
पुराणों में बताए स्वस्थ जीवन के मंत्र
क्या होता है हाइजीन
हाइजीन का मतलब व्यक्तिगत स्वच्छता (Personal Hygiene In Hindi) है। इसके अनुसार व्यक्ति का अपने शरीर, कपड़ों और आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखना चाहिए। क्योंकि यदि इनमें से कोई भी एक चीज स्वच्छ नहीं है तो इससे जीवाणुओं या विषाणुओं के शरीर में प्रवेश को आमंत्रण दे सकता है। इसका उद्देश्य मनुष्य को शारीरिक रूप से स्वस्थ रखना होता है।
पद्म पुराण और सुश्रुत संहिता में कहा गया है कि हमें हमेशा अपने हाथ, पैर और मुंह को धोने के बाद ही भोजन करना चाहिए। क्योंकि जीवाणु और कीटाणु के शरीर में प्रवेश करने का सबसे सरल माध्यम मुंह ही होता है। यदि हम भोजन से पहले अपने हाथ, पैर मुंह नहीं धोएंगे तो भोजन के समय जीवाणु हमारे हाथ, भोजन के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर सकते हैं और हमारा शरीर अस्वस्थ होगा।
धर्म सिंधु के अनुसार नमक, घी, तेल या कोई अन्य व्यंजन, पेय पदार्थ या खाने का कोई भी अन्य सामान बिना चम्मच के सीधे हाथ से परोसा जाए तो यह मनुष्य के खाने योग्य नहीं रह जाता है। इसलिए भोजन को हमेशा चम्मच या किसी अन्य चीज से ही परोसा जाना चाहिए। बना हुआ भोजन कभी भी सीधे हाथ से ना परोसा जाए क्योंकि नमक, घी या तेल, मानव त्वचा से संपर्क में आकर खाने को दूषित कर देता है। यदि यह भोजन आप करेंगे तो इससे संक्रमण आपके शरीर में फैलने की आशंका रहेगी।
प्राचीन ग्रंथों के अनुसार मनुष्य को एक बार पहने वस्त्रों को बिना धोए दोबारा नहीं पहनना चाहिए। आजकल कई लोग एक कपड़े को बिना धोए 2 से 3 बार पहनते हैं, लेकिन पुराणों में इसे गलत बताया गया है। इसमें कहा गया है कि यदि हम कोई कपड़ा पहनकर बाहर जाते हैं तो वह जीवाणु या विषाणु के संपर्क में आता है। रास्ते में धूल, मिट्टी और अन्य प्रदूषित कण भी कपड़ों से चिपक जाते हैं। इसलिए एक बार पहने कपड़ों को बिना धोए दोबारा न पहनें।
महाभारत के अनुसार किसी दूसरे के पहने कपड़े कभी नहीं पहनना चाहिए। क्योंकि यदि दूसरे व्यक्ति को कोई संक्रमण है या कोई ऐसी बीमारी है जिसके लक्षण अभी नहीं दिखाई दे रहे हैं तो उसके कपड़े पहनने से वह आपको भी हो सकती है। साथ ही दूसरों के धोए हुए कपड़ों से भी परहेज करना चाहिए वर्ना वह बीमारी आपको भी लगने का खतरा बना रहता है। इसलिए हमेशा अपने कपड़े ही पहनें।
वाधूलस्मृति के अनुसार बिना स्नान किए और बिना शुद्ध आचरण के किया कोई भी काम निष्फल हो जाता है। अतः हमें सभी काम स्नान करके और शुद्ध होकर ही करना चाहिए। जाड़ों में अक्सर देखने में आता है कि कई लोग कई दिनों तक स्नान नहीं करते हैं या अन्य दिनों में भी पहले काम करते हैं फिर दोपहर या शाम को स्नान करते हैं। कुछ विद्यार्थी या जॉब करने वाले देर से उठने के कारण बिना स्नान किए काम पर निकल जाते हैं। पुराणों में इसे खराब कहा गया है। मनुष्य को सबसे पहले स्नान करने के बाद ही दिन के बाकी काम करने चाहिए। हिंदू धर्म का मान्यताओं के अनुसार स्नान किया हुआ व्यक्ति बिना स्नान किए हुए व्यक्ति के चरण स्पर्श भी नहीं कर सकता है, क्योंकि इससे वह अशुद्ध हो जाता है। इसलिए हमेशा दिन में स्नान करने की आदत डालें।
वाधूलस्मृति और मनुस्मृति में टॉयलेट के समय हमेशा नाक, मुंह और सिर को ढंककर रखने और मौन रहने की सलाह दी गई है। इनमें कहा गया है कि शरीर से अपशिष्ट पदार्थों का त्याग करते समय संक्रमण का खतरा बहुत अधिक होता है। इसलिए उस समय हमें अपने मुहं के ज्यादातर अंगों को ढंककर रखना चाहिए। इसके बाद हमें अपने हाथों को अच्छे से धोना चाहिए।
मार्कण्डेय पुराण के अनुसार स्नान करने के बाद अपने शरीर को गीले कपड़े से नहीं पोंछना चाहिए वर्ना इससे त्वचा संक्रमण हो सकता है। इसमें कहा गया है कि किसी और का तौलिया इस्तेमाल करते हैं या स्वयं के ही गिले कपड़े या तौलिए से नहाने के बाद शरीर को पोछतें हैं तो यह गलत है। इससे आपको त्वचा का संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए नहाने के बाद किसी सूखे कपड़े (तौलिए) से ही अपने शरीर को पोछें।
विष्णु स्मृति के अनुसार यदि आप श्मशान से वापस आ रहे हैं या आपने उल्टी की है या फिर आप बाल कटवा कर या दाढ़ी बनवा कर आ रहे हैं तो घर में आने के बाद सबसे पहले स्नान करें वर्ना संक्रमण हो सकता है। इसके अनुसार ये तीनों चीजें ऐसी हैं जो संक्रमण के बड़े कारक हैं, श्मशान घाट में मृत व्यक्ति, उल्टी और बाल काटने वाले औजार सभी संक्रमण के घटक हैं। इसलिए घर आने के बाद स्नान जरूर करें। इससे आप खुद भी स्वस्थ रहेंगे और अपने घरवालों को भी स्वस्थ रखेंगे।
महाभारत और गोभिलगृह्यसूत्र के अनुसार हमें स्वस्थ रहने के लिए भूलकर भी गीले कपड़े नहीं पहनने चाहिए। क्योंकि गीले कपड़ों को पहनने से उस पर जीवाणु विषाणु के चिपकने का खतरा ज्यादा रहता है और कोई गंदगी लग जाए तो उसे साफ करना मुश्किल होता है है। साथ ही हमें सर्दी होने का भी खतरा रहता है। इसलिए हमेशा सूखे वस्त्रों को ही पहनना चाहिए।
मनुस्मृति के अनुसार हमें अंजुलि अर्थात हाथों से सीधे पानी नहीं पीना चाहिए। पानी को हमेशा किसी बर्तन या गिलास से डालकर पीएं। कई बार हम अपने दोनों हाथों को जोड़कर पानी को पी लेते हैं जो कि गलत है। पानी को पीने के लिए हमेशा किसी बर्तन का इस्तेमाल करें और उसमें डालकर ही पानी पीएं।
Updated on:
11 May 2024 06:56 pm
Published on:
11 May 2024 06:55 pm
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