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जब मां दुर्गा ने एक तिनके में फूंक दी थी जान और तोड़ डाला था देवताओं का घमंड

सृजन सभी देवी-देवताओं की शक्तियों को मिलाने से किया गया था ताकि महिषासुर का वध किया जा सकें।

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नई दिल्ली। वैसे तो देवी-देवताओं से जुड़े सभी तथ्य बहुत ही रोचक हैं यदि आप हिन्दू धर्म के बारे में अधिक जानकारी नहीं रखते तो शायद आपको यह सब समझ में ना आए। लेकिन अगर आपकी थोड़ी भी रुचि इसमें है तो एक बार देवी-देवताओं के बारे में जरूर जानें आपके ज्ञान में विस्तार होगा। इसी तरह एक रोचक कथा माता दुर्गा को लेकर है। एक बार देवताओं और दैत्यों में भयंकर युद्ध छिड़ गया। इस युद्ध में देवता विजयी हुए जिससे उनके मन में अहंकर ने जन्म ले लिया। सभी देवता खुद को श्रेष्ठ मानने लगे। इसी बीच जब माता दुर्गा ने देवताओं को इस प्रकार अहंकार से चूर होते हुए देखा तो वे तेजपुंज के रूप में देवताओं के सामने प्रकट हुई। तेजपुंज इतना विरत था कि उसे देखकर देवता अत्यंत घबरा गए।

इसके बाद तेजपुंज का रहस्य जानने के लिए देव इंद्र ने वायुदेव को उसके समीप भेजा। अहंकार से ग्रस्त वायुदेव तेजपुंज के समीप पहुंचे। तभी तेज ने उनसे उनका परिचय पूछा। वायुदेव ने कहा स्वयं को प्राणस्वरूप तथा अतिबलवान देव बताया। तब तेजस्वरूप माता ने वायुदेव के सामने एक तिनका रखा और कहा कि यदि तुम सचमुच इतने श्रेष्ठ हो तो इस तिनके को उड़ाकर दिखाओ मैं मां जाउंगी तुम सच में श्रेष्ठ हो। अपनी समस्त शक्ति लगाने के बाद भी वायुदेव उस तिनके को हिलाने में असमर्थ रहे।

इस घटने की बात उन्होंने वापस आकर इंद्र को बताई। तब इंद्र ने अग्निदेव को उस तिनके को भस्म करने के लिए भेजा लेकिन अग्निदेव भी असफल रहे। यह देखकर देव इंद्र का अभिमान चूर-चूर हो गया। उन्होंने उस तेजपुंज की उपासना की तब तेजपुंज से माता शक्ति का स्वरूप प्रकट हुआ। उन्होंने ही इंद्र को बताया कि मेरी ही कृपा से तुमने असुरों पर विजय प्राप्त की है। इस प्रकार झूठे अभिमान में चूर होकर तुम अपना पुण्य नष्ट करते हो। देवी के वचन सुनकर सभी देवताओं को अपनी गलती का आभास हुआ और सभी ने मिलकर देवी की उपासना की और क्षमा मांगी।

जैसा की आपको ज्ञात होगा देवी दुर्गा का सृजन सभी देवी-देवताओं की शक्तियों को मिलाने से ही संभव था ताकि महिषासुर का वध किया जा सकें। माता दुर्गा देवी का स्‍वरूप, उनका स्वरुप अत्यंत आकर्षक है, उनके मुख में सौम्‍यता और स्‍नेह झलकता है। उनके दस हाथ हैं, जिसमें हर एक में एक विशेष शस्‍त्र है। उन्हें हर भगवान और देवता ने कुछ ना कुछ भेंट अवश्‍य दी थी, क्रमानुसार भगवान शिव ने त्रिशुल, भगवान विष्‍णु ने चक्र, भगवान वायु ने तीर आदि इसी कारण दुर्गा माता का कोई सान्य नहीं है।