16 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

इन महाराज का बचपन में परिवार छूटा, अब बनें लाखों भक्त, 92 की उम्र में भी कर रहें कड़ी तपस्या

शिष्यों के मुताबिक नारायणदास महाराज को माता-पिता छह वर्ष की उम्र में भगवानदास महाराज के पास छोड़ गए थे।

2 min read
Google source verification

image

Sunil Sharma

Jan 26, 2018

narayan das ji maharaj

narayan das ji maharaj

जिन्हें बचपन में परिवार ने बीमार हो जाने के बाद गुरु शरण में छोड़ दिया, वे अब वैराग्य धारण कर लाखों लोगों के पथ प्रदर्शक हैं। बाल्यावस्था में ही उन्होंने संन्यास ले लिया था। संभवत: पूरे सिंहस्थ में बाल ब्रह्मचारी महाराज नारायणदास सबसे ज्यादा उम्र के वैरागी हैं। उनके शिष्य उन्हें 92 वर्ष का बताते हैं, लेकिन उन्हें देख लगता है कि वे शतायु हो चुके हैं।

मंगलनाथ मंदिर के सामने पुराने पुल के पास उनके आश्रम में रोजाना हजारों लोग आशीर्वाद लेने पहुंच रहे हैं। वे श्रद्धालुओं को गौ रक्षा का संदेश देते हैं और भूखे का पेट भरना ही जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य समझते हैं।

रात-दिन गुरु सेवा
महाराज नारायणदास चिमनपुरा गांव के रहने वाले हैं। यह गांव त्रिवेणी धाम से लगभग दो किलोमीटर दूर है। शिष्यों के मुताबिक नारायणदास महाराज को माता-पिता छह वर्ष की उम्र में भगवानदास महाराज के पास छोड़ गए थे। नारायणदास गुरुजी की रात-दिन सेवा करते। उनसे शिक्षा-दीक्षा ली और समाज सेवा में लग गए। नारायणदासजी हमेशा सीता-राम जपते रहते हैं।

जनता का पैसा जनता को अर्पित
नारायणदास महाराज कहते हैं कि जनता का पैसा जनता की सेवा में लगाना ही हमारा उद्देश्य है। इसी उद्देश्य के साथ सिंहस्थ में आने वालों के लिए दोनों समय भोजन की व्यवस्था की गई है। यहां रोज 15 हजार से भी ज्यादा लोग भोजन प्रसादी ग्रहण कर रहे हैं। बाबा के शिष्य बगैर किसी भेदभाव के लोगों को प्रेम से भोजन करवाते हैं।

शिक्षित-स्वस्थ हों
महाराज नारायणदास चाहते हैं कि लोग शिक्षित और स्वस्थ हों, इसलिए वे जयपुर स्थित अजमेर रोड पर महाराज रामानंदाचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय और बाबा भगवानदास बीबीडी पीजी कॉलेज, कृषि कॉलेज और गल्र्स कॉलेज संचालित करते हैं। इनमें देशभर के छात्र शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

सरहद पार नहीं जाना
महाराज के विदेशी भक्त भी हैं, जो उनसे आशीर्वाद लेने पहुंचे हैं। उनके कई बार आग्रह के बाद भी महाराज अपने देश की सीमाएं पार करना नहीं चाहते हैं। यही उनका प्रण भी है। देश के सभी प्रमुख स्थलों पर बाबा का आश्रम है और वे सभी को देश प्रेम का संदेश भी देते हैं।