Miracle Of Neem Karoli Baba: भारत संत महात्माओं की धरती है, यहां एक से बढ़कर एक चमत्कारी सिद्ध संत और पवित्र आत्मा हुई हैं। ये भविष्य में होने वाली घटनाओं को पहले ही जान लेते थे। दिव्यदर्शी नीम करोली बाबा ने एक बार उत्तराखंड के कुमायूं क्षेत्र में प्रसिद्ध ऐसे ही सिद्ध संत टेलीफोन बाबा को भगवान से बात करने का आदेश दिया, लेकिन इसके बाद जो हुआ वह आपको हैरान कर देगा...
Miracle Of Neem Karoli Baba: नीम करोली बाबा चमत्कारिक संत थे, लेकिन वो इसको जाहिर नहीं होने देना चाहते थे। ऐसे ही रहस्यमयी सिद्ध संत थे टेलीफोन बाबा, जो लोगों में काफी मशहूर थे। लेकिन वो भी अपनी सिद्धि और शक्तियों को प्रकट नहीं होने देना चाहते थे। इसके लिए ये लीला करते थे। लेकिन कई बार इनकी भविष्यवाणियां सच साबित हुईं और कई बार इनके उपाय ने लोगों की जान बचाई है। आइये जानते हैं टेलीफोन बाबा से जुड़ी बाबा नीब करौरी महाराज की चमत्कारिक कहानी, जिसमें डॉक्टर की जान बची।
कौन थे टेलीफोन बाबा
रवि प्रकाश पांडे रजिदा ने द डिवाइन रियलिटी ऑफ श्री बाबा नीब करौरी जी महाराज में लिखा है कि कुमाऊं की पहाड़ियों में मोहन बाबा नाम के सिद्ध संत रहते थे। ये बच्चों जैसे मासूम और सरल थे। इनकी भविष्यवाणियां अक्सर सही होती थीं। किंवदंती है कि ये भगवान से टेलीफोन पर बात करते थे, इसी कारण लोग इन्हें टेलीफोन बाबा के नाम से जानते थे। किंवदंती के अनुसार ये जब भगवान से बात करते थे तब इनकी भावभंगिमा ठीक वैसी ही हुआ करती थी जैसी हमारी टेलीफोन पर बात करते हुए होती है। हालांकि दूसरे भारतीय संतों की तरह ही ये भी अपनी दिव्य शक्तियों को छिपाने के लिए लीला करते थे।
नीम करौली बाबा की लीला
रवि प्रकाश पांडे के अनुसार आगरा मेडिकल कॉलेज के गायनकालजिस्ट डॉ. नवल किशोर श्री बाबा नीब करौरी महाराज के भक्त थे। बाबा में उन्होंने नैनीताल के रामसे अस्पताल को जॉइन कर लिया। कुछ समय बाद डॉ. नवल किशोर बाबा नीम करौली से मिलने पहुंचे तो उन्होंने उनसे हनुमानगढ़ आकर पहाड़ी महिलाओं का इलाज करने के लिए कहा। इस पर डॉ. नवल किशोर सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक महिलाओं का इलाज करने लगे।
एक दिन नवल किशोर लोगों का इलाज करने नहीं पहुंचे, इस समय नीब करौरी बाबा भी नैनीताल में नहीं थे, लेकिन बाबा नीम करौली उसी दिन हनुमानगढ़ लौट आए। इन्होंने लोगों से डॉक्टर की गैरमौजूदगी का कारण पूछा। लेकिन कोई बता नहीं सका। उसी शाम को नीब करौरी बाबा किछ भक्तों के साथ घूमते हुए एम्पायर होटल के पास पहुंचे और रूक गए। साथ ही पूजा की डॉक्टर कहां रहते हैं। एक भक्त ने होटल की ओर इशारा किया।
इस पर बाबा ने एक व्यक्ति को डॉक्टर को बुलाने भीतर भेजा। इस पर डॉक्टर बाहर आए, डॉक्टर को देखते ही बाबा बोले-तुम बीमार हो। डॉक्टर ने कहा नहीं, इस पर बाबा ने फिर कहा कि तुम्हें सर्दी है? डॉक्टर ने उत्तर दिया बस यह एक सामान्य सर्दी है। इस पर बाबा ने एक डंडी ली और डॉक्टर को खुद को रामसे अस्पताल में भर्ती कराने के लिए कहा। डॉक्टर इसकी जरूरत नहीं समझ रहे थे। लेकिन नीब करौरी बाबा ने कुछ भक्तों के साथ उन्हें अस्पताल भेज दिया।
अस्पताल से लौटने के बाद भक्तों ने देखा कि नीम करौली बाबा केलाखान की ओर जा रहे हैं। बाबा ने भक्तों से कहा कि वह डॉक्टर नवल किशोर और उसके परिवार को लेकर चितित हैं। इसी बीच वह केलाखान की ढलान की ओर तब तक बढ़ते रहे, जब तक कि मोहन बाबा की कुटिया (टेलीफोन बाबा) तक नहीं पहुंच गए। मोहन बाबा भगवान विष्णु के भक्त थे। यहां महाराजजी ने मोहन बाबा को भगवान विष्णु को टेलीफोन कर डॉक्टर के बारे में बताने के लिए कहा।
इस पर मोहन बाबा ने फोन लगाने की भावभंगिमा बनाई। उन्होंने नारदजी को फोन लगाया था और उनसे कहा कि नीम करौली बाबा भगवान विष्णु से बात करना चाहते हैं। जैसे दूसरी ओर से नारदजी ने उत्तर दिया कि भगवान विष्णु देवी लक्ष्मी से बात कर रहे हैं, उनसे बात नहीं हो सकती। कुछ देर बाद महाराजजी ने मोहन बाबा से फिर से फोन लगाने के लिए कहा। इस बार नारदजी ने मोहन बाबा से जो कुछ भी कहा उसे मोहन बाबा स्पष्ट रूप से सुन नहीं पाए और अपने रहस्यमयी टेलीफोन पर चिल्लाते रहे।
इस बीच अचानक महाराजजी उठे और मोहन बाबा को बाल पकड़कर उठा लिया। फिर जमीन पर पटककर जोर से चिल्लाए। अब वह बच गया है, वह अब बच गया है, और लौट आए । उनके साथ गए दोनों भक्त भी नैनीताल लौट आए, यहां उन्हें डॉक्टर के स्वस्थ होने की खबर मिली।