
नई दिल्ली। आज के दिन का काफी खास महत्व है। आज यानि कि शुक्रवार दिनांक 02.02.2018 फाल्गुन कृष्ण द्वितीय पर पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र से बने शोभण योग व वाणिज्यकारण होने के कारण देवी विजयालक्ष्मी की पूजा यदि कोई करें तो ये काफी लाभदायक होगा। संसार में खासकर आजकल के दिन में पैसे से बड़ा कुछ नहीं, पूरी दुनिया पैसे के पीछे भाग रहा है।
हम जानते है कि पैसे के अभाव में मनुष्य की दशा काफी खराब हो जाती है। इंसान के ऊपर दुखों का पहाड़ टूट पड़ता है। गरीबी से बढ़कर श्राप और कोई नहीं। ऐसे में निर्धनता के निवारण हेतु देवी महालक्ष्मी के विजयालक्ष्मी स्वरुप का पूजन काफी श्रेष्ठ माना जाता है।
शास्त्रों में विजय लक्ष्मी को जया लक्ष्मी भी कहकर संबोधित किया गया है। आपको बता दें कि मां विजयालक्ष्मी को जीत का प्रतीक माना जाता है। इस स्वरुप में मां लाल वस्त्रों से सुसज्जित हैं, उनके देह पर सुसज्जित हीरे, मोती और सोने के बने गहने होते हैं।
मां विजयालक्ष्मी कमल के फूल पर विराजित होती हैं। मां विजयालक्ष्मी की आठ भुजाएं होती है और इन आठ भुजाओं में चक्र, शंख, कमल, तलवार, भाल, ढाल व एक हाथ अभय व दूसरा वर मुद्रा में है। देवी विजयालक्ष्मी की पूजा करने से इंसान को समस्त दुखों से मुक्ति मिलती है और निर्धनता आस-पास नहीं भटकती है।
मां के सामने गौघृत का दीप और चंदन की अगरबत्ती जलाएं, गुलाब का फूल चढ़ाएं, अबीर चढ़ाएं, इस दिन मां को साबूदाने की खीर का भोग लगाएं तथा ऊपर दिए गए विशेष मंत्र से एक माला जाप करें। पूजा के बाद मां का भोग किसी सुहागन को दान दे दें।
मां विजयलक्ष्मी की पूजा करने के दौरान शंख निश्चित तौर पर बजाएं। इसके अलावा मां विजयालक्ष्मी को चढ़ाए गए चार कमलगट्टों को अपने रसोईघर में छुपाकर रख दें, इससे परिवार की सारी समस्याएं दूर हो जाती है और अंत में मां को चढ़ायी गई कौडिय़ों को जलाकर किसी पवित्र नदी या जल में प्रवाहित कर दें।
दिए गए नियमविधि का पालन करके यदि मां विजयलक्ष्मी की पूजा किया जाएं तो दरिद्रता से मुक्ति मिलती है मां की अपार कृपा उनके भक्त पर बरसती है।
Published on:
01 Feb 2018 05:42 pm
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