
Navratri puja rules for menstruating women|फोटो सोर्स- Freepik
Chaitra Navratri 2026: नवरात्र का पावन पर्व जहां श्रद्धा, भक्ति और नियमों का प्रतीक है, वहीं इस दौरान महिलाओं के मन में कुछ व्यावहारिक सवाल भी उठते हैं। खासतौर पर जब कलश स्थापना के दूसरे या तीसरे दिन पीरियड्स शुरू हो जाए, तो कई लोग असमंजस में पड़ जाते हैं। क्या इस स्थिति में व्रत और पूजा जारी रखी जा सकती है या नहीं, इसे लेकर अलग-अलग मान्यताएं प्रचलित हैं। दरअसल, पीरियड्स एक प्राकृतिक प्रक्रिया है और इसे लेकर अपराधबोध रखना सही नहीं माना जाता। ऐसे में ज्योतिषाचार्य शरद शर्मा से जानते हैं कि शास्त्रों और परंपराओं के अनुसार इस स्थिति में क्या करना उचित होता है।
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि पीरियड्स कोई दोष या अशुद्धि नहीं है, बल्कि यह शरीर की प्राकृतिक प्रक्रिया है। इसे लेकर मन में ग्लानि या डर रखना सही नहीं है। धर्म भी हमें संतुलन और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना सिखाता है।
अगर आपने पूरे नौ दिन का व्रत रखने का संकल्प लिया है और बीच में पीरियड्स आ जाते हैं, तो व्रत तोड़ने की आवश्यकता नहीं है। आप फलाहार के साथ अपना व्रत जारी रख सकती हैं। हालांकि, अगर कमजोरी या दर्द ज्यादा हो, तो शरीर की जरूरत को समझना भी उतना ही जरूरी है। भक्ति में कष्ट देना जरूरी नहीं, भावना जरूरी है।
शास्त्रों में पीरियड्स के दौरान शारीरिक रूप से पूजा-पाठ से दूर रहने की सलाह दी गई है, जैसे मंदिर में प्रवेश या पूजा सामग्री को छूना। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आप पूजा नहीं कर सकतीं। ‘मानसिक पूजा’ यानी मन ही मन देवी का ध्यान करना, मंत्र जाप करना या भजन सुनना पूरी तरह मान्य और श्रेष्ठ माना गया है। यह भक्ति का एक शांत और गहरा रूप है।
इस दौरान घर के मंदिर की साफ-सफाई, दीपक जलाना या आरती करना किसी अन्य सदस्य से करवाना बेहतर होता है। इससे पूजा की नियमितता भी बनी रहती है और नियमों का पालन भी होता है।
अष्टमी या नवमी पर होने वाले कन्या पूजन में आप सीधे भाग न लें। प्रसाद बनाने और कन्याओं को भोजन कराने का कार्य परिवार के अन्य सदस्य कर सकते हैं। आप दूर से ही हाथ जोड़कर श्रद्धा व्यक्त कर सकती हैं।
Published on:
20 Mar 2026 11:28 am
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