
भारतीय संस्कृति में स्त्रियों को लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है। गृहणी को घर का पोषण करने का वरदान प्राप्त है, मां अन्नपूर्णा ने नारी को यह वरदान दिया था। शास्त्रों में भी इस बात का वर्णन है की जहां नारी की पूजा होती है उस घर में देवता निवास करते हैं। क्योंकि एक सगुण आचरण वाली स्त्री घर को हमेशा जोड़कर रखती है और सदस्यों के बीच हमेशा सामंजस्य बनाकर रखती है। इसके साथ ही अलग-अलग शास्त्रों में सौभाग्यवती स्त्री और लक्ष्मी स्वरुप नारी के लक्षण बताए गए हैं। आइए जानते हैं उन लक्षणों के बारे में....
सौभाग्यवती नारी के लक्षण
1. शास्त्रों के अनुसार जिस महिला का मन सुंदर होता है, जो कभी किसी का बुरा नहीं चाहती ऐसी महिला बहुत अच्छी होती है।
2. जो स्त्री हमेशा मीठे वचन बोलती हो जिसकी आवाज मिठी हो और कभी किसी से ऊंची आवाज में बात ना करती हो, जो सभी से मधुर आवाज़ में बात करती हो ऐसी स्त्रियां हमेशा सौभाग्यवती होती है।
3. आस्तिक, सेवा भाव रखने वाली, क्षमाशील, दानशील, बुद्धिमान, दयावान और कर्तव्यों का पालन पूर्ण निष्ठा से करने वाली लक्ष्मी का रूप होती है।
4. जो स्त्री घर आए मेहमानों का आदरभाव से सत्कार करें ऐसी स्त्री लक्ष्मी का रुप होती है।
5. पराया दुख देखकर दुखी होकर अपनी सामर्थ्य के अनुसार उसकी सहायता करे और जो दूसरों को दुख-दर्द में देखकर उसको दूर करने में आनंद का अनुभव करे।
6. घर की रसोई में भेद-भाव किए बिना समान रूप से सभी को भोजन परोसे।
7. जो प्रतिदिन स्नान करके साफ और स्वच्छ वस्त्र पहन कर रसोई घर में प्रवेश करती है।
8. सुबह शाम घर में देवी-देवताओं के सामने धूप, दीप और सुंगधित अगरबत्ती जला कर पूजा-पाठ करती है।
9. जो स्त्री हमेशा पतिव्रत धर्म का पालन करें।
10. हमेशा धर्म और नीति के मार्ग पर चलें और घर के सदस्यों को भी सही मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करे।
Published on:
01 Apr 2019 12:27 pm
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