2 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Sita Navami Upay: अच्छे जीवन साथी के लिए करें जानकी स्त्रोत का पाठ, इस उपाय से विवाह की अड़चन होगी दूर

सीता नवमी के उपाय (Sita Navami Upay for love marriage ) गृहस्थ जीवन की समस्याओं से छुटकारा दिला सकते हैं। इसलिए आपके जीवन में कोई समस्या है तो एक बार इन आसान उपायों को जरूर अपनाना चाहिए।

2 min read
Google source verification

image

Pravin Pandey

Apr 29, 2023

sita_navami_upay.gif

sita navami upay

सीता नवमी के उपाय (Sita Navami Upay 2023)

1. सीता नवमी के दिन शुभ मुहूर्त में माता सीता को सोलह श्रृंगार की सामग्री अर्पित करने और श्रीजानकी रामाभ्यां नमः मंत्र का 108 बार जाप करने से सुहाग पर संकट नहीं आता और पति को लंबी उम्र का आशीर्वाद मिलता है।
2. माता सीता, लक्ष्मीजी का अवतार हैं, इसलिए इस दिन खीर का भोग लगाना चाहिए। फिर इसे सात कन्याओं में बांट दें, ये उपाय आर्थिक तंगी को दूर कर देंगे।
3. प्रेम विवाह की इच्छा रखने वाले युवाओं को सीता नवमी व्रत रखना चाहिए। साथ ही सीताजी के साथ भगवान राम की पूजा करनी चाहिए। इसके साथ ही अच्छे जीवन साथी की प्राप्ति के लिए इस दिन जानकी स्त्रोत का पाठ करना चाहिए।


4. विवाह में देरी हो रही है तो सीता नवमी के दिन हल्दी की पांच गांठ लें और इसे पीले कपड़े में बांध दें, और मन में सुयोग्य पति की कामना लेकर उसे माता सीता के चरणों में अर्पित कर दें। इससे जल्द विवाह के योग बनेंगे।
5. माता सीता को प्रेम त्याग और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि सीता नवमी पर सीता चालीसा का पाठ करने से वैवाहिक जीवन में आ रहीं समस्याएं हल हो जाती हैं।
6. सीता नवमी व्रत रखने से व्यक्ति को धन ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। महिलाओं को लंबा वैवाहिक जीवन प्राप्त होता है, संतान की कामना पूरी होती है।

ये भी पढ़ेंः Janaki Jayanti 2023: जानकी जयंती व्रत से मिलता है अखंड सौभाग्यवती होने का वरदान, महिलाओं में आता है धैर्य

सीता माता की आरती (Sita Mata Aarti)


आरती श्रीजनक दुलारी की, सीताजी रघुबर प्यारी की।
जगत जननी जगकी विस्तारिणी, नित्य सत्य साकेत विहारिणी।।
परम दयामयी दीनोद्धारिणी, मैया भक्तन हितकारी की।
आरती श्रीजनक दुलारी की।।

सतीशिरोमणि पति हितकारिणी, पति सेवा हित वन-वन चारिणी।
पति हित पति वियोग स्वीकारिणी, त्याग धर्म मूरति धारी की।।
आरती श्रीजनक-दुलारी की।

विमल कीर्ति सब लोकन छाई, नाम लेत पावन मति आई।
सुमिरत कटत कष्ट दुखदायी, शरणागत जन भय हारी की।।
आरती श्री जनक दुलारी की, सीताजी रघुबर प्यारी की।।