
secrets and myths about snakes
भारतीय संस्कृति में सांप को बहुत महत्व दिया गया है। पुराने समय से ही सांप और नागों से जुड़ी कई किवदतियां हमारे समाज में प्रचलित हैं। यही नहीं इन्हें मृत परिजनों या पितृ मान कर भी पूजा जाता है। लेकिन बहुत लंबे समय की इस यात्रा के दौरान सांपों के साथ कुछ ऐसे अंधविश्वास भी जुड़ गए जो सत्य नहीं हैं लेकिन जिनके नाम पर आम आदमी ठगा जाता है। यही नहीं इन अंधविश्वासों के कारण सांपों को भी जाने-अनजाने खतरा उठाना पड़ता है।
क्या सचमुच होते हैं दो मुंह वाले सांप?
दोमुंहा सांप एक किंवदती हैं जो भारतीय गांवों में आम बात है। जीव विज्ञानियों के अनुसार किसी भी सांप के दोनों सिरों पर मुंह नहीं होतें परन्तु कुछ सांपों के दो फन अवश्य हो सकते हैं जो किसी जेनेटिक कारण से हो सकते हैं। चीन में इस तरह के सांपों की काफी तस्करी होती है और एक ही सांप को खरीदने के लिए करोड़ों रूपए चुकाए जाते हैं। इन सांपों के अलावा जिन सांपों को दोमुंहा बताया जाता हैं उनकी पूंछ नुकीली नहीं होकर मोटी और ठूंठ जैसी दिखती है जिससे दो मुंह होने का आभास होता है।
मणिधारी सांप भी होते हैं
ये पूर्णतया गलत तथा तथ्यहीन है। अभी तक एक भी सांप ऐसा नहीं मिला है जिसके सिर पर मणि हो। यही नहीं सपेरे मणिधारी सांप होने से स्पष्ट मना करते हैं।
क्या सांपों की मूंछें होती है?
भारत के गांवों में माना जाता है कि कुछ सांपों की मूछें भी होती है। प्रायः ऐसा तब होता है जब सांप सौ वर्ष की उम्र पूरी कर लेते हैं। परन्तु जीव विज्ञानियों के अनुसार मूंछ वाले सांप होते ही नहीं है। उनके अनुसार सांप सरीसृप वर्ग के जीव हैं, इनके शरीर पर अपने जीवन की किसी भी अवस्था में बाल नहीं उगते। कभी-कभार सांप द्वारा केंचुली उतारते समय केंचुली का कुछ हिस्सा उसके मुंह के आसपास चिपका रह जाता है, जिससे मूंछ होने का भम्र होता है।
क्या इच्छाधारी सांप से मिले हैं आप?
यह ठीक वैसे ही है जैसे हिंदी फिल्मों में दिखाया जाता है कि हीरा चाटने से मौत हो जाती है। दोनों ही बातें पूरी तरह असत्य तथा अंधविश्वास है। आज से 60-70 वर्ष पूर्व तक ऐसी कोई कहानी भी नहीं होती थी। परन्तु पुरानी हिंदी फिल्मों से शुरू हुआ इस सिलसिले ने आम जनता में इच्छाधारी सांप होने के अंधविश्वास को बढ़ावा दिया।
झुनझुना बजाता है सांप?
रेगिस्तान में पाए जाने वाले वाइपर सांप बेहद खतरनाक होता है। लोगों का कहना है कि यह सांप झुनझुना बजाता है, लेकिन यह उनकी भ्रांति है। असल में इस सांप की पूंछ में कई छल्ले बने होते हैं। जब सांप को कोई खतरा महसूस होता है या फिर वह उत्तेजित होता है, तो इन छल्लों में कपन होने के कारण झनझनाहट की ध्वनि निकलती है। इसी कारण इसे रेटल स्नेक कहा जाता है।
क्या है उड़ने वाले सांपों की सच्चाई?
क्या उड़ने वाले सांप भी होते हैं? ऐसी बात भी हम कही न कहीं सुनते ही हैं, लेकिन इसमें कोई सच्चाई नहीं है। जीव विज्ञान के अनुसार, उड़ने वाले सांप नहीं होते। सांप की कुछ विशेष प्रजातियां होती हैं, जो अधिकांश समय पेड़ों पर ही रहती हैं। इस प्रजाति के सांपों में एक नैसर्गिक गुण होता है कि ये उछलकर एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर पहुंच जाते हैं, लेकिन इन पेड़ों की दूरी बहुत कम होती है। जब ये सांप उछलकर एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर जाते हैं तो ऐसी लगता होता है कि जैसे ये उड़ रहे हों।
नाग की हत्या का बदला लेती है नागिन
यह भी एक अंधविश्वास ही है। माना जाता है कि कोई मनुष्य किसी सांप को मार दे तो मरे हुए नाग की आंखों में मारने वाली की तस्वीर उतर आती है, जिसे पहचान कर नागिन उसका पीछा करता है और उसको काटकर वह अपने नाग की हत्या का बदला लेता है। यह भी हिंदी फिल्मों का फैलाया हुआ अंधविश्वास है। यह अवश्य सत्य है कि मरने वाला सांप एक विशेष गंध छोड़ता है जिससे आकर्षित होकर दूसरे सांप वहां पहुंच जाते हैं। परन्तु इसका बदले से कोई लेना देना नहीं है।
जीभ से सूंघता है सांप
आम तौर पर माना जाता है कि सांप के नाक होती है और इससे सूंघ कर वह अपना शिकार करता है। लेकिन सच्चाई ये है कि सांप अपनी जीभ का उपयोग स्वाद लेने और सूंघने के लिए करता है। यही वजह है कि सांप की जीभ लपलपाती रहती है।
बीन की धुन पर नाचते हैं सांप?
सांप के कान नहीं होते वरन उनकी त्वचा धरती की सतह से निकलने वाले कंपनों को ग्रहण करता है। इसके साथ ही वह सपेरे की हिलती बीन को देखकर उस पर नजर रखता है और अपने आपको उससे बचाने के लिए हिलता रहता है जिसे लोग सांपों को नृत्य करना मान लेते हैं।
Published on:
14 Feb 2018 01:42 pm
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