साल 2020: नवसंवत्सर प्रमादी के ग्रह संयोगों से जुड़ा है इस साल बारिश का गणित

नवसंवत्सर 2077 प्रमादी में वर्षा को लेकर ये हैं संकेत..

अंग्रेजी साल 2020 के 25 मार्च, बुधवार से नवसंवत्सर यानि हिंदू वर्ष 2077 शुरु हुआ। जिसका नाम प्रमादी है, ज्योतिष के अनुसार इस नवसंवत्सर के राजा बुध और चंद्र देव मंत्री हैं। वहीं इस वर्ष में लगातार सामने आ रहीं समस्याओं को लेकर ज्योतिष के जानकार सुनील शर्मा ने कोरोना और सूर्य ग्रहण से इतर एक बार फिर आगाह किया है।

पंडित सुनील शर्मा का कहना है कि हिंदूस्तान यानि भारत और यहां की जनता के लिए यह साल मिलाजुला सिद्ध होगा। ऐसे में इस संवत्सर में फसलों की पैदावार तो अच्छी होगी, लेकिन समाज में प्रमाद की भी अधिकता रहने के साथ ही सांप्रदायिकतावाद बढ़ सकता है।

इसके साथ ही समाज में कहीं ना कहीं अविश्वास और अस्थिरता का माहौल भी इस दौरान पैदा हो सकता है। लेकिन इसके साथ ही ये नवसंवत्सर देश के लिए कुछ सुखद समाचार भी ला सकता है, इसका कारण यह है कि इस साल दसाधिकारियों में सूर्य, चंद्र, बुध, बृहस्पति और शनि का प्रभाव अधिक रहेगा।

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ग्रहों का असर...
वायरस जनित बीमारी कोरोना को तो इस समय हर कोई देख ही रहा है, ऐसे में अभी करीब 2020 का आधा वर्ष और बचा है, इसे लेकर पंडित शर्मा का कहना है अभी और कई चीजें देखनी बाकि हैं, जिसके अनुसार भारी वर्षा के अलावा राजनीतिक हालात संतोषजनक नहीं रहने की संभावना है।

: पं. शर्मा के अनुसार सांवर्त नामक मेघ बादलों का स्वामी है। वहीं नवसंवत्सर 2077 में ग्रहों के राजा सूर्यदेव के पास सबसे अधिक तीन अधिकार हैं। इनमें वर्षा के स्वामी, पुष्पों- फलों के स्वामी और सेनापति का भी अधिकार सूर्यदेव के पास ही है।

इसमें वर्षा के स्वामी सूर्य देव के होने के परिणाम स्वरूप संभावना है कि भारतवर्ष में औसतन वर्षा अच्छी, जबकि कई जिलों में अत्यधिक होगी। वहीं कुछ राज्यों में कम वर्षा की भी संभावना है। ऐसे में ग्रहों की दशा व दिशा के अनुसार जलवायु के असंतुलन से कुछ क्षेत्रों में परेशानी हो सकती है।

अत्यधिक वर्षा का मुख्य प्रभाव राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली व उसके आसपास के क्षेत्रों के अलावा, मध्यप्रदेश,आंध्रा व कर्नाटक के कुछ जिलों के अलावा राजस्थान के कुछ हिस्सों में होने की संभावना है।

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: शनि: नए संवत में रसों के स्वामी शनि हैं। ऐसे में जो दिख रहा है उसके अनुसार इस साल जलस्तर घटने और वर्षा के जल का संचय नहीं हो पाने के संकेत और चतुष्पदों में रोगादि वृद्धि के भी योग बनता दिख रहा है। मंत्री चंद्रमा के मित्र ग्रह शनि है। इससे रस पदार्थों में उन्नति होगी लेकिन संक्रामक बीमारियों का जोखिम भी बना रहेगा।

: नवसंवत्सर प्रमादी के मंत्री चन्द्र देव हैं। चंद्र के कारण शीर्ष नेतृत्व अपने मंत्रियों से बड़ी ही कठोरता से काम लेगा, मुमकिन है इस दौरान मंत्रियों को अवकाश भी न मिले। बुध और सूर्य की युति के कारण शासन सत्ता से जनहित में ठोस निर्णय किए जाएंगे।

राजनीतिक क्षेत्र में शनि की दृष्टि होने से राजनीतिक दलों में सामंजस्य की कमी रहेगी। इस वर्ष के सेनापति का अधिकार भी ग्रहों के राजा सूर्य देव के पास है। जिसके चलते शीर्ष नेतृत्व कठोर निर्णय लेने से पीछे नहीं रहेंगे और उसका पालन करवाने में पूरी शक्ति लगा देंगे।

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: वहीं इस नवसंवत्सर के कोषाध्यक्ष का अधिकार बुध के पास होना सरकारों को हो रहे राजस्व घाटे में भी कमी की संभावना दर्शाता है। लेकिन विदेशी मुद्रा भण्डार में भी बढ़ोत्तरी के संकेत हैं।

: सूर्य देव को शोध ओर अन्य आविष्कारों कर भी ग्रह माना जाता है। ऐसे में माना जा रहा है कि नवसंवत्सर में ग्रहों की स्थिति के प्रभाव स्वरूप इस वर्ष अतिसंहारक परमाणु अस्त्रों व मिसाइलों का निर्माण और परीक्षण भी होगा। संसार में बड़े देश इसे प्रतियोगिता के रूप में देखेंगे और नित्य प्रति कुछ न कुछ नया निर्माण करते रहेंगे।

इनके लिए शुभ की संभावना...
इस बार प्रमादी नामक नवसंवत्सर के राजा बुध होने के कारण पूरे वर्ष बुधदेव का आधिपत्‍य रहेगा। वहीं बुध चूंकि कन्‍या राशि के स्‍वामी हैं, जो कि महिलाओं के प्रभाव को दर्शाती है। ऐसे में इस बार बुधदेव की कृपा महिलाओं पर विशेष रूप से रहने की संभावना है। जिसके चलते महिलाएं विभिन्न क्षेत्रों में सफलता प्राप्त करेंगी।

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दीपेश तिवारी
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