एक मंत्र जो है श्रीकृष्ण लीला का सार, इसका पाठ करने से मिलता है संपूर्ण भागवत का आशीर्वाद

जानें एक मंत्र की भागवत और रामायण...

गीता में श्रीकृष्ण ने कर्म को सबसे महत्वपूर्ण बताया है, ऐसे में कृष्ण लीला को जानने के लिए हमारी ओर से कई प्रयास किए जाते है। जहां एक ओर श्रीकृष्णलीला का पाठ जानकारों के अनुसार हमें मुक्ति का मार्ग बताता है, वहीं ये पाठ हमारे अंदर सही या उचित कार्य करने की प्रेरणा भी देता है। इस पाठ के संबंध में मान्यता है कि यह आत्मविश्वास बढ़ने के साथ ही नकारात्मकता दूर करता है।

श्रीकृष्ण की लीलाओं को जानने के लिए भागवत पुराण में एक श्लोक ऐसा भी है, जिसके संबंध में पंडित सुनील शर्मा के अनुसार मान्यता है कि इसका पाठ संपूर्ण भागवत का फल देता है।

भागवत का पाठ करने से पुण्य मिलता है और पाप का नाश होता है, लेकिन वर्तमान समय में संपूर्ण भागवत पढ़ने का समय शायद ही किसी के पास हो। ऐसे में एक मंत्र का रोज विधि-विधान से जप करने से संपूर्ण भागवत पढ़ने का फल मिलता है। इस मंत्र को एक श्लोकी भागवत भी कहते हैं।

ये है एक श्लोकी श्रीकृष्ण लीला

आदौ देवकिदेवगर्भजननं गोपीगृहे वधर्नम्
मायापुतनजीवितापहरणं गोवधर्नोद्धारणम् |
कंसच्छेदनकौरवादिहननं कुन्तीतनूजावनम्
एतद्भागवतं पुराणकथितं श्रीकृष्णलीलामृतम् ||

ये है जाप विधि...
: सुबह जल्दी नहाकर, साफ वस्त्र पहनकर भगवान श्रीकृष्ण के चित्र का विधिवत पूजन करें।
: भगवान श्रीकृष्ण के चित्र के सामने आसन लगाकर रुद्राक्ष की माला लेकर इस मंत्र का जप करें। प्रतिदिन पांच माला जप करने से उत्तम फल मिलता है।
: आसन कुश का हो तो अच्छा रहता है।
: एक ही समय, आसन व माला हो तो यह मंत्र जल्दी ही सिद्ध हो जाता है।

एक श्लोक वाली रामायण...
वहीं दूसरी ओर रामायण में श्रीराम और रावण के माध्यम से बताया गया कि हमें धर्म के अनुसार ही कर्म करना चाहिए। अधर्म करने वाले लोगों का पतन हो जाता है। पंडित शर्मा के अनुसार जो हर रोज रामायण का पाठ करता है तो उसका आत्मविश्वास बढ़ता है और नकारात्मकता दूर होती है। रामायण काफी बड़ी होने के कारण इसका रोज पाठ कर पाना बहुत मुश्किल है। ऐसी स्थिति में कम समय होने पर एक श्लोक वाली रामायण का जाप किया जा सकता है।


ये है एक श्लोकी रामायण

आदौ राम तपोवनादि गमनं, हत्वा मृगं कांचनम्।

वैदीहीहरणं जटायुमरणं, सुग्रीवसंभाषणम्।।

बालीनिर्दलनं समुद्रतरणं, लंकापुरीदाहनम्।

पश्चाद् रावण कुम्भकर्ण हननम्, एतद्धि रामायणम्।।

अर्थ - श्रीराम वनवास गए, वहां स्वर्ण मृग का वध किया। वैदेही यानी सीताजी का रावण ने हरण कर लिया, रावण के हाथों जटायु मारा गया। श्रीराम और सुग्रीव की मित्रता हुई। बालि का वध किया। समुद्र पार किया। लंकापुरी का दहन किया। इसके बाद रावण और कुंभकर्ण का वध किया। ये रामायण की संक्षिप्त कहानी है।

जाप की विधि...
इस एक श्लोकी रामायण के मंत्र का जाप रोज सुबह करना चाहिए। इसके तहत सुबह जल्दी उठें और स्नान के बाद घर के मंदिर में पूजा करें। इसके बाद भगवान के सामने आसन पर बैठकर बोलना चाहिए। मंत्र जाप कम से कम 108 बार करें। ज्यादा समय न हो तो 11 या 21 बार भी मंत्र जाप कर सकते हैं। इस मंत्र के जाप से सभी पाप खत्म होते हैं और जीवन की परेशानियों से लड़ने शक्ति मिल सकती है।

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दीपेश तिवारी
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