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जानिए भगवान हनुमान के जन्‍म का दुर्लभ रहस्‍य, अंजना माता की ये सच्चाई चकित कर देगी

भगवान हनुमान के सतयुग में जन्‍म की कथा, माता अंजना से जुड़ी हुई है।

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नई दिल्ली। आज हम आपको उस रहस्य के बारे में बताने जा रहे हैं, जो दुर्लभ है। भगवान हनुमान के सतयुग में जन्‍म की कथा, माता अंजना से जुड़ी हुई है। जैसा की आप जानते हैं भगवान हनुमान माता अंजना और केसरी नंदन के पुत्र हैं, जो अंजनागिरि पर्वत में निवास करते थे। अंजना स्वर्ग की एक अप्‍सरा थी, शयद आपको न पाता हो लेकिन उनको एक ऋषि ने शाप देकर बंदरिया बना दिया।

कथा इस प्रकार है एक बार अपने बचपन में अंजना ने एक बंदर को पैरों पर खड़े होकर ध्‍यान लगाते देखा, तो बचपने में उनहोंने उस बंदर को फल फेंक कर मार दिया। तभी वह बंदर एक ऋषि में बदल गया और उसकी तपस्‍या भंग होने पर वह क्रोधित हो गया। उसने अंजना को शाप दिया कि जिस दिन उसे किसी से प्रेम हो जाएगा, उसी क्षण वह बंदरिया बन जाएगी।

अंजना ने बहुत माफी मांगी और ऋषि से उसे क्षमा करने को कहा परंतु ऋषि ने एक नहीं सुनी लेकिन बाद में थोडा दया करके उसने यह कहा की अब तो वह श्राप वापस नहीं ले सकता लेकिन आशीर्वाद देकर कहा उसका पुत्र भगवान शिव का अंश होगा।

कुछ समय बाद, अंजना जंगलों में रहने लगी। वहां उसकी भेंट केसरी से हुई, जिससे प्रेम होने पर वह बंदरिया बन गई और केसरी ने अपना परिचय देते हुए अंजना को बताया कि वह बंदरों का राजा है। अंजना ने गौर से देखा तो पाया कि केसरी के पास ऐसा मुख था जिसे वह मानव से बंदर या बंदर से मानव कर सकता था। केसरी की ओर से प्रस्‍ताव रखने पर अंजना मान गई और दोनों का विवाह हो गया। अंजना ने घोर तपस्‍या की और भगवान शिव से उनके समान एक पुत्र मांगा। भगवान ने उन्हें पुत्र का आशीर्वाद दिया।

दूसरी तरफ, अयोध्‍या के राजा दशरथ ने पुत्र की प्राप्ति के लिए पुत्रकामेस्‍थी यज्ञ आयोजित किया। अग्नि देव को प्रसन्‍न करने के बाद उन्‍होने दैवीय गुणों वाले पुत्रों की कामना की। अग्निदेवता ने प्रसन्‍न होकर दशरथ को एक पवित्र हलवा दिया, जिसे तीनों पत्नियों में बांटने को कहा। राजा ने बड़ी रानी तक हलवे को पंतग से पहुंचाया, वहीं बीच में कहीं माता अंजना प्रार्थना कर रही थी, हवन की कटोरी में वह हलुवा जा गिरा, माता अंजना ने उस हलवे को ग्रहण कर लिया। उसे खाने के बाद उन्हें लगा जैसे गर्भ में भगवान शिव का वास हो गया हो।

इसके बाद हनुमान जी का जन्म हुआ। भगवान हनुमान को पवनपुत्र इसलिए कहा जाता है क्‍योंकि हवा चलने के कारण ही वह हलुवा, माता अंजनी की कटोरी में आकर गिरा था। भगवान हनुमान के जन्‍म लेते ही माता अंजना अपने शाप से मुक्‍त होकर वापस स्‍वर्ग चली गईं। भगवान हनुमान सात चिरंजीवियों में से एक हैं और भगवान श्रीराम के भक्‍त थे। रामायण की गाथा में उनका स्‍थान क्या है ये तो सब जानते हैं।

दोहा

तीन लोक चौदह भुवन कर धारे बलवान ।
राम काज हित प्रगट भे बीर बली हनुमान।

चौपाई

अजय शरण तुम्हरे हनुमंता ।
नहि देखा तुम सम कोउ संता ।।
कृपा करहु मो पर बलधारी ।
भवं भवानी हर तिरपुरारी ।।