
छठ पूजा कथा
ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार प्रथम मनु स्वायम्भुव के पुत्र राजा प्रियव्रत को कोई संतान नहीं थी। इससे वे दुःखी रहते थे। यह जानकर महर्षि कश्यप ने राजा को यज्ञ करने की सलाह दी। महर्षि की सलाह पर राजा ने यज्ञ किया। इसके बाद महारानी मालिनी ने एक पुत्र को जन्म दिया लेकिन दुर्भाग्य से वह शिशु मृत पैदा हुआ। इस बात ने राजा और परिजनों को और भी दुखी कर दिया। इस बीच आकाश से एक विमान उतरा, जिसमें षष्ठी माता विराजमान थीं। इस समय राजा ने माता से परिचय देने की प्रार्थना की, तब उन्होंने कहा कि मैं ब्रह्मा की मानस पुत्री षष्ठी देवी हूं। मैं विश्व के सभी बालकों की रक्षा करती हूं और निःसंतानों को संतान प्राप्ति का वरदान देती हूं।
इसके बाद देवी ने मृत शिशु को आशीष देते हुए हाथ लगाया, जिससे वह जीवित हो गया। देवी की इस कृपा से राजा बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने षष्ठी देवी की आराधना की। ऐसी मान्यता है कि इसके बाद ही धीरे-धीरे हर ओर इस पूजा का प्रसार हो गया।
छठ पूजा का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
छठ पूजा धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था का लोकपर्व है। इसमें प्रत्यक्ष देवता सूर्य देव का पूजन कर उन्हें अर्घ्य दिया जाता है। वैज्ञानिक आधार पर देखें तो सूर्य के प्रकाश में कई रोगों को नष्ट करने की क्षमता पाई जाती है। इसके शुभ प्रभाव से व्यक्ति को आरोग्य, तेज और आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है। वहीं वैदिक ज्योतिष के अनुसार सूर्य को आत्मा, पिता, पूर्वज, मान-सम्मान और उच्च सरकारी सेवा का कारक माना जाता है। वहीं यह भी मान्यता है कि छठ पूजा पर सूर्य देव और छठी माता के पूजन से व्यक्ति को संतान, सुख और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
Updated on:
17 Nov 2023 04:23 pm
Published on:
17 Nov 2023 04:21 pm
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