कोरोना वायरस को लेकर ज्योतिष से सामने आई ये खास बात, जानकर आप भी रह जाएंगे हैरान

शून्य, 20 व चार के अंक में उलझी कोरोना की गुत्थी...

इन दिनों जहां पूरे विश्व में कोरोना की दहशत पसरी हुई है, वहीं भारत में भी इसे लेकर लॉकडाउन बना हुआ है। ऐसे में कोरोना को लेकर जहां कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं, जबकि कोरोना वायरस जिन हालातों में पनपा और फैला, उसका अंकशास्‍त्र और ज्‍योतिष के पास पर्याप्‍त कारण है।

मसलन, जब भी किसी वर्ष, दशक या शताब्‍दी के अंत में शून्‍य की संख्‍या आई, दुनिया में किसी महामारी को सहा है। फिलहाल यदि हम ज्योतिषियों की मानें तो 13 अप्रैल को सूर्य के अपनी उच्च राशि मेष में प्रवेश करने के साथ ही स्थितियां सुधार आना शुरू होगा, जिसके बाद कोरोना का खात्मा शुरू हो जाएगा।

महारोग का उल्‍लेख...
वहीं जानकारों की मानें तो नारद संहिता में एक श्लोक में इस युग में एक बड़े महारोग के बारे हजारों साल पहले लिखा गया था, कि सूर्य ग्रहण के पश्चात् पूर्वी देश से एक महारोग आएगा। ऐसे में अब तक जो सूचनाएं सामने आईं हैं उनके अनुसार भी 26 दिसंबर, 2019 को सूर्य ग्रहण लगते ही ,चीन के वुहान से इस महारोग की यात्रा आरंभ हो गई थी।

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ज्योतिषीय गणना और उसके रोचक तथ्य...
कोरोना को लेकर ज्‍योतिष गणना यह तक बताती है कि कोरोना आगामी समय में कब और कैसे समाप्‍त होगा। फिलहाल तो कोरोना वायरस पूरी दुनिया पर कहर बनकर टूट पड़ा है, जिसके चलते रोज मृतकों और संक्रमितों की संख्‍या लगातार बढ़ती ही जा रही है। वहीं इसे लेकर अंकशास्‍त्र और ज्‍योतिष की अपनी दृष्टि है।

अंक ज्योतिष के जानकार वीडी श्रीवास्तव के अनुसार अंक ज्योतिष में महामारियों को लेकर उल्लेख प्रायः होता रहा है, परंतु अंक ज्योतिष को कई बार गंभीरता से नहीं लिया गया। श्रीवास्तव का कहना है कि जब भी किसी शताब्दी के अंत में शून्य, जीरो आया है, उसी कालखंड में कोई न कोई महामारी आई है जिसने पूरे विश्व में जनता को अपना ग्रास बनाया है।

बताया जाता है कि इतिहास में भी जब कभी शनि मकर राशि के हुए हैं तो उस काल में भी चेचक, हैजा जैसी बीमारियां हजारों लोगों की मौत का कारण बन चुकी हैं।

शताब्दी के अंत में शून्य: ऐसे समझें..
ईसा पूर्व की शताब्दियों में भी 1520 से लिखित रिकार्ड के आधार पर अफ्रीकी गुलामों के कारण यूरोप में चेचक और प्लेग के कारण काफी लोग मरे थे। वहीं इसके बाद 1620 में भी इसी तरह का जानलेवा संक्रमण फैला और मानव जीवन को नुक्सान पहुंचा।

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यहां तक कि 1620 में केवल इटली में ही 17 लाख लोग प्लेग से मरे और उत्तरी अफ्रीका में 50000 लोग मारे गए। बुबानिक प्लेग ने भी फ्रांस में लगभग 100,000 लोगों की जान ली, फिर 1820 में थाईलैंड, इंडोनेशिया और फिलीपींस में हैजा फैल गया।

