6 नवंबर 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

लक्ष्मी अष्टकम्ः इंद्र ने इसी से मां को किया था प्रसन्न, नियमित पाठ से हर काम में मिलती है कामयाबी!

Lakshmi ko prasann kaise kare: श्री महालक्ष्म्यष्टकम् पद्म पुराण का एक अत्यंत प्रभावशाली स्तोत्र है, जिसकी रचना इंद्र देव ने की थी। इसके प्रतिदिन पाठ से दरिद्रता दूर होती है, शत्रुओं का नाश होता है और साधक को धन, धान्य व समाज में उच्च सम्मान प्राप्त होता है। यह देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने का सबसे सरल और अचूक मार्ग है।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

भारत

•

image

Adarsh Thakur

•

Updated: 2 Jan 2026, 6:13 PM IST

Lakshi Ashtakam Path Hindi Lyrics and Benifits

Lakshi Ashtakam Path Hindi Lyrics and Benifits: लक्ष्मी अष्टकम् हिंदी में, लाभ सहित यहां पढ़ें। (फोटोः एआई)

Mahalakshmyashtakam lyrics in Hindi: पद्म पुराण में वर्णित श्री महालक्ष्म्यष्टकम् केवल एक स्तोत्र नहीं, बल्कि साक्षात् ऐश्वर्य की कुंजी माना जाता है। मान्यता है कि, जब देवराज इंद्र का वैभव छीन गया था, तब उन्होंने देवी महालक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए इन आठ श्लोकों को लिखा था। यह स्तुति न केवल मन को शांति प्रदान करती है, बल्कि साधक के जीवन से दरिद्रता का समूल नाश कर उसे सुख-समृद्धि से परिपूर्ण कर देती है। यहां पढ़ें, लक्ष्मी अष्टकम् और इसके लाभ।

श्री महालक्ष्म्यष्टकम् के पाठ से होने वाले 7 चमत्कारी लाभ

इस स्तोत्र की महिमा स्वयं इसके अंतिम श्लोकों में वर्णित है। नियमित पाठ करने से भक्त को कई लाभ मिलते हैं।

  1. सर्व सिद्धि की प्राप्ति: जीवन के हर कार्य में सिद्धि और सफलता प्राप्त होती है।
  2. राजयोग और सम्मान: 'राज्यं प्राप्नोति सर्वदा'—अर्थात् इसके नियमित पाठ से व्यक्ति को समाज में उच्च पद, मान-प्रतिष्ठा और राजसी सुख मिलते हैं।
  3. महापापों का नाश: यदि दिन में एक बार (एककाल) इसका पाठ किया जाए, तो अनजाने में हुए बड़े से बड़े पापों के नाश होने की मान्यता है।
  4. धन-धान्य से परिपूर्ण जीवन: दिन में दो बार (द्विकाल) पाठ करने वाला व्यक्ति कभी धन की कमी नहीं झेलता। उसका घर सदैव अन्न और धन से भरा रहता है।
  5. शत्रुओं पर विजय: जो व्यक्ति दिन में तीन बार (त्रिकाल) इसका पाठ करता है, उसके प्रबल शत्रु भी शांत हो जाते हैं और विरोधी रास्ते से हट जाते हैं।
  6. दुखों और भय से मुक्ति: देवी महालक्ष्मी 'सर्व दुःख हरे' हैं। इस स्तोत्र का गान करने से मानसिक क्लेश, भय और शारीरिक कष्टों से मुक्ति मिलती है।
  7. स्थायी लक्ष्मी का वास: इस स्तोत्र के प्रभाव से महालक्ष्मी भक्त पर सदैव प्रसन्न रहती हैं और उसके घर में स्थायी रूप से निवास करती हैं, जिससे सुख-शांति, धन-वैभव बना रहता है।

श्री महालक्ष्म्यष्टकम् इंद्र देव द्वारा रचित माता महालक्ष्मी की भक्तिपूर्ण स्तुति है, जिसे पद्म पुराण से लिया गया है।

महालक्ष्मी अष्टकम् हिंदी में | Mahalakshmi Ashtakam in Hindi

श्री शुभ ॥ श्री लाभ ॥ श्री गणेशाय नमः॥

नमस्तेस्तू महामाये श्रीपिठे सूरपुजिते ।
शंख चक्र गदा हस्ते महालक्ष्मी नमोस्तूते ॥१॥

नमस्ते गरूडारूढे कोलासूर भयंकरी ।
सर्व पाप हरे देवी महालक्ष्मी नमोस्तूते ॥२॥
सर्वज्ञे सर्ववरदे सर्वदुष्ट भयंकरी ।
सर्व दुःख हरे देवी महालक्ष्मी नमोस्तूते ॥३॥

सिद्धीबुद्धूीप्रदे देवी भुक्तिमुक्ति प्रदायिनी ।
मंत्रमूर्ते सदा देवी महालक्ष्मी नमोस्तूते ॥ ४ ॥
आद्यंतरहिते देवी आद्यशक्ती महेश्वरी ।
योगजे योगसंभूते महालक्ष्मी नमोस्तूते ॥ ५ ॥

स्थूल सूक्ष्म महारौद्रे महाशक्ती महोदरे ।
महापाप हरे देवी महालक्ष्मी नमोस्तूते ॥ ६ ॥
पद्मासनस्थिते देवी परब्रम्हस्वरूपिणी ।
परमेशि जगन्मातर्र महालक्ष्मी नमोस्तूते ॥७॥

श्वेतांबरधरे देवी नानालंकार भूषिते ।
जगत्स्थिते जगन्मार्त महालक्ष्मी नमोस्तूते ॥८॥
महालक्ष्म्यष्टकस्तोत्रं यः पठेत् भक्तिमान्नरः ।
सर्वसिद्धीमवाप्नोति राज्यं प्राप्नोति सर्वदा ॥९॥

एककाले पठेन्नित्यं महापापविनाशनं ।
द्विकालं यः पठेन्नित्यं धनधान्य समन्वितः ॥१०॥
त्रिकालं यः पठेन्नित्यं महाशत्रूविनाशनं ।
महालक्ष्मीर्भवेन्नित्यं प्रसन्ना वरदा शुभा ॥११॥

॥ इतिंद्रकृत श्रीमहालक्ष्म्यष्टकस्तवः संपूर्णः ॥

---

Frequently Asked Questions