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हिंदू मुसलमानों की पवित्र जगह, जहां किया जाता है घडिय़ों का चढ़ावा..

एक ऐसे पीर की मजार है जिनकी लंबाई 9 गज थी और इसी कारण यहां पर जो मजार बनाई गई है उसकी लंबाई भी 9 गज है।

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नई दिल्ली। हमारे देश में कई मंदिर और मस्जिद देखने को मिलते है क्योंकि यहां हर धर्म के लोग मिलजुल कर रहते हैं। हर धार्मिक स्थल किसी न किसी खास वजह से प्रसिद्ध हैं। एक ऐसी ही जगह है पंजाब हरियाणा बॉर्डर पर स्थित नौगजा पीर जो अपने हिन्दू और मुसलमान भक्तों के द्वारा चढ़ाए जाने वाले अनोखे चढ़ावे के लिए प्रसिद्ध हैं. इस मजार पर आने वाले भक्त चादर और फूल नहीं बल्कि यहां लोग घड़ी चढ़ाते हैं। लोगों का मानना है कि घड़ी चढ़ाने से पीर बाबा उनकी मनो कामनाओं को पूरा करते हैं। पंजाब-हरियाणा बॉर्डर पर स्थित शाहबाद कस्बे से सात किलोमीटर दूर हाईवे नंबर 1 पर पड़ती है नौगजा पीर की मजार. यहां के लोगों का कहना है कि यह एक ऐसे पीर की मजार है जिनकी लंबाई 9 गज थी और इसी कारण यहां पर जो मजार बनाई गई है उसकी लंबाई भी 9 गज है।

नौगजा पीर शाहबाद में 500 ईसा पूर्व में रहते थे। यह मजार दो कारणों से मशहूर है एक तो ये मजार हिंदू और मुसलमानों का प्रतीक माना जाता है क्योंकि यहां दोनो ही धर्मों के लोग आते है। यहां पर मुस्लिम संत का मजार भी है और भगवान शिव का मंदिर भी है। दूसरी वजह से यह है कि यहां पर जो भी आता है वो मजार में घड़ी का ही चढ़ावा करता है। मजार में कतारों में घडियां देखने को मिलती हैं।

घडिय़ों को चढ़ाने की परंपरा कब और क्यों शुरू हुई इसके बारे में कोई कुछ नहीं जानता लेकिन फिर भी यहां के स्थानीय लोग कहते हैं कि अक्सर हाइवे पर जो भी चालक गाड़ी चलाते हैं उन्हें अक्सर यहीं चिंता रहती है कि वह सुरक्षित अपने गंतव्य पर पहुंच जाएं। कोई दुर्घटना का सामना ना करना पड़े। इसी के चलते वो इस मजार पर घडिय़ा चढ़ाते हैं और बाबा से यहीं दुआ मांगते हैं कि वो सुरक्षित और समय से अपने निर्धारित स्थान पर पहुंच जाएं। इस मजार की देखभाल रेडक्रॉस करता है और तो और यहां पा जो भी घड़ी चढ़ाई जाती है उसे रेडक्रॉस वाले बंच भी देते है। इससे जो भी पैसे मिलते है उससे मजार की देख-रेख किया जाता है और जो लोग यहां साफ सफाई करते है उन्हें वेतन भी दिया जाता है। यह मजार वाकई में अपने आप में अनूठा है।