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हार्वर्ड के प्रोफेसर ने जब बाबा नीम करोली को खिलाई नशे की गोली, जानें तब क्या हुआ

बाबा नीम करोली (Baba Neem Karoli) का जीवन रहस्यों से भरा हुआ है, उनके भक्त देश से विदेश में फैले हुए हैं। और सब के पास बाबा से जुड़ी कोई न कोई रहस्यमय कहानी है, जिसे जान सुनकर आप हैरान हुए बिना नहीं रह पाएंगे। ऐसी ही एक कहानी हार्वर्ड के सहायक प्रोफेसर से जुड़ी हुई है, बाबा नीम करोली से मिलने के बाद जिसका जीवन ही बदल गया। आइये जानते हैं भक्तों की ओर से सुनाई हार्वर्ड के प्रोफेसर की कहानी (Baba Neem Karoli Ki Katha)...

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Pravin Pandey

Apr 25, 2023

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बाबा नीम करोली ने भक्तों को बताए हैं कब आते हैं अच्छे दिन

हार्वर्ड का प्रोफेसर बना रामदास

भक्तों के अनुसार हार्वर्ड विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग में रिचर्ड अल्पर्ट नाम के अंग्रेज सहायक प्रोफेसर थे। वे मनुष्य को भ्रमित करने वाले नशे का अध्ययन करते थे। इस अध्ययन के दौरान ही रिचर्ड को भी इस नशे की लत लग गई। रिचर्ड का झुकाव आध्यात्म की ओर भी था, इसी के चलते वे भारत आए। यहां उनकी मुलाकात बाबा नीम करोली से हुई। रिचर्ड का मन बाबा को लेकर असमंजस में था, उसने बाबा नीम करोली को अपने मन में बाबाओं को लेकर जो पूर्वाग्रह था, उसी अनुरूप समझ लिया और जो नशा वो करता था उसकी बहुत सारी गोलियां बाबा को खाने को दे दी, लेकिन बाबा को कुछ नहीं हुआ।


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यह देखकर रिचर्ड हैरान रह गया। वह नीम करोली बाबा का चमत्कार (रहस्य) देखकर बाबा का शिष्य बन गया। बाबा नीम करोली ने रिचर्ड को कहा कि इस नशे में कुछ नहीं रखा है, अगर नशा ही करना है तो आध्यात्म का नशा करो। बाबा नीम करोली ने रिचर्ड अल्पर्ट का नाम रखा रामदास। इसके बाद रिचर्ड अल्पर्ट ने बाबा नीम करोली के चमत्कारों पर एक पुस्तक लिखी, जिसका नाम रखा Miracle OF Love। बताया जाता है कि इसके बाद रामदास ने देश और विदेश में कई जगह सेवा फाउंडेशन और हनुमान फाउंडेशन के सहयोग से कई आध्यात्मिक और जनकल्याणकारी कार्य किए। यह किस्सा कैंची धाम आने वाले कई भक्त श्रद्धा भाव से सुनाते हैं, इससे हर किसी का मन आस्था की बूंदों में भीगे बिना नहीं रहता।

क्या बनें हैं इस घटना के गवाह
बाबा नीम करोली के धाम, कैंची धाम में हमेशा भंडारे होते रहते हैं, यह सिलसिला तब से चल रहा है जब से बाबा कैंचीधाम रहने लगे थे। भक्तों के अनुसार यहां आने वाला हर भक्त तृप्त होकर जाता था। एक बार भंडारा चल रहा था, तभी घी कम पड़ गया। अब सब परेशान हो गए कि घी का इंतजाम नहीं हुआ तो भंडारा रोकना पड़ेगा। तब सेवक बाबा नीम करोली के पास गए और सारा हाल कह सुनाया। इतना सुनने के बाद भी बाबा परेशान नहीं हुए, उन्होंने सेवकों से कहा कि पास में बह रही नदी का जल कड़ाहे में डाल दे।


पहले तो यह बात सेवकों की समझ में नहीं आई, फिर भी बाबा ने कहा तो सेवक गए और नदी का जल घी वाले कनस्तर में लेकर लौटे। इस जल को सेवकों ने कड़ाहे में डाल दिया। देखते ही देखते वह पानी घी में परिवर्तित हो गया। यह चमत्कार देखकर वहां मौजूद हर कोई हैरान था।