
विचार मंथन : भय का निवास न तो अन्धकार में है और न ही वस्तु में, उसका निवास केवल अज्ञान में रूपी अंधेरे का ज्ञान न होने में है- आचार्य श्रीराम शर्मा
मस्तिष्क में हर समय सद्विचार ही छाये रहें इसका उपाय यही है कि नियमित रूप से नित्य सद्साहित्य का अध्ययन करते रहा जाय। वेद, पुराण, गीता, उपनिषद्, रामायण, महाभारत आदि धार्मिक साहित्य के अतिरिक्त अच्छे और ऊंचे विचारों वाले साहित्यकारों की पुस्तकें सद्साहित्य की आवश्यकता पूरी कर सकती हैं। यह पुस्तकें स्वयं अपने आप खरीदी भी जा सकती हैं और सार्वजनिक तथा व्यक्तिगत पुस्तकालयों से भी प्राप्त की जा सकती हैं आजकल न तो अच्छे और सस्ते साहित्य की कमी रह गई है और न पुस्तकालयों और वाचनालयों की कमी। आत्म-कल्याण के लिए इन आधुनिक सुविधाओं का लाभ उठाना ही चाहिए।
समाज में फैली हुई अन्धता, मूढ़ता तथा कुरीतियों का कारण अज्ञान-अन्धकार होता है। अन्धकार में भ्रम होना स्वाभाविक ही है। जिस प्रकार अंधेरे में वस्तुस्थिति का ठीक ज्ञान नहीं हो पाता— पास रखी हुई चीज का स्वरूप यथावत् दिखाई नहीं देता, उसी प्रकार अज्ञान के दोष से स्थिति, विषय आदि का ठीक आभास नहीं होता। वस्तुस्थिति के ठीक ज्ञान के अभाव में कुछ का कुछ सूझते और होने लगता। विचार और उनसे प्रेरित कार्य के गलत हो जाने पर मनुष्य को विपत्ति संकट अथवा भ्रम में पड़कर अपनी हानि कर लेना स्वाभाविक ही है।
अन्धकार के समान अज्ञान में भी एक अनजान भय समाया रहता है। रात के अन्धकार में रास्ता चलने वालों को दूर के पेड़-पौधे, ठूंठ, स्तूप तथा मील के पत्थर तक चोर-डाकू, भूत-प्रेत आदि से दिखाई देने लगते हैं। अन्धकार में जब भी जो चीज दिखाई देगी वह शंकाजनक ही होगी, विश्वास अथवा उत्साहजनक नहीं। घर में रात के समय पेशाब, शौच आदि के लिए आने-जाने वाले अपने माता-पिता, बेटे-बेटियां तक अन्धकाराच्छन्न होने के कारण चोर, डाकू या भूत-चुड़ैल जैसे भान होने लगते हैं और कई बार तो लोग उनकी पहचान न कर सकने के कारण टोक उठते हैं या भय से चीख मार बैठते हैं।
यद्यपि उनके वे स्वजन पता चलने पर भूत-चुड़ैल अथवा चोर-डाकू नहीं निकले जो कि न पहचानने से पूर्व थे किन्तु अन्धकार के दोष से वे भय एवं शंका के विषय बने। भय का निवास वास्तव में न तो अन्धकार में होता है और न वस्तु में, उसका निवास होता है उस अज्ञान में जो अंधेरे के कारण वस्तुस्थिति का ज्ञान नहीं होने देता।
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Published on:
27 Sept 2019 06:17 pm
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