
नई दिल्ली। जिंदगी का सच ये है कि जिसका जन्म हुआ है, उसे एक दिन इस दुनिया को छोड़कर जाना भी है। संसार की सबसे बड़ी सच्चाई मौत ही है। ये मृत्यु एक ऐसी पहेली है जिसे हर कोई सुलझाना चाहता है लेकिन इसके रहस्य को आज तक कोई नहीं जान पाया है। किसी को आत्माओं पर विश्वास है तो कोई इन सारी चीजों पर यकीन नहीं करता है, लेकिन ये एक सवाल है कि एक इंसान के मौत के बाद क्या उसका अस्तित्व पूरी तरह से समाप्त हो जाता है? क्या मौत ही किसी की कहानी का सम्पूर्ण अंत है?
यदि वाकई में आत्मा अमर है तो मौत के बाद वो कहां जाती है? महाभारत में श्री कृष्ण ने उपदेश दिया कि आत्मा तो अमर और अजर, नाश्वर तो शरीर है। इसका तात्पर्य ये है कि शरीर तो एक न एक दिन नष्ट हो जाता है, लेकिन आत्मा कभी भी नष्ट नहीं होती है। जैसे एक इंसान पुराने कपड़ों का त्याग कर नए कपड़े धारण करता है उसी तरह आत्मा भी एक जीर्ण शरीर को छोड़कर नए शरीर में प्रवेश करती है। हमारे शास्त्रों में जन्म और मृत्यु को लेकर कुछ अनोखी बातें की गई है।
प्राचीनकाल में ऋषि-मुनियों ने अपनी कठिन तपस्या से शास्त्रों में कुछ ऐसी ही अहम बातों का वर्णन किया है, उनका कहना था कि काल की तरह जीवन भी असीम और अनंत है,जीवन का न तो अंत होता है और न ही उसका प्रांरभ। ये एक चक्र की भांति काम करता है जो कि आदि-अनंतकाल से चलता आ रहा है और ऐसे ही चलता रहेगा।
हम लोग जिसे जीवन का अंत समझते है, दरअसल, वो तो बस उस शरीर का अंत होता है, जो कि प्रकृति के पांच तत्वों यानि पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि और आकाश से मिलकर निर्मित होता है। जब भी किसी के घर में किसी सदस्य की मौत होती है तो इंसान आत्मा की शांति के लिए गरूड़ पुराण का पाठ करवाता है।
गरूण पुराण में मृत्यु संबंधित कई बातों की वर्णना की गई है जैसे कि मरने के बाद इंसान की आत्मा को यमदूत अपने साथ यमलोक लेकर जाते हैं। गरूड़ पुराण में ये भी कहा गया है कि मौत के बाद आम्ता को यमदूत केवल 24 घंटे के लिए ही अपने साथ लेकर जाते हैं जहां उसे जीवनकाल में उसके द्वारा किए कर्माे से उसका सामना कराया जाता है। 24 घंटे के बाद ही वो वापस उसी घर में आ जाता है और 13 दिन तक उसी घर में रहता है, 13 दिन के बाद जब उसके घर का पूर्णरूप से शुद्धिकरण हो जाता है, सारे क्रियाकर्म सम्पन्न हो जाते हैं तो आत्मा वापस यमलोक चला जाता है और अपने कर्म के अनुसार जन्मग्रहण करता है।
Published on:
26 Feb 2018 11:25 am
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