
नई दिल्ली। हिंदू धर्म में अकसर हमें धर्म-कर्म की बातें बताई जाती है। यहीं कहा जाता है कि जैसा कर्म करोगे उसी के हिसाब से आपको अगले जन्म की प्राप्ति होगी। शात्रों में पुनर्जन्म से संबंधित कई सारी बातें बताई गई है।गीता में कहा गया है कि शरीर नश्वर होता है लेकिन आत्मा अमर रहती है।
इंसान जैसे पुराने कपड़ों को त्यागकर नए कपड़े धारण करती है वैसे ही आत्मा पुराने,जीर्ण शरीर को त्यागकर नए शरीर में प्रवेश करती है और आत्मा को ये शरीर उसके जीवितकाल में किए गए कर्म के अनुसार प्राप्त होता हैं। हम अपने पिछले जन्म में क्या थे इसके बारे में हम लाख एकाग्रचित्त होकर सोंचे तब भी हमें याद नहीं आएगी लेकिन शास्त्रों में कुछ ऐसी बातें बताई गई है जिसके माध्यम से हम ये जान सकते हैं कि पिछले जन्म में हमारी पहचान क्या थी? आइए हम आपको कुछ ऐसी बातों का वर्णन करते हैं जिसके माध्यम से आप ये जान सकते हैं कि आप पिछले जन्म में क्या थे?
यदि किसी के कुंडली के ग्यारहवे भाव में सूर्य , पांचवे भाव में गुरु तथा बारहवें में शुक्र हो, तो वो इस बात का अर्थ है कि व्यक्ति पूर्वजन्म में धार्मिक प्रवृत्ति का और लोगों की मदद करने वाला हो सकता है। इसके साथ ही यदि किसी जातक के लग्न में उच्च राशि का चंद्रमा हो तो ऐसा व्यक्ति पूर्वजन्म में एक अच्छा व्यापारी रह चुका होगा।
जातक के जन्मकुंडली में यदि सूर्य छठे, आठवें या बारहवें भाव में हो या जातक तुला राशि का हो तो वो पूर्वजन्म में भ्रष्ट जीवन व्यतीत करना वाला हो सकता है।
जन्मकुंडली में यदि कहीं भी उच्च का गुरु होकर लग्न को देख रहा हो तो व्यक्ति पूर्वजन्म में धार्मिक प्रवृत्ति का, सदाचारी या फिर साधु या तपस्वी रहा होगा। चार या इससे अधिक ग्रह जन्म कुंडली में नीच राशि के हों तो जातक की मौत पूर्वजन्म में आत्महत्या से हुई होगी।
कोई अपने पिछले जन्म में चरम सुखों की प्राप्ति की है इस बात का पता भी हमें जातक के कुंडली से ही ज्ञात हो सकता है, यदि किसी जातक के लग्र या फिर सप्तम भाव में शुक्र हो तो व्यक्ति अपने पिछले जन्म में राजा या फिर कोई धनी व्यक्ति रहा होगा।
Published on:
28 Feb 2018 04:31 pm
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