
sun transit taurus vrishbh sankranti puja
वृषभ संक्रांतिः पंचांग के अनुसार सूर्य का वृषभ राशि में गोचर (Sun transit) सोमवार 15 मई को हो रहा है। यहां से सूर्य देव पांच जून 2023 शाम 6.07 बजे मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे।
वृषभ संक्रांति यानी ग्रहों के राजा और व्यक्ति की आत्मा माने जाने वाले सूर्य का वृषभ राशि में गोचर इस साल बेहद शुभफलदायक है। वृषभ भगवान शिव के वाहन नंदी का प्रतीक है, इसलिए इस राशि में व्यक्ति की आत्मा यानी सूर्य का गोचर महत्वपूर्ण होता है। इस राशि में भगवान विष्णु की पूजा करने से मनुष्य खुशहाल और समृद्ध जीवन प्राप्त करता है। साथ ही मृत्यु के बाद मोक्ष प्राप्त करता है।
मकर संक्रांति के समान होता है पुण्य फल, ऐसा होगा मौसम पर असर (vrishabh sankranti weather)
वृषभ संक्रांति के दौरान सूर्य देव रोहिणी नक्षत्र में आते हैं, और 15 दिन तक रहते हैं। इसके शुरुआती 9 दिन भीषण गर्मी पड़ती है, जिसे नौतपा कहते हैं। इस दिन सूर्य पूजा कुंडली में सूर्य को मजबूत करता है। साथ ही इस दिन पूजा, जप, तप दान पुण्य मकर संक्रांति के समान ही अमोघ फल देने वाला है। इस दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देने से सूर्य देव की कृपा बनी रहती है। सूर्य देव की पूजा से सूर्य ग्रह संबंधी दोष भी दूर होते हैं। यशकीर्ति और वैभव की प्राप्ति होती है। इसलिए इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और अन्नदान, जलदान करना चाहिए।
14 तरह के दान का महत्व, टल जाएगा बुरा समय
मान्यता है कि इस दिन पूजा पाठ और दान का वही महत्व होता है, जो अक्षय तृतीया पर अपनी कमाई का कुछ अंश दान से होता है। वृषभ संक्रांति के दिन 14 तरह के दान का विशेष महत्व होता है, ये गौदान, भूमि, तिल, सोना, वस्त्र, गुड़, चांदी, नमक, शहद, मटकी, देसी घी, खरबूजा, कन्यादान आदि। यदि व्यक्ति ऐसा नहीं कर पाता तो उसे वृषभ संक्रांति के दिन रस और मौसम में उपयोगी खाद्य सामग्री का दान किया जाता है। इससे बुरा समय टल जाता है।
वृषभ संक्रांति से राष्ट्रों के बीच सुधरेंगे संबंध
जानकारों की मानें तो वृषभ संक्रांति 2023 शुभ फलदायक है। वृषभ संक्रांति खासतौर पर विद्वान और शिक्षित लोगों के लिए शुभफलदायक है। इसके प्रभाव से वस्तुओं की लागत सामान्य रहेगी। लोगों को स्वास्थ्य लाभ होगा, राष्ट्रों के बीच संबंध मधुर होंगे, अनाज के भंडारण में वृद्धि होगी। हालांकि इसके चलते भय और चिंता भी बनी रहेगी।
यहां पढ़िए वृषभ संक्रांति का पुण्यकाल
वृषभ राशि का पुण्यकाल 6.04 एएम से 11.58 एएम तक है, जबकि महापुण्यकाल 9.47 एएम से 11.58 एएम तक है। इस अवधि में गंगा स्नान कर सूर्य को अर्घ्य देने, उनकी और भगवान विष्णु की पूजा के साथ दान पुण्य का बड़ा महत्व होता है। इस दिन पूजा पाठ से अमोघ फल की प्राप्ति होती है।
वृषभ संक्रांति उपाय (Vrishabh Sankranti Upay)
1. वृषभ संक्रांति के दिन व्यक्ति को जमीन पर सोना चाहिए।
2. इस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
3. वृषभ संक्रांति के दिन जरूरतमंदों को दान करें।
4. वृषभ संक्रांति के दिन भगवान सूर्य, विष्णु और शिव की पूजा करें।
5. पितरों की आत्मा की शांति के लिए करें तर्पण।
6. वृषभ संक्रांति के दिन गौदान महाकल्याणकारी होता है।
7. इस महीने प्यासों को पानी पिलाना और भोजन कराना सबसे अधिक शुभफलदायक होता है। घर के बाहर प्याऊ लगवाने से यज्ञ के समतुल्य फल मिलता है।
वृषभ संक्रांति पूजा विधि (Vrishabh Sankranti Puja Vidhi)
1. सुबह जल्दी उठकर घर की साफ-सफाई करें और आसपास की पवित्र नदी-सरोवर में स्नान करें।
2. सूर्य देव के मंत्रों का उच्चारण करते हुए अर्घ्य दें।
3. पितरों का तर्पण कर, भगवान विष्णु और शिव की पूजा करें।
4. दिनभर व्रत रखें, शाम को आरती के बाद फलाहार करें।
कुबेर ऐसे बने धनवान
मान्यता है कि वृषभ संक्रांति के दिन ही कुबेरजी ने माता लक्ष्मी से धन के लिए प्रार्थना की थी। इससे प्रसन्न होकर माता लक्ष्मी ने उन्हें धन और सुख समृद्धि से भर दिया था। इसलिए इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से हर तरह की सुख संपदा की प्राप्ति होती है।
Updated on:
13 May 2023 05:36 pm
Published on:
09 May 2023 01:16 pm
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