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Pradosh Vrat 2023: ये हैं प्रदोष के अचूक उपाय, घर में आती है सुख समृद्धि, धन की नहीं होती कमी

Budh Pradosh Upay: बुधवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत को बुध प्रदोष के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि बुध प्रदोष के दिन भगवान शंकर माता पार्वती के साथ गणपति की पूजा विशेष शुभ फलदायक होती है। इस दिन कुछ खास उपाय सारे दोष और कष्ट मिटा देते हैं और घर में सुख-शांति आती है। ये आसान उपाय रुके हुए काम पूरे करा देते हैं।

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Pravin Pandey

Sep 27, 2023

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बुध प्रदोष व्रत

कब है बुध प्रदोष व्रत
पंचांग के अनुसार अश्विन कृष्ण त्रयोदशी यानी प्रदोष बुधवार 11 अक्टूबर 2023 को है। इस तिथि की शुरुआत 11 अक्टूबर शाम 5.37 बजे हो रही है और यह तिथि 12 अक्टूबर रात 7.53 बजे संपन्न होगी। प्रदोष काल में त्रयोदशी पूजा का समय शाम 5.59 बजे से रात 8.26 बजे तक है यानी पूजा के लिए 2 घंटे 27 मिनट का समय रहेगा।

प्रदोष व्रत शुभ योग
प्रदोष व्रत के दिन दो शुभ योग शुक्ल और शुभ बन रहे हैं। इन योगों में शुरू किया गया, हर कार्य पूरा होता है। यहां जानिए दोनों शुभ योगों का समय..


शुभ योगः सुबह 08:42 बजे तक
शुक्ल योगः 12 अक्टूबर सुबह 9.30 बजे तक


बुध प्रदोष उपाय (Budh Pradosh Upay)
1. वाराणसी के पुरोहित पं. शिवम तिवारी के अनुसार बुध प्रदोष व्रत के दिन पूरे घर में गंगा जल का छिड़काव करना चाहिए। मान्यता है कि प्रदोष व्रत के दिन घर में गंगाजल छिड़कने से सुख-शांति और समृद्धि आती है। इससे नकारात्मक ऊर्जा भी दूर होती है।
2. बुध प्रदोष व्रत के दिन घर में एक छोटा त्रिशूल खरीदकर लाना शुभ फलदायक माना जाता है। मान्यता है कि इससे घर के सदस्यों पर महादेव की कृपा बनी रहती है।
3. बुध प्रदोष के दिन शिवलिंग पर 108 बेलपत्र अर्पित करने भगवान शिव का आशीर्वाद मिलता है और काम में आ रहीं बाधाएं दूर हो जाती हैं।


4. बुध प्रदोष के दिन शिव मंदिर में जाकर घी के के दीये जलाना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस उपाय से व्यापार में लाभ की संभावना बढ़ जाती है।
5. प्रदोष व्रत के दिन लोटे में पानी लेकर इसमें एक चुटकी काले तिल डालें और थोड़ी सी चीनी मिला लें। अब इससे भोले बाबा का अभिषेक करें। इस दौरान महामृत्युंजय मंत्र का जाप भी करते रहें तो बीमारियों से छुटकारा मिलेगा।


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बुध प्रदोष पूजा विधि
1. प्रदोष व्रत के दिन सुबह जल्दी उठें और स्नान ध्यान कर व्रत का संकल्प लें।
2. भगवान विनायक, शिव पार्वती और अन्य देवी देवताओं की पूजा करें।
3. भोलेनाथ को धतूरा, बेलपत्र, फल फूल मिठाई अर्पित करें।


4. ऊं नमः शिवाय मंत्र का जाप करें, शिव चालीसा पढ़ें।
5. सभी की आरती करें, फल का प्रसाद बांटे और खुद ग्रहण करें।
6. शाम को प्रदोषकाल में फिर पूजा करें।