
Ravi Pradosh Vrat 2026 : प्रदोष व्रत जुलाई 2026 तिथि , पूजा विधि (फोटो सोर्स : AI@chatgpt)
Pradosh Vrat July 2026 Date: द्रिक पंचांग के अनुसार जुलाई 2026 में श्रद्धालुओं को दो रवि प्रदोष व्रत (Ravi Pradosh Vrat 2026) का दुर्लभ संयोग बन रहा है। पहला व्रत 12 जुलाई और दूसरा 26 जुलाई को रखा जाएगा। दोनों दिन प्रदोष काल में भगवान शिव और सूर्य देव की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। आइए जानते हैं दोनों व्रत की तिथि, पूजा मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रवि प्रदोष व्रत रखने से न केवल भगवान भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं, बल्कि कुंडली में ग्रहों के राजा सूर्य देव की स्थिति भी मजबूत होती है। जिससे व्यक्ति को समाज में मान-सम्मान, उत्तम स्वास्थ्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
| व्रत | तिथि और तारीख | प्रदोष काल पूजा मुहूर्त | विशेष महत्व |
| पहला रवि प्रदोष व्रत | 12 जुलाई 2026, रविवार (त्रयोदशी तिथि: रात 02:04 से रात 10:29 तक) | शाम 07:22 से रात 09:24 तक | सावन से पहले आत्मशुद्धि और मानसिक शांति के लिए। |
| दूसरा रवि प्रदोष व्रत | 26 जुलाई 2026, रविवार | शाम 07:16 से रात 09:21 तक | सावन के माहौल में शिव-साधना और ऐश्वर्य प्राप्ति के लिए। |
अगर आपकी कुंडली में सूर्य कमजोर है, शायद काम में दिक्कतें आ रही हैं, पिता के साथ तनाव है, या बुरी खबर आ रही है, तो आपकी एनर्जी बदल सकती है। सूर्य और शिव दोनों की एक साथ प्रार्थना करने से आपकी एनर्जी बदल सकती है। पुरानी कहानियों में भी भगवान चंद्र ने इस व्रत से खुद को ठीक किया था। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रवि प्रदोष व्रत करने से भगवान शिव और सूर्य देव की कृपा प्राप्त होती है। मान्यता है कि इससे आत्मबल, स्वास्थ्य और सम्मान में वृद्धि होती है। हालांकि इन मान्यताओं का वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।
यह आसान है। ब्रह्म मुहूर्त में सूरज उगने से पहले उठें, नहाएं और साफ कपड़े पहनें। लाल या पीले रंग के वस्त्र शुभ माने जाते हैं।। फिर तांबे के बर्तन में शुद्ध जल, रोली, लाल चंदन, लाल फूल और साबुत चावल डालें। इसे उगते सूरज को खड़े होकर चढ़ाएं और आदित्य हृदय स्तोत्र का जाप करें।
इसके बाद भगवान शिव के सामने हाथ में जल लेकर व्रत रखने का संकल्प करें। सूरज डूबने पर जब प्रदोष काल शुरू हो तो शिवलिंग को गंगाजल, गाय के दूध या पंचामृत से नहलाएं। बेलपत्र, धतूरा, भांग, चंदन, भस्म, फल या मिठाई चढ़ाएं। “ॐ नमः शिवाय” का जाप करते रहें और इसके बाद शिव चालीसा और आरती करें। बस उस दिन नमक न खाएं, सादा शाकाहारी खाना खाएं।
अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यहाँ दी गई ज्योतिष, वास्तु या धार्मिक जानकारी मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। हम इसकी पूर्ण सटीकता या सफलता की गारंटी नहीं देते हैं। किसी भी उपाय, सलाह या विधि को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के प्रमाणित विशेषज्ञ या विद्वान से परामर्श अवश्य लें।
Published on:
01 Jul 2026 04:21 pm
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