी की भी मदद मिल जाती है, तो सब कछ बहुत आसान हो जाता है। वहीं अगर जीवनसाथी की वजह से भी तनाव मिले, तो मुश्किलें बढ़ जाती हैं। एक-दूसरे का साथ देते हुए तनाव से लड़ा और उससे जीता जा सकता है।
आदतों को बदलना होगा
दोनों अपनी पुरानी आदतों को बदलें। अगर कभी पति को घर-बच्चों की देखरेख के लिए घर पर रुकना पड़े, तो उसे इस जिम्मेदारी को खुशी-खुशी निभाना चाहिए। इसी तरह पत्नी को भी बाहर के कामों से परहेज नहीं करना चाहिए। अगर पत्नी की आय ज्यादा है, तो भी पति को इसे भी सकारात्मक रूप में लेना होगा। अगर उसे यह उसकी काबिलियत से मिल रही है तो यह गर्व की बात है। इसके अलावा यह भी याद रखें कि इससे आपके ही घर की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है। कभी-कभी काम के क्षेत्र में अंतर के कारण भी आय में अंतर होता है। कभी भी पत्नी की अधिक आय से अपना ईगो न हर्ट होने दें। खुद भी बेहतर करने के लिए इसे एक प्रेरणा की तरह लें।
एक जैसे कामों का असर अलग-अलग
अमरीका की यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनॉइस में एक अध्ययन हुआ। इसमें ये बिंदु सामने आए
कामकाजी महिलाएं कामकाजी पुरुषों की तुलना में ज्यादा तनाव झेलती हैं। इससे उनमें डिप्रेशन का खतरा भी ज्यादा होता है।
कॅरिअर में महिलाएं जितना आगे बढ़ती हैं, उनमें डिप्रेशन की आशंका भी उतनी ही बढ़ती चली जाती है।
पति से ज्यादा कमाने वाली महिलाओं में डिप्रेशन का खतरा ज्यादा देखने को मिलता है।
आय के साथ महिलाओं में डिप्रेशन भी बढ़ता जाता है।
इसके विपरीत जब पुरुषों की आय बढ़ती है, तो उनके मन पर इसका सकारात्मक असर होता है। इससे उनका जीवनस्तर भी सुधरता है।
जब पुरुष बच्चों और घर की देखभाल के लिए काम छोड़ते हैं, तो महिलाओं की तुलना में उनमें ज्यादा डिप्रेशन देखने को मिलता है।
अपनी पत्नी को सेकंड पर्सन न समझें, आप दोनों एक ही हैं!
डॉ. नियति धवन, साइकोलॉजिस्ट व काउंसलर
मेरी 32 वर्षीय पत्नी अपनी बैंकिंग जॉब में काफी आगे बढ़ रही है। पर पद और आय के साथ-साथ उसमें तनाव बढ़ता जा रहा है। इसका असर हमारे संबंधों पर भी पड़ रहा है?
आपको अपनी पत्नी के साथ बैठ कर प्यार से उसे समझाना होगा। उससे पूछें कि कॅरिअर को लेकर उसके क्या लक्ष्य हैं, ताकि लक्ष्य पूरा होने पर वह थोड़ा ठहर सकें। उन्हें बताएं कि आप उनकी सफलता से खुश हैं, पर उन्हें हमेशा खुश देखना चाहते हैं। इसके बाद भी बात न बने, तो उनके साथ किसी रिलेशनशिप काउंसलर से मिल सकते हैं।
मेरे पति की सरकारी नौकरी है। मैं एक प्राइवेट संस्थान में काम करती हूं। मेरे वर्किंग आवर्स उनसे ज्यादा हैं। बच्चों की देखरेख ज्यादातर उन्हें ही करनी पड़ती है। इस वजह से वे परेशान रहते हैं। उन्हें कैसे समझाऊं?
आप उन्हें किसी रिलेशनशिप काउंसलर से मिलवाएं। वो उनसे विस्तार से बात करके परेशानी को समझेगा। अपनी तरफ से आप इतना कर सकती हैं कि जितना हो सके, घर, बच्चों व पति को समय देने की कोशिश करें।
मेरी पत्नी मुझसे ज्यादा कमाती है। मुझे इससे दिक्कत नहीं, पर कभी-कभी दोस्त इसपर छेड़ते हैं,बुरा लगता है। मैं नहीं चाहता कि मेरे अंदर कोई हीनभावना पैदा हो। क्या करूं?
आप यह समझें कि पत्नी की कमाई आपके परिवार, बच्चों और आपके लिए ही है, तो हीनभावना का कोई ही सवाल नहीं उठता। अगर आप ज्यादा कमा रहे होते, तो क्या वह हीनभावना पालती? लोगों की बातों पर ध्यान मत दीजिए। अपनी पत्नी और खुद को एक ही मानें, उसे सेकंड पर्सन की तरह न लें।

Published on:
27 Oct 2017 10:59 am
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