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Purushottam Maas Mystery: जब भगवान विष्णु ने दिया ‘मलमास’ को नया नाम, जानें क्यों है ये समय सबसे खास

Purushottam Maas 2026: पंचांग के अनुसार, साल 2026 में मलमास की शुरुआत 17 मई 2026 से हो रही है। इस अवधि में लोग पूजा-पाठ, व्रत और दान-पुण्य पर विशेष ध्यान देते हैं, क्योंकि इसे आध्यात्मिक रूप से बेहद शक्तिशाली समय माना जाता है।

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भारत

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MEGHA ROY

Apr 16, 2026

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Purushottam Maas Mystery: पुरुषोत्तम मास 2026 एक बेहद खास और आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण समय माना जा रहा है, जो 17 मई से शुरू होकर 15 जून तक चलेगा। इस अवधि को अधिक मास या मलमास भी कहा जाता है, जिसमें भक्ति, साधना और दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह समय मांगलिक कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं होता, इसलिए विवाह या गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्यों से परहेज किया जाता है। खास बात यह है कि मलमास के कारण साल 2026 में हिंदू कैलेंडर में 13 महीने होंगे, जो इसे दुर्लभ बनाता है। इस पूरे समय को आत्मचिंतन, पूजा-पाठ और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने के लिए सबसे उत्तम माना जाता है।

मलमास से पुरुषोत्तम मास बनने की कथा (Why It Is Called Purushottam Maas)

हिंदू धर्म में अधिक मास, जिसे मलमास भी कहा जाता है, एक विशेष समय माना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, इस अतिरिक्त महीने को कोई भी देवता स्वीकार नहीं कर रहा था, जिससे यह उपेक्षित और अशुभ समझा जाने लगा। तब यह मास भगवान विष्णु की शरण में गया। भगवान विष्णु ने करुणा दिखाते हुए इसे अपना नाम “पुरुषोत्तम” प्रदान किया और इसे भक्ति, साधना और पुण्य अर्जित करने का सर्वोत्तम समय घोषित किया। तभी से यह मलमास “पुरुषोत्तम मास” के रूप में पूजनीय बन गया।

Malmas 2026: मलमास 2026 क्यों है विशेष?

साल 2026 में मलमास 17 मई से 15 जून तक रहेगा। इस वर्ष की खास बात यह है कि हिंदू पंचांग में 12 की बजाय 13 महीने होंगे, जो एक दुर्लभ संयोग है। ज्योतिषीय दृष्टि से भी यह समय अत्यंत प्रभावशाली माना जा रहा है। ग्रहों की स्थिति ऐसी बनती है कि यह महीना साधना और आध्यात्मिक उन्नति के लिए अनुकूल हो जाता है। यह समय व्यक्ति को जीवन की भागदौड़ से हटकर खुद से जुड़ने और आत्मचिंतन करने का अवसर देता है।

क्यों नहीं होते शुभ कार्य?

मलमास के दौरान विवाह, गृह प्रवेश या अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। इसका कारण यह है कि इस समय को सांसारिक सुखों से अधिक आध्यात्मिक साधना के लिए समर्पित माना गया है। यह एक तरह से आत्मशुद्धि और मन की स्थिरता प्राप्त करने का काल होता है, जहां व्यक्ति भक्ति में लीन होकर अपने कर्मों को सुधार सकता है।

मलमास में क्या करें?

इस पूरे महीने में भगवान विष्णु की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। प्रतिदिन स्नान कर पूजा करना, गीता का पाठ, विष्णु सहस्रनाम का जाप और तुलसी की सेवा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके साथ ही व्रत, ध्यान और जप करने से मन को शांति मिलती है। दान-पुण्य का भी इस मास में विशेष महत्व है। गरीबों की सहायता, अन्न दान और जरूरतमंदों की सेवा करने से कई गुना पुण्य प्राप्त होता है।