वहीं 1920 में ,स्पेनिश फलू जिसे इन्फलूएंजा कहा गया, फैल गया, और अब 2020 में चीन के वुहान से आई ,कोरोना नामक महामारी का दोगुना प्रभाव हो गया, जिससे विश्व के 150 से अधिक देश इसकी चपेट में आ गए हैं। अंक ज्योतिष के जानकार श्रीवास्तव के अनुसार यहां यह देखने में आया है कि जब भी किसी साल में 0 शून्य आया है, उस साल कोई न कोई प्लेग, हैजा, कुष्ठ रोग, तपेदिक, चेचक, फलू, एड्स, हैपीटाइटिस जैसा कोई न कोई वायरस विश्व में छाया है। वहीं 20 का अंक तकरीबन हर सदी में घातक परिणाम देकर गया।

अंक 4 और राहु...
अंकशास्त्र के अनुसार भी 2022 का अंक राहु का 4 है। कोरोना का पहला मरीज 4 दिसंबर, 2019 अर्थात 4 अंक वाली डेट को मिला। अब 4 महीने समाप्त होने यानी चौथे महीने के बाद ही इस महामारी से कुछ राहत मिलेगी, जबकि इससे पूरी तरह तो तकरीबन 01 जुलाई के बाद ही छुटकारा होगा। 4 का अंक चीन के वुहान क्षेत्र से दुनियाभर में फैल रहे कोरोना वायरस के संबंध में कहा जा रहा है।

साल 2020 का योग 4 आता है जो राहु का प्रतीक है। इस वर्ष प्रौद्योगिकी में विकास के साथ साथ संक्रमण से कैसे बचा जा सकता था। राहु ग्रह, त्वचा रोगों, खुजली, , जहर फैलाना, , क्रानिक बीमारियां, महामारी, इत्यादि का कारक होता है। वहीं इसके बाद परंतु 2022 राहु का साल होने से, फिर किसी ऐसी और आपदा से इंकार नहीं किया जा सकता है।

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ऐसे जन्‍मा विषैला वायरस...
वहीं ज्योतिष शास्त्र के जानकार एम लोहानी के अनुसार इस पूरे घटनाक्रम में गुरु ग्रह की भूमिका को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पांच नवंबर 2019 को जैसे ही गुरु और केतु धनु राशि में आए, पूरे विश्वमें एक विषैले वायरस का जन्म हो गया।

इसके बाद 26 दिसंबर के ग्रहण ने इस आग में घी डालने का काम किया। वहीं 30 मार्च को बृहस्पति गुरु ग्रह अपनी स्वयं की राशि से केतु का साथ छोड़कर मकर राशि में प्रवेश कर जाने के कारण इसका प्रभाव बढ़ा।

ज्योतिष के अनुसार केतु नसों का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि बृहस्पति ग्रह लीवर, पैनक्रियाज ग्रांथी का प्रतिनिधित्व करते हैं। वहीं चंद्र ग्रह श्वास और फेफड़े का प्रतिनिधित्व करते हैं। अब एक बार फिर गुरु 29 जुलाई को पुनः धनु में आ जाएंगे। ऐसे में माना जा सकता है कि कोरोना का कहर पहली जुलाई को तकरीबन समाप्त हो जाएगा।

आर्द्रा नक्षत्र : ऐसे फैला और ऐसे होगा कम...
ज्योतिष के जानकारों के अनुसार जब से राहु ने आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश किया है, तभी से कोरोना वायरस का इस दुनिया में संक्रमण फैला है। राहु का गोचर मिथुन राशि व आर्द्रा नक्षत्र में चल रहा है। मिथुन राशि वायु तत्व राशि होती है और आर्द्रा का अर्थ भी नमी होता है। राहु वायरस है।

