
नई दिल्ली।मंदिर या फिर किसी भी आराधना या फिर पूजा स्थल का आध्यात्म से जोड़ा जाता है और इनका विज्ञान की दुनिया से कोई लेना या देना नहीं है लेकिन हमारे देश में एक ऐसा मंदिर है जहां विज्ञान और आध्यात्म का बहुत ही अनोखा मेलबंधन है। हम बात कर रहे हैं सूरत के पलसाणा के एना गांव में स्थित ऋण मुक्तेश्वर महादेव मंदिर के बारे में जहां विज्ञान और धर्म का बेहद अद्भभुत संगम है।
यहां मंदिर में बने 18 फीट शिवलिंग के नीचे एक कलश में करीब 4 करोड़, 55 लाख का 7 टन पारा रखा गया है। इस कलश से एक पाइप शिवलिंग के ऊपरी भाग तक लाई गई है जिससे मंदिर में ओम का उच्चारण करने पर जो प्रतिध्वनि होती है उससे पारे में कंपन होती, जिससे भक्तों में ऊर्जा का संचार होता है।
ये मंदिर सौ साल पुराना है और अभी एक साल पहले इसी गांव के ही एक एनआरआई ने लगभग सात करोड़ रूपए की लागत से इस मंदिर का पुर्ननिर्माण करवाया। बता दें कि इस संपूर्ण शिवलिंग का दर्शन एक कांच के दरवाजे से भक्तों को कराया जाता है।
बता दे कि इस 18 फीट शिवलिंग का वज़न 60 टन है और 1008 छोटे-छोटे शिवलिंग इस मुख्य शिंवलिंग पर लगे हुए है। मंदिर के दर्शन के लिए हर साल 15 से अधिक देशों में बसे इस गांव के एनआरआई आते हैं। इस 18 फीट लंबे शिवलिंग को ग्रेनाइट से बनाया गया है और इन ग्रेनाइट पत्थरों को बेंगलुरू के खदानों से लाया गया है। इस शिव के चार हिस्सों में से तीन अंडरगाउंड है। इस शिवलिंग का दूसरा हिस्सा षठकोण के आकार का है और इसे विष्णु भगवान का प्रतीक माना जाता है।
शिवलिंग का तीसरा चौकोर हिस्सा भगवान ब्रह्मा का प्रतीक है। चौथे भाग में 7 टन पारे से भरे कलश को रखा गया है और इसी कलश से कॉपर की पाइप शिवलिंग के ऊपरी हिस्से तक लगे हुए है और इसी पाइप के माध्यम से ओम उच्चारण पारे तक पहुंचती है। विज्ञान और आध्यात्म का ऐसा अनोखा बंधन शायद ही इसके अलावा और कहीं देखने को मिलें।
Published on:
14 Feb 2018 01:56 pm
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