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Rohini Vrat April 2023: अप्रैल में इस दिन पड़ेगा मासिक रोहिणी व्रत, साथी की लंबी आयु के लिए रखा जाता है व्रत

रोहिणी व्रत (Rohini Vrat April 2023) जैन समुदाय का प्रमुख व्रत है। प्रायः यह हर महीने में एक बार पड़ता है, वैसाख महीने में यह व्रत किस दिन पड़ेगा और रोहिणी व्रत के नियम क्या (Rohini Vrat Ke Niyam) हैं, जानने के लिए पढ़ें यह रिपोर्ट।

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Pravin Pandey

Mar 31, 2023

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rohini vrat april

वैसाख में इस दिन है रोहिणी व्रतः रोहिणी व्रत जैन समुदाय का प्रमुख व्रत है। हालांकि हिंदू समुदाय के लोग भी इस व्रत को रखते हैं। यह व्रत भगवान वासुपूज्य और रोहिणी माता को समर्पित है। इस अवसर पर रोहिणी देवी के साथ भगवान वासु पूज्य की पूजा की जाती है। यह व्रत हर महीने उस वक्त रखा जाता है जब सूर्योदय के बाद रोहिणी नक्षत्र प्रबल होता है। वैसाख महीने में यह 23 अप्रैल को पड़ रहा है।


यह व्रत मुख्य रूप से महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए रखती हैं। मान्यता है कि इस व्रत को रखने से महिला के जीवन साथी को लंबी आयु के साथ अच्छा स्वास्थ्य प्राप्त होता है। वैसे यह व्रत पुरुष भी रखते हैं। इसी के साथ यह भी मान्यता है कि यह व्रत कर्म विकार को दूर कर कर्म बंधन से छुटकारा दिलाता है।

रोहिणी व्रत का महत्वः यह व्रत महिलाएं पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख शांति के लिए रखती हैं। मान्यता है कि यह उपवास विशेष फलदायी है, और उपवास से व्यक्ति को सभी दुखों से छुटकारा मिलता है। जैन समुदाय रोहिणी यह व्रत माता रोहिणी और भगवान वासुपूज्य का आशीर्वाद पाने के लिए रखता है। यह व्रत जैन समुदाय उत्सव के रूप में मनाता है, कई पुरुष भी इस व्रत को रखते हैं।

मान्यता है कि इस व्रत को रखने से सुख और धन धान्य की प्राप्ति होती है। इसके लिए सुबह स्नान ध्यान के बाद भगवान वासुपूज्य की पांच रत्न, ताम्र या स्वर्ण प्रतिमा स्थापित कर पूजा की जाती है। इस दिन गरीबों को दान देने का विशेष महत्व माना जाता है।

ये भी पढ़ेंः Rohini Vrat: रोहिणी व्रत की पूरी कथा, जानिये कैसे मिली दुर्गंधा को मुक्ति

रोहिणी व्रत के नियमः धार्मिक ग्रंथों में रोहिणी व्रत रखने के लिए यह नियम बताए गए हैं।


1. सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान ध्यान करें, व्रत का संकल्प लें। (क्योंकि उद्यापन की अवधि तय करने के बाद ही यह व्रत शुरू किया जाता है। इसलिए दृढ़ निश्चय के बाद ही व्रत शुरू करना चाहिए)
2. भगवान वासुपूज्य की पंच रत्न, ताम्र या स्वर्ण प्रतिमा स्थापित करें।
3. प्रतिमा की पूजा कर पूरे दिन भगवान वासुपूज्य की आराधना करें।


4. पूजा के बाद नैवेद्य, वस्त्र, पुष्प अर्पित करें, फल मिठाई का भोग लगाएं।
5. मन में ईर्ष्या द्वेष जैसे कुविचारों को आने न दें।

उद्यापन का यह है नियमः रोहिणी व्रत को नियमित तीन, पांच या सात साल तक करने के बाद ही इसका उद्यापन किया जाता है। लेकिन व्रत की सबसे सही अवधि पांच साल मानी गई है, जिन लोगों के लिए तीन या पांच साल यह व्रत रखना संभव नहीं है, उनके लिए पांच माह का समय तय किया गया है। जैन परिवार की महिलाओं के लिए इस व्रत का पालन समाज में अति आवश्यक माना जाता है। इस दिन घर के ऐसे व्यक्ति जो व्रत नहीं रख रहे हैं, उन्हें भी सात्विक भोजन ही करना चाहिए।