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पुरी Jagannath Temple की ‘यम शिला’ का रहस्य, इस सीढ़ी पर पैर रखने से क्यों बचते हैं भक्त

Secrets Of Jagannath Temple: पुरी के जगन्नाथ मंदिर की 22 पवित्र सीढ़ियों में मौजूद ‘यम शिला’ को लेकर अनोखी मान्यता प्रचलित है। जानिए क्यों श्रद्धालु इस सीढ़ी पर पैर रखने से बचते हैं और क्या है इससे जुड़ी पौराणिक कथा।

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भारत

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MEGHA ROY

May 20, 2026

Jagannath Temple

Jagannath Temple Yam Shila Secrets| Gemini

Secrets Of Jagannath Temple: ओडिशा के पुरी स्थित Jagannath Temple की 22 पवित्र सीढ़ियां, जिन्हें ‘बैसी पहाचा’ कहा जाता है, धार्मिक मान्यताओं और रहस्यों से जुड़ी मानी जाती हैं। इन सीढ़ियों में नीचे से तीसरी सीढ़ी को ‘यम शिला’ कहा जाता है। मान्यता है कि इसका संबंध स्वयं यमराज से है और मंदिर से लौटते समय श्रद्धालु आज भी इस सीढ़ी पर पैर रखने से बचते हैं। इसके पीछे एक बेहद रोचक पौराणिक कथा प्रचलित है।

Jagannath Temple की बैसी पहाचा का रहस्य

जगन्नाथ मंदिर में प्रवेश करने से पहले श्रद्धालुओं को 22 सीढ़ियां पार करनी पड़ती हैं। इन्हें ओड़िया भाषा में “बैसी पहाचा” कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इन सीढ़ियों का संबंध मानव जीवन के 22 दोषों और उनसे मुक्ति से माना जाता है।

इन्हीं सीढ़ियों में नीचे से तीसरी सीढ़ी को “यम शिला” कहा जाता है। मान्यता है कि मृत्यु के देवता यमराज ने भगवान जगन्नाथ से कहा था कि आपके दर्शन मात्र से ही लोगों को मोक्ष मिल जाता है, जिससे यमलोक सूना होने लगा है। तब भगवान जगन्नाथ ने यमराज को इस तीसरी सीढ़ी पर स्थान दिया।

कहा जाता है कि भगवान ने वरदान दिया कि जो भी भक्त दर्शन के बाद लौटते समय इस सीढ़ी पर पैर रखेगा, उसे यमलोक अवश्य जाना पड़ेगा। यही कारण है कि आज भी श्रद्धालु मंदिर से बाहर निकलते समय इस सीढ़ी को लांघकर पार करते हैं और उस पर पैर रखने से बचते हैं। अगर जो भी भक्त दर्शन के बाद लौटते समय इस सीढ़ी पर पैर रखेगा, उसे यमलोक अवश्य जाना पड़ेगा।

अधूरी मूर्तियों का रहस्य भी है खास

जगन्नाथ मंदिर की एक और अनोखी मान्यता यहां स्थापित भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की अधूरी मूर्तियों से जुड़ी है। कथा के अनुसार राजा इंद्रद्युम्न को समुद्र किनारे एक दिव्य लकड़ी मिली थी। भगवान विष्णु ने विश्वकर्मा के रूप में मूर्तियां बनाने का कार्य शुरू किया, लेकिन शर्त रखी कि निर्माण के दौरान कोई दरवाजा नहीं खोलेगा।

कई दिनों तक कमरे से आवाज आती रही, लेकिन रानी की उत्सुकता के कारण दरवाजा खोल दिया गया। जैसे ही द्वार खुला, विश्वकर्मा अदृश्य हो गए और मूर्तियां अधूरी अवस्था में रह गईं। तभी से इन्हीं अधूरी मूर्तियों की पूजा की जाती है और यही जगन्नाथ संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषताओं में गिनी जाती है।

आस्था और रहस्य का अद्भुत संगम

पुरी का जगन्नाथ मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और रहस्यमयी मान्यताओं का जीवंत प्रतीक है। यहां की हर कथा श्रद्धालुओं को आस्था से जोड़ती है और मंदिर को और भी दिव्य बनाती है। पुरी का जगन्नाथ मंदिर हिंदू धर्म के चार प्रमुख धामों में शामिल है। हर साल यहां लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर की परंपराएं, रथ यात्रा और रहस्यमयी मान्यताएं इसे दुनियाभर में खास बनाती हैं।