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ऐसे में इसका विस्तार वायु व नमी में ही बहुत तेजी से होता है। इसलिए राहु को मिथुन राशि व आर्द्रा नक्षत्र में सबसे ज्यादा बलशाली भी माना जाता है। जहां तक इसके प्रभाव का संबंध में तो ज्योतिष के अनुसार आद्रा नक्षत्र के मध्य में इसका ज्यादा प्रभाव रहेगा और नक्षत्र के अंतिम चरणों में इसका प्रभाव भी कम हो जाएगा। यानि इसका असर 14 अप्रैल से कम होना शुरू हो जाएगा।

राहु 20 मई तक आर्द्रा नक्षत्र में...
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक राहु इस समय आर्द्रा नक्षत्र में है, जो प्रलय का नक्षत्र माना जा रहा है। 20 मई तक वह इसी आर्द्रा नक्षत्र में रहेगा। 20 मई तक बृहस्पति उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में रहेगा, जो परेशानी कम करेगा। इस वजह से वायरस के असर में कमी आएगी। 14 अप्रैल को सूर्य के मेष राशि में प्रवेश से राहत ज्यादा बढ़ेगी।


मंगल की दृष्टि: दे सकती है राहत
ज्योतिषीय गणनाओं मे माना जा रहा है कि राहु और केतु की दृष्टि से गुरु, चंद्र, शुभ ग्रहों का अलग होने के कारण कोरोना वायरस का प्रभाव कम होता जाएगा। 14 अप्रैल को सूर्य ग्रह अपनी उच्च राशि मेष में प्रवेश करेंगे जो एक माह अपनी उच्च मेष राशि में रहेंगे।

वहीं मेष राशि का स्वामी मंगल होता है, मंगल यानि भूमि जमीन, सूर्य यानि आग, यह जब पूरी दृष्टि पृथ्वी पर डालेंगे तो पूर्ण प्रभाव से कोरोना वायरस का अंत होना शुरू हो जाएगा। ऐसे में ज्योतिषीय अनुमान के अनुसार 15 मई तक 50 प्रतिशत इस वायरस को खत्म होने में सफलता मिलने की संभावना है। जबकि 29 जून को करीब 96 प्रतिशत समाप्त हो जाएगा।

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इन राशियों के जातक रखे खास सतर्कता...
ज्योतिष के जानकारों के दौरान राशि में ग्रहों के स्वामी व अन्य ग्रहों की चाल के चलते कुछ राशि वालों को इन दिनों खास ध्यान रखना होगा। इस दौरान जिन राशि वालों को विशेष रूप से सतर्कता बरतने की आवश्यकता है, उनमें सबसे प्रमुख हैं वृषभ, मिथुन, कर्क, कन्या और वृश्चिक राशियों जातक, जिन्हें बड़ी सावधानी और सतर्कता की जरूरत है।


13 अप्रैल के बाद बदल सकते हैं हालात
भारतीय ज्योतिष में वायरस का कारक राहु और शनि को माना जाता है। इन्हीं के प्रकोप के कारण कोरोना महामारी फैली है। शनि के स्वराशि मकर में होने के कारण इस महामारी का प्रभाव निरंतर बढ़ रहा है। हालांकि, सूर्य जब मेष राशि में प्रवेश करेंगे, तब कोरोना का अंत भी संभव हो पाएगा।

ज्योतिष के अनुसार, सूर्य 13 अप्रैल 2020 को मेष राशि में प्रवेश करेंगे। वर्तमान में राहु उच्च राशि मिथुन में गोचर कर रहे हैं। इसे कालपुरुष की कुंडली में मुंह, नाक, कान, गले का कारक माना जाता है। राहु लग्नस्थ और साथ ही शुक्र षष्टेश होकर शनि के साथ तृतीयस्थ हैं। अर्थात तृतीय भाव से श्वांस नली, दमा, खांसी, फेफड़े, श्वांस संबंधी रोग हो रहे हैं। चूंकि वायरस हवा के माध्यम से फैल रहा है और आक्सीजन का कारण चंद्र हैं।


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दीपेश तिवारी
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