3 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Shardiya Navratri 2025: नवरात्रि में कन्या पूजन का महत्व ,कैसे होती है देवी मां और नवग्रहों की कृपा? जानिए क्यों माना जाता है पुण्यदायी

Shardiya Navratri 2025: रात्रि की अष्टमी के दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। यह न केवल एक धार्मिक कर्तव्य है, बल्कि जीवन में संतुलन और नवग्रहों की कृपा प्रदान करने वाला एक पवित्र साधन भी है। इस लेख में जानिए कन्या पूजन से जुड़ी कुछ अहम बातें। (Kanya Puja Kab Hai)

2 min read
Google source verification

भारत

image

MEGHA ROY

Sep 26, 2025

Kanya Pujan 2025 importance, relation of Kanya Pujan ,Navratri 2025

Navratri 2025 Kanya Pujan significance|फोटो सोर्स – Grok

Shardiya Navratri 2025 Kanya Puja: नवरात्रि के पावन दिनों में माता दुर्गा की साधना और उपासना विशेष फलदायी मानी जाती है। इनमें से अष्टमी और नवमी तिथि को कन्या पूजन का खास महत्व होता है। मान्यता है कि इस दिन छोटी-छोटी कन्याओं में स्वयं देवी मां का स्वरूप विद्यमान होता है। उन्हें सम्मानपूर्वक भोजन कराने और पूजन करने से घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।

कन्या पूजन का महत्व (Kanya Pujan 2025 importance)

कन्या पूजन केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं है, बल्कि यह करुणा, सेवा और भक्ति का प्रतीक भी है। जब हम कन्याओं का आदर करते हैं, तो जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सद्भाव का संचार होता है। हर कन्या में माता दुर्गा का दिव्य अंश माना गया है, इसलिए उनका पूजन करने से सौभाग्य और मंगल की प्राप्ति होती है।

धार्मिक मान्यता यह भी है कि कन्या पूजन से न केवल देवी मां प्रसन्न होती हैं, बल्कि हमारे नवग्रह भी संतुलित होते हैं। यही कारण है कि इसे नवरात्रि का सबसे पुण्यदायी अनुष्ठान कहा गया है।

नवग्रह और कन्या पूजन का संबंध

कन्या पूजन में बनाए जाने वाले प्रसाद और अर्पित की जाने वाली वस्तुएं सीधे-सीधे ग्रहों से जुड़ी होती हैं।

  • पूरी – गुरु (बृहस्पति) का प्रतीक
  • आटे का हलवा – सूर्य का प्रतीक
  • काले चने – शनि का प्रतीक
  • कन्याओं के चरण धोने का जल – चंद्रमा का प्रतीक
  • मौली बांधना – मंगल का प्रतीक
  • जौ देना – राहु का प्रतीक
  • चूड़ियां पहनाना – बुध का प्रतीक
  • बिंदी और दक्षिणा देना – शुक्र का प्रतीक
  • कन्याओं के चरण स्पर्श करना – केतु का प्रतीक

कन्या पूजन कब करें?

अष्टमी तिथि – अधिकतर लोग इस दिन कन्याओं को भोजन कराते हैं और इसे माता की कृपा प्राप्ति के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।

  • ब्रह्म मुहूर्त का समय: सुबह 5 बजे से लेकर 6 बजकर 12 मिनट तक रहेगा।
  • कन्या पूजन मुहूर्त: सुबह 10 बजकर 40 मिनट से दोपहर 12 बजकर 15 मिनट तक रहेगा।

नवमी तिथि – कई स्थानों पर नवमी को भी कन्या पूजन की परंपरा है। यह नवरात्रि साधना का अंतिम चरण होता है और इस दिन कन्या पूजन से साधना पूर्ण मानी जाती है।