मानसून पर ग्रहों नक्षत्रों का प्रभाव, जानें कब तक जारी रहेगा बारिश का दौर

कई जिलों में अत्यधिक वर्षा होने के संकेत...

ग्रहों की चाल के बीच जहां एक ओर मानव जीवन में प्रभाव की बात सामने आती है, वहीं वर्तमान में ग्रहों व नक्षत्रों की चाल मानसून को भी काफी हद तक प्रभावित करती दिख रही है। इसी के चलते विभिन्न जिलों में हो रही अचानक बारिश जहां कुछ जगहों पर मुसीबत का कारण बनी हुई है। वहीं बारिश का दौर कब तक जारी रहेगा इसे लेकर लोगों के बीच चर्चा का भी दौर शुरु हो गया है।

ज्योतिष के जानकारों के अनुसार अंग्रेजी साल 2020 के 25 मार्च, बुधवार से नवसंवत्सर यानि हिंदू वर्ष 2077 शुरु हुआ। जिसका नाम प्रमादी है, ज्योतिष के अनुसार इस नवसंवत्सर के राजा बुध और चंद्र देव मंत्री हैं। पं. शर्मा के अनुसार सांवर्त नामक मेघ बादलों का स्वामी है। वहीं नवसंवत्सर 2077 में ग्रहों के राजा सूर्यदेव के पास सबसे अधिक तीन अधिकार हैं। इनमें वर्षा के स्वामी, पुष्पों- फलों के स्वामी और सेनापति का भी अधिकार सूर्यदेव के पास ही है।

इसमें वर्षा के स्वामी सूर्य देव के होने के परिणाम स्वरूप भारतवर्ष में औसतन वर्षा अच्छी, जबकि कई जिलों में अत्यधिक वर्षा होने के संकेत मिले। अत्यधिक वर्षा का मुख्य प्रभाव राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली व उसके आसपास के क्षेत्रों के अलावा, मध्यप्रदेश,आंध्रा व कर्नाटक के कुछ जिलों के अलावा राजस्थान के कुछ हिस्सों में होने की संभावना रही।

जानियें ज्योतिष के अनुसार अभी कब और कहां बने हुए है बारिश के योग...

: सितंबर- 01 से 07 सितंबर, 12 से 18 एवं 26, 28 से 31 सितंबर तक अच्छी बारीश, बिजली, बाढ़ के कारण कई शहरों में क्षति की स्थिति बनेगी।

: अक्टूबर- 05 से 07 अक्टूबर, 10 से 13 अक्टूबर, 19 से 30 अक्टूबर तक खण्डवृष्टि हो सकती है।

: नवंबर- 02 से 04 नवंबर, 17 से 19 नवंबर एवं 20 से 30 नवंबर तक देश के कई हिस्सों में प्रकृति प्रकोप से जन हानि हो सकती है।

: दिसंबर- 04 से 05 दिसंबर, 11 से 14, 24 से 26 एवं 29 से 31 दिसंबर तक देश के कई हिस्सों में खण्डवृष्टि, शीतलहर हो सकती है।


इधर, वर्तमान में मध्यप्रदेश सहित कुछ अन्य प्रदेशों के कई जिलों में बारिश का सिलसिला बना हुआ है। कई जगहों पर सुबह से ही झमाझम बारिश (Weather forecast) का दौर जारी होने से लोगों ने उमस भरी गर्मी से राहत की सांस ली। दूसरी ओर बारिश के बाद धान की फसल एक बार फिर संजीवनी मिल गई है। बता दें कि मप्र में भोपाल के अलग-अलग स्थानों पर लगातार दो दिन से बारिश से हो रही है।

ज्योतिष के जानकारों के अनुसार भी इस साल यानि 2020 में शनि के जल तत्व की राशि मकर और मंगल के जलतत्व की राशि मीन में वक्री होना सामान्य से कुछ अधिक वर्षा होने की ओर संकेत करता है।

इस संबंध में किसानों का कहना है कि बारिश धान के लिए फायदेमंद है, रबी फसल की बोअनी की तैयारी में लगे किसानों को भी इससे लाभ होगा। बारिश से सब्जी उगाने वाले किसानों को भी बड़ी राहत मिली है। यहां में लंबे अंतराल के बाद मेघ मेहरबान हुए हैं। बीते कई दिनों से बारिश नहीं होने के कारण लोग तेज गर्मी और उमस से परेशान रहे।

मध्यप्रदेश के कई जिलों में बारिश का दौर जारी रहने के बीच मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के दौरान गरज चमक के साथ बारिश ( rainfall ) का पूर्वानुमान जारी किया है। 28 जिलों में बारिश की चेतावनी ( Weather Alert ) जारी की है।

मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक अक्टूबर के पहले सप्ताह तक बारिश का दौर जारी रहेगा। राजधानी भोपाल में पिछले दिनों करीब आधा घंटे तक धमाकेदार बारिश हुई। प्रदेश में पिछले 24 घंटों के दौरान भोपाल, जबलपुर और रीवा संभागों के जिलों में कहीं-कहीं बारिश दर्ज की गई। शेष संभागों के जिलों में मौसम शुष्क रहा। इस दौरान प्रदेश में बेगमगंज में 3 सेमी बारिश दर्ज की गई।

जानकारों के मुताबिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भारत में मानसून सूर्य के आद्रा नक्षत्र से आरंभ होकर स्वाती नक्षत्र तक रहता है। वर्षा ऋतु से पहले सूर्य 25 मई से 6 जून तक रोहिणी नक्षत्र में रहता है। इन दिनों वर्षा का होना आगे वर्षा के लिए अवरोधक माना गया है। दरअसल पंडित सुनील शर्मा के अनुसार वैदिक ज्योतिष के अनुसार आर्द्रा नक्षत्र का स्वामी राहु ग्रह है। यह आंसू की तरह दिखायी देता है। ऐसे में अभी 23 सितंबर को ही राहु के परिवर्तन ने भी वर्षा चक्र को प्रभावित किया है।

वर्तमान में मानसून द्रोणिका (ट्रफ) राजस्थान से कम दबाव के क्षेत्र से होकर बंगाल की खाड़ी तक जा रही है। दक्षिणी महाराष्ट्र से उप्र तक एक ट्रफ बना हुआ है। दक्षिणी महाराष्ट्र पर एक ऊपरी हवा का चक्रवात मौजूद है।

इन चार सिस्टम के असर से बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से नमी मिल रही है। मौसम विज्ञानियों ने गुरुवार को रीवा, सागर संभाग के जिलों में कहीं-कहीं भारी बारिश के आसार जताए हैं।

वैदिक ज्योतिष के अनुसार आर्द्रा नक्षत्र का स्वामी राहु ग्रह है। यह आंसू की तरह दिखायी देता है। इस नक्षत्र के रूद्रा (शिव का एक रूप) और लिंग-स्री है। यहां आर्द्रा का शाब्दिक आंसू (अश्रु) यानि पानी से माना जाता है, ऐसे में जब सूर्य आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश करते हैं तो मेदिनी ज्योतिष के अनुसार आसमान में मानसून के बादलों में विशेष गति आती है। ऐसे समय में यदि अन्य वर्षा कारक ग्रह जैसे गुरु, चंद्र, शुक्र और बुध अनुकूल हों तो बरसात खूब होती है।

वहीं मौसम विभाग ने आगामी 24 घंटों में रीवा एवं सागर संभागों के जिलों में अधिकांश स्थानों पर वर्षा या गरज चमक के साथ बौछारे पड़ सकती है। मौसम विभाग ने इसके साथ ही शहडोल, जबलपुर, इंदौर, उज्जैन, होशंगाबाद एवं भोपाल संभाग के जिलों में अनेक स्थानों पर वर्षा या गरज चमक के साथ बौछारे पड़ सकती है।

वहीं ग्वालियर एवं चंबल संभागों के जिलों में कहीं-कहीं वर्षा या गरज चंमक के साथ बौछारे पड़ सकती है। इसके अलावा रीवा संभाग के जिलों में तथा अनूपपुर, शहडोल, पन्ना एवं छतरपुर जिलों में कहीं-कहीं भारी वर्षा हो सकती है।

ज्योतिषों के अनुसार भारत में मानसून सूर्य के आद्रा नक्षत्र से आरंभ होकर स्वाती नक्षत्र तक रहता है। वहीं सूर्य के आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश के समय बनने वाली कुंडली से ही ज्योतिष में दक्षिण-पश्चिम मानसून की वर्षा के संबंध में भविष्यवाणी की जाती है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार आर्द्रा नक्षत्र का स्वामी राहु ग्रह है। यह आंसू की तरह दिखायी देता है।

इस नक्षत्र के रूद्रा (शिव का एक रूप) और लिंग-स्री है। यहां आर्द्रा का शाब्दिक आंसू (अश्रु) यानि पानी से माना जाता है, ऐसे में जब सूर्य आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश करते हैं तो मेदिनी ज्योतिष के अनुसार आसमान में मानसून के बादलों में विशेष गति आती है। ऐसे समय में यदि अन्य वर्षा कारक ग्रह जैसे गुरु, चंद्र, शुक्र और बुध अनुकूल हों तो बरसात खूब होती है।

वहीं इस साल यानि 2020 में शनि के जल तत्व की राशि मकर और मंगल के जलतत्व की राशि मीन में वक्री होना सामान्य से कुछ अधिक वर्षा होने की ओर संकेत करता है। जिसके चलते भारत के उत्तर और पश्चिम भू-भाग में बाढ़ और भारी वर्षा से भूस्खलन का खतरे की स्थिति भी निर्मित होती दिख रही है।

वर्षा का ज्योतिष ऐसे समझें...
मौसम की सूक्ष्म जानकारी के लिए त्रिनाड़ी चक्रम, सप्त नाड़ी चक्रम, नक्षत्र संख्या बोधक चक्रम, वर्षा अवरोधक चक्रम और गोचर ग्रहों के योगादि से वर्षा पर विचार किया जाता है और तब स्थान विशेष के निर्धारण के लिए कूर्मचक्र से विचार किया जाता है।

वर्ष के भचक्र में जिस दिन सूर्य आद्र्रा नक्षत्र में प्रवेश करता है उस दिन जो वार होता है उसके स्वामी को उस वर्ष का मेघेश अर्थात मौसम विभाग का मंत्री नियुक्त किया जाता है। सूर्य के आद्र्रा नक्षत्र से लेकर स्वाती नक्षत्र तक सूर्य संचालन में मानसून के आरंभ होने पर वर्षा का रुख बनता है।

वहीं वर्षा का ज्ञान प्राप्त करने के लिए ज्योतिष शास्त्र में वायुमंडल का विचार किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार पूर्व तथा उत्तर की वायु चले तो वर्षा शीघ्र होती है। वायव्य दिशा की वायु के कारण तूफानी वर्षा होती है। ईशानकोण की चलने वाली वायु वर्षा के साथ-साथ मानव हृदय को प्रसन्न करती है। श्रावण में पूर्व दिशा की और वादों में उत्तर दिशा की वायु अधिक वर्षा का योग बनाती है। शेष महीनों में पश्चिमी वायु (पछवा) वर्षा की दृष्टि से अच्छी मानी जाती है।

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दीपेश तिवारी